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तमिलनाडु में बवाल: SIR के खिलाफ DMK का महा-विरोध, अल्पसंख्यक–SC/ST मतदाता लिस्ट से काटने का आरोप

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चेन्नई 11 नवंबर 2025

तमिलनाडु की राजनीति मंगलवार को उस समय उबलती दिखाई दी जब सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और उसके सहयोगी दलों ने चुनाव आयोग द्वारा जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (SIR) के खिलाफ पूरे राज्य में ज़ोरदार प्रदर्शन किया। यह कोई सामान्य राजनीतिक विरोध नहीं था—बल्कि राज्यभर में एक संगठित आक्रोश का विस्फोट था, जिसमें हजारों कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध करना नहीं, बल्कि गenuine voters को हटाकर चुनावी समीकरणों में छेड़छाड़ करना है, और यह प्रक्रिया खास तौर पर अल्पसंख्यकों तथा SC/ST समुदायों को निशाना बना रही है। विरोध के केंद्र में यह आरोप था कि आयोग यह पूरी प्रक्रिया इतनी हड़बड़ी में चला रहा है कि इसकी मंशा खुद संदेह के दायरे में आ गई है।

चेन्नई में आयोजित मुख्य प्रदर्शन में पार्टी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन स्वयं सड़कों पर उतरकर कार्यकर्ताओं का नेतृत्व करते नज़र आए। उन्होंने सीधे और तीखे शब्दों में कहा कि SIR को रोकना तमिलनाडु की जनता के अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का मामला है, और यह “हमारा foremost duty” है। स्टालिन ने मंच से कहा कि यह प्रक्रिया लोकतंत्र की रीढ़ पर प्रहार है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि चुनाव आयोग अपने संवैधानिक दायित्व से भटककर ऐसे निर्देश और संशोधन लागू कर रहा है, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की आत्मा को ही चोट पहुंचा रहे हैं। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि मतदाता सूची से नाम हटाने का खेल एक सुनियोजित रणनीति की तरह दिखाई दे रहा है, जिसमें चुनावी लाभ के लिए कमजोर वर्गों को व्यवस्थित रूप से मताधिकार से वंचित करने की साज़िश झलकती है।

राज्यभर में आयोजित इस विरोध में डीएमके के साथ उसके सहयोगी दल — कांग्रेस, VCK, CPI, CPM, MDMK और कई क्षेत्रीय संगठन — पूरी मजबूती से शामिल हुए। कई जिलों में हजारों कार्यकर्ता मैदानों और सड़कों पर जमा हुए और हाथों में तख्तियां लिए चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाज़ी करते रहे। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि SIR की गति इतनी तेज़ है कि सामान्य मतदाता तक को पता नहीं चलता कि उसका नाम सूची में है भी या नहीं। अनेक लोगों ने शिकायत की कि उनके परिवार के सदस्यों के नाम अचानक गायब हो गए हैं, और जिन इलाकों में अल्पसंख्यक व SC/ST मतदाता अधिक संख्या में हैं, वहां यह समस्या सबसे ज्यादा देखने को मिल रही है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह केवल तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि एक political design है—एक ऐसा डिज़ाइन जो 2026 के लोकसभा और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों को प्रभावित करने के उद्देश्य से रचा गया है।

प्रदर्शन के बीच एक और बड़ा आरोप यह भी उभरा कि SIR की प्रक्रिया में पारदर्शिता का घोर अभाव है। स्थानीय नेताओं का कहना है कि कई जगहों पर बूथ स्तर पर सूचना देने वालों को नियुक्त नहीं किया गया, घर-घर सत्यापन भी नहीं हुआ, और मतदाता सूची में संशोधन करने का कोई स्पष्ट सार्वजनिक रोडमैप नहीं दिया गया। इस कारण यह भय बढ़ गया है कि मतदाता सूची से हटाए जाने वाले नामों की संख्या आने वाले हफ्तों में और बढ़ सकती है। इसके अलावा, कई जिलों से यह रिपोर्ट आई कि शिकायत दर्ज कराने वाले मतदाताओं को कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला और कुछ मामलों में अधिकारी स्वयं संशय में दिखाई दिए।

इन विरोध प्रदर्शनों के बीच राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज़ है कि DMK इन शिकायतों को लेकर जल्द ही चुनाव आयोग से औपचारिक रूप से मिलने वाली है और यदि आवश्यकता पड़ी, तो मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी ले जाया जा सकता है। स्टालिन ने दोहराया कि तमिलनाडु किसी भी ऐसी कोशिश का डटकर मुकाबला करेगा जो उसके नागरिकों के मताधिकार पर हमला करती है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव लोकतंत्र की आत्मा हैं और मतदाता सूची में किसी भी छेड़छाड़ को राज्य स्वीकार नहीं करेगा।

तमिलनाडु में SIR को लेकर यह विवाद केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं रहा—यह अब एक व्यापक राजनीतिक और सामाजिक सवाल बन गया है, जिसमें मताधिकार, संवैधानिक न्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का प्रश्न गहराई से जुड़ा है। जैसे-जैसे SIR की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, राज्य का राजनीतिक तापमान और बढ़ने की संभावना है, और अब सबकी नज़र इस पर टिकी है कि चुनाव आयोग इस बड़े प्रतिरोध और गंभीर आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है।

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