सुनील कुमार सिंह | एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 25 फरवरी 2026
टैक्स हार्वेस्टिंग क्या है
टैक्स हार्वेस्टिंग निवेश से जुड़ी एक ऐसी रणनीति है, जिसके जरिए निवेशक अपने घाटे को टैक्स बचाने के लिए इस्तेमाल करता है। जब किसी निवेश जैसे शेयर या म्यूचुअल फंड में नुकसान होता है, तो उस निवेश को बेचकर हुए नुकसान को लाभ वाले निवेश के साथ समायोजित किया जा सकता है। इससे कुल टैक्स योग्य लाभ कम हो जाता है और टैक्स की देनदारी घट जाती है। आसान भाषा में कहें तो जहां फायदा हुआ और जहां नुकसान हुआ, दोनों को जोड़कर टैक्स की गणना की जाती है।
यह रणनीति कैसे काम करती है
मान लीजिए किसी निवेश से आपको मुनाफा हुआ है और दूसरे निवेश में नुकसान हुआ है। यदि आप घाटे वाले निवेश को बेच देते हैं, तो उस नुकसान को मुनाफे के खिलाफ दिखाकर टैक्स कम कर सकते हैं। कई निवेशक वित्तीय वर्ष के अंत में अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करते हैं और घाटे वाले निवेश को बेचकर टैक्स हार्वेस्टिंग का फायदा उठाते हैं। बाद में बाजार की स्थिति देखकर दोबारा निवेश भी किया जा सकता है।
किन निवेशकों के लिए ज्यादा उपयोगी
यह रणनीति शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के लिए खास तौर पर उपयोगी मानी जाती है। जिन निवेशकों के पोर्टफोलियो में लाभ और नुकसान दोनों होते हैं, वे टैक्स हार्वेस्टिंग के जरिए बेहतर टैक्स प्लानिंग कर सकते हैं। नियमित निवेश करने वाले और लंबी अवधि की योजना रखने वाले निवेशकों के लिए यह रणनीति अतिरिक्त फायदा दे सकती है।
टैक्स हार्वेस्टिंग करते समय जरूरी सावधानियां
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल टैक्स बचाने के लिए निवेश बेचना हमेशा सही फैसला नहीं होता। निवेश की गुणवत्ता, भविष्य की संभावनाएं और बाजार की स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है। इसके अलावा यह भी समझना चाहिए कि टैक्स हार्वेस्टिंग टैक्स को खत्म नहीं करती, बल्कि कई मामलों में उसे आगे के लिए टाल देती है।
निवेश और टैक्स प्लानिंग में संतुलन जरूरी
वित्तीय विशेषज्ञ मानते हैं कि टैक्स बचत महत्वपूर्ण है, लेकिन निवेश का मुख्य उद्देश्य संपत्ति बनाना होना चाहिए। इसलिए टैक्स हार्वेस्टिंग को एक सहायक रणनीति के रूप में अपनाना बेहतर माना जाता है। सही समय और सही तरीके से अपनाने पर यह रणनीति टैक्स कम करने, पोर्टफोलियो संतुलित रखने और बेहतर वित्तीय योजना बनाने में मदद कर सकती है।




