एबीसी डेस्क 25 नवंबर 2025
भारतीय क्रिकेट में इन दिनों उथल-पुथल का माहौल है, और इसी बीच भारत के पूर्व महान ओपनर सुनील गावस्कर ने टीम की स्थिति पर बेहद कड़ा और सीधा बयान देकर हलचल मचा दी है। गावस्कर ने गौतम गंभीर के कामकाज और टीम इंडिया पर उनके प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय क्रिकेट को अब तक के सबसे खराब दौर में पहुंचा दिया है। उनका आरोप है कि गंभीर ने बीसीसीआई से पूरी ताकत हासिल कर ली है और टीम की संरचना को अपने हिसाब से बदल दिया है।
गंभीर पर टीम में दखल का आरोप
गावस्कर ने यह तक कहा कि गौतम गंभीर ने बतौर टीम डायरेक्टर अपनी स्थिति का गलत इस्तेमाल किया और अपने कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) स्टाफ को राष्ट्रीय टीम में प्रमुख पदों पर नियुक्त कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि चयन और सपोर्ट स्टाफ फैसलों में गंभीर का दबदबा इतना ज्यादा हो गया है कि अब टीम के कप्तान के पास भी निर्णय लेने की वास्तविक शक्ति नहीं बची है।
रोहित और कोहली को बाहर करने का आरोप
गावस्कर के सबसे विस्फोटक आरोपों में से एक यह भी रहा कि गंभीर ने रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गज खिलाड़ियों को टीम से बाहर करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि भारत की क्रिकेट पहचान बनाने वाले इन खिलाड़ियों को किनारे लगाना टीम के मनोबल और प्रदर्शन पर भारी पड़ा है। गावस्कर के मुताबिक, यह कदम अनुभव और संतुलन को खत्म करने वाला साबित हुआ।
भारतीय क्रिकेट की गिरती स्थिति पर चिंता
गावस्कर ने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन में भारतीय क्रिकेट की ऐसी स्थिति कभी नहीं देखी। उनके अनुसार, मैदान पर खराब प्रदर्शन, अस्थिर संयोजन, और टीम के अंदर बढ़ती खींचतान ने भारतीय क्रिकेट की नींव हिला दी है। उन्होंने दावा किया कि टीम के खराब प्रदर्शन और अव्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी गंभीर पर जाती है।
गंभीर की छवि पर बड़ा सवाल
गावस्कर के बयान ने क्रिकेट जगत में बड़ी बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर गंभीर को आक्रामक सोच और रणनीतिक समझ के लिए सराहा जाता रहा है, वहीं दूसरी ओर उन पर सत्ता केंद्रीकरण और टीम में गुटबाज़ी को बढ़ावा देने के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। गावस्कर की टिप्पणी ने इन आरोपों को और मजबूती दी है।
बीसीसीआई की चुप्पी पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यही है कि बीसीसीआई इस स्थिति पर कैसे प्रतिक्रिया देगा। गावस्कर जैसे वरिष्ठ और सम्मानित क्रिकेटर द्वारा इतने गंभीर आरोप लगाने के बाद भी बोर्ड की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। क्या बोर्ड इस मुद्दे की जांच करेगा या इसे नजरअंदाज कर देगा—यह आने वाला समय बताएगा।
इस विवाद ने भारतीय क्रिकेट के भविष्य को लेकर चिंताओं को और बढ़ा दिया है। आलोचना और बयानबाज़ी के बीच अब निगाहें टीम के आगामी प्रदर्शन और बीसीसीआई की कार्यवाही पर टिकी हैं।




