सुमन सिंह | नई दिल्ली 13 नवंबर 2025
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर भयावह स्थिति तक पहुँच गया है, और इसी पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बेहद चिंताजनक टिप्पणी की। कोर्ट की दो-judge बेंच—जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस अतुल एस. चंद्रूकर—ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि दिल्ली की हवा अब स्वास्थ्य के लिए भारी खतरा बन चुकी है। जस्टिस नरसिम्हा ने कोर्टरूम में मौजूद वकीलों और अन्य उपस्थित लोगों से सवाल किया कि जब दिल्ली का प्रदूषण खतरनाक स्तर से ऊपर जा चुका है, तब भी लोग कोर्ट क्यों आ रहे हैं? उन्होंने कहा कि अदालत के पास वर्चुअल सुनवाई की आधुनिक सुविधा उपलब्ध है, और प्रदूषण से बचाव के लिए सभी को इसका लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि दिल्ली की हवा ‘स्थायी नुकसान’ पहुँचा सकती है—यानी इसकी मार सिर्फ अस्थायी बीमारी नहीं, बल्कि लम्बे समय तक शरीर को प्रभावित करने वाली हो सकती है।
इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि वकील मास्क का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन जस्टिस नरसिम्हा ने उनकी बात को तुरंत काटते हुए कहा कि “मास्क भी पर्याप्त नहीं हैं।” उन्होंने संकेत दिया कि हालात इतने खराब हैं कि साधारण मास्क, यहाँ तक कि N-95 भी, इस जहरीली हवा के सामने बहुत सीमित सुरक्षा ही दे पाएंगे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे इस विषय पर मुख्य न्यायाधीश से बात करेंगे, ताकि अदालत की कार्यवाही में वर्चुअल मोड को और प्रोत्साहन दिया जा सके। कोर्ट का यह रुख यह दर्शाता है कि दिल्ली की हवा सिर्फ चिंता का विषय नहीं, बल्कि एक ‘पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी’ बन चुकी है।
इधर, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के अनुसार, मंगलवार सुबह 9 बजे दिल्ली का AQI 425 दर्ज किया गया—जो ‘गंभीर’ श्रेणी से भी ऊपर है। इसके साथ ही CAQM ने NCR में GRAP के चरण-III के तहत 9-सूत्रीय कार्य योजना तत्काल प्रभाव से लागू कर दी है। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य बेंच दिल्ली के प्रदूषण मुद्दे पर लगातार निगरानी रख रही है और राज्यों को सख्त निर्देश दे रही है। इससे पहले, मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस विनोद चंद्रन की बेंच ने पंजाब और हरियाणा सरकारों से पराली जलाने पर हुए नियंत्रण की विस्तृत रिपोर्ट भी माँगी है। पराली जलाना हर साल सर्दियों में दिल्ली और आसपास के राज्यों की हवा को जहरीला बनाने का सबसे बड़ा कारण माना जाता है।
दिल्ली की हवा इतनी खराब हो चुकी है कि अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ रही है, स्कूल ऑनलाइन मोड पर जाने पर विचार कर रहे हैं, बुजुर्ग और बच्चे घरों में सीमित हो गए हैं और डॉक्टर लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि यह प्रदूषण सांस की बीमारियों, हृदय रोगों, त्वचा समस्याओं और फेफड़ों के स्थायी नुकसान तक को जन्म दे सकता है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी महज़ सलाह नहीं, बल्कि बेहद गंभीर चेतावनी है कि अब स्थिति सामान्य सीमाओं से बाहर जा चुकी है और वायु प्रदूषण राष्ट्रीय संकट का रूप ले चुका है।




