तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने चुनाव आयोग (ECI) द्वारा राज्य में Special Intensive Revision (SIR) लागू करने के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे जनता के मताधिकार को छीनने और भाजपा को लाभ पहुंचाने की एक सुनियोजित साजिश करार दिया। स्टालिन ने कहा कि “चुनावों से कुछ महीने पहले और वह भी नवंबर-दिसंबर जैसे बरसाती महीनों में SIR प्रक्रिया लागू करना न केवल अव्यवहारिक है, बल्कि यह लोकतंत्र पर सीधा हमला है। जल्दबाजी और अपारदर्शी ढंग से इस प्रक्रिया को लागू करना नागरिकों के अधिकारों को लूटने की साजिश है।”
बिहार जैसे हालात न बनने दें: महिलाओं, अल्पसंख्यकों और दलितों को सबसे बड़ा खतरा
स्टालिन ने कहा कि बिहार में SIR प्रक्रिया के नाम पर लाखों मतदाताओं को सूची से हटा दिया गया था, जिनमें महिलाओं, अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जातियों और जनजातियों की संख्या सबसे अधिक थी। उन्होंने कहा कि “बिहार में पारदर्शिता की कमी ने जनता के मन में गहरा अविश्वास पैदा कर दिया। यह वही रास्ता है जिसे अब तमिलनाडु में दोहराने की कोशिश हो रही है।” उन्होंने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि वह जनता से जानकारी छिपा रहा है और स्पष्ट नहीं कर रहा कि किन दस्तावेज़ों को वैध माना जाएगा और किन्हें नहीं।
आयोग पर आरोप: जनता के अधिकार छीनने की योजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि “SIR का मकसद पारदर्शिता नहीं, बल्कि जनता के अधिकारों को सीमित करना है।” उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर चुनाव आयोग ने नागरिकों के अधिकारों को कुचलने का प्रयास किया, तो तमिलनाडु की जनता सड़कों पर उतरकर इसका जवाब देगी। स्टालिन ने कहा, “वोट देने का अधिकार लोकतंत्र की आत्मा है। जो भी इस अधिकार को छीनने की कोशिश करेगा, वह लोकतंत्र की हत्या का दोषी होगा।”
“जल्दबाजी और गोपनीयता – साजिश का सबूत”
स्टालिन ने कहा कि चुनाव आयोग का यह निर्णय अपने आप में संदिग्ध है। “चुनावों के इतने करीब SIR लागू करना और वह भी बरसाती मौसम में — जब लोग घरों से निकल भी नहीं सकते — यह दिखाता है कि प्रक्रिया को जनता से छिपाकर जल्दबाजी में लागू किया जा रहा है। यह प्रशासनिक सुविधा का मामला नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ की रणनीति है,” उन्होंने कहा। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि यह पूरी प्रक्रिया भाजपा को फायदा पहुँचाने के लिए रची गई है, ताकि मतदाता सूची से कमजोर वर्गों के नाम हटाकर सत्ता पक्ष के लिए रास्ता साफ किया जा सके।
सर्वदलीय बैठक बुलाने की घोषणा
मुख्यमंत्री स्टालिन ने घोषणा की कि चुनाव आयोग की घोषणा के बाद उन्होंने राज्य के सभी गठबंधन दलों से बातचीत की है और 2 नवंबर को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाएगी। इस बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी और आयोग के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि “यह केवल डीएमके की लड़ाई नहीं, बल्कि पूरे तमिलनाडु की लड़ाई है। हम किसी को भी इस राज्य के नागरिकों के अधिकारों से खेलने नहीं देंगे।”
मतदाता सूची से नाम हटाना लोकतंत्र की हत्या
स्टालिन ने कहा कि मतदाता सूची से किसी का नाम हटाना किसी व्यक्ति के अस्तित्व को मिटाने जैसा है। उन्होंने कहा कि “जो व्यक्ति अपना वोट नहीं डाल सकता, उसका लोकतंत्र से संबंध समाप्त हो जाता है। चुनाव आयोग अगर यह समझता है कि वह जनता को ऐसे ही चुप करा देगा, तो यह उसकी सबसे बड़ी भूल होगी।” मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बिहार की तरह तमिलनाडु में भी यदि बिना सूचना या जांच के लाखों नाम हटाए गए तो राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा।
महिलाओं और मजदूरों के मताधिकार पर संकट
स्टालिन ने चेताया कि SIR प्रक्रिया से सबसे अधिक नुकसान महिलाओं, प्रवासी मजदूरों और गरीब तबके को होगा। “तमिलनाडु में लाखों प्रवासी मजदूर हैं जो काम के सिलसिले में अपने गांवों से दूर रहते हैं। अगर SIR के तहत घर-घर जाकर जांच की जाएगी तो ये सभी मतदाता सूची से बाहर हो जाएंगे। क्या यही लोकतंत्र है?” उन्होंने कहा कि आयोग को पहले यह बताना चाहिए कि वह ऐसे वर्गों के लिए क्या विशेष व्यवस्था करने जा रहा है।
बीजेपी पर सीधा हमला
मुख्यमंत्री ने बिना लाग-लपेट भाजपा पर सीधा वार किया। उन्होंने कहा कि “SIR को जिस तरीके से लागू किया जा रहा है, वह केंद्र की भाजपा सरकार के इशारे पर हो रहा है। इसका उद्देश्य साफ है — विपक्षी शासित राज्यों में मतदाता सूची से विपक्षी वोटरों को हटाना और लोकतंत्र की बुनियाद को कमजोर करना।” उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में जो प्रयोग किया गया था, वही अब तमिलनाडु में दोहराने की कोशिश हो रही है ताकि भाजपा को अप्राकृतिक बढ़त मिल सके।
तमिलनाडु लड़ेगा और जीतेगा
स्टालिन ने अपने बयान का समापन जोशभरे शब्दों में किया, “तमिलनाडु किसी भी कीमत पर अपने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करेगा। हम वोटो की चोरी नहीं होने देंगे। यह राज्य लोकतंत्र का प्रहरी है और जो भी इस पर हमला करेगा, उसे जनता करारा जवाब देगी। तमिलनाडु लड़ेगा, और तमिलनाडु जीतेगा।”
एम.के. स्टालिन का यह बयान सिर्फ एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं बल्कि लोकतंत्र की मूल आत्मा — ‘वोट का अधिकार’ — की रक्षा के लिए एक खुला एलान है। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि 2 नवंबर की सर्वदलीय बैठक में तमिलनाडु के नेता SIR के खिलाफ कौन-सी सामूहिक रणनीति बनाते हैं और क्या चुनाव आयोग इस बढ़ते विरोध पर कोई स्पष्टीकरण देता है या नहीं।




