महेंद्र सिंह | नई दिल्ली 27 दिसंबर 2025
राजनीति में कभी-कभी किसी की मौजूदगी, उसकी चुप्पी से ज़्यादा बोलती है। कुछ ऐसा ही नज़ारा आज कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की अहम बैठक में देखने को मिला, जब शशि थरूर लंबे समय बाद इस शीर्ष बैठक में शामिल हुए। उनकी मौजूदगी ने न सिर्फ पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं को हवा दी, बल्कि सियासी गलियारों में भी कई सवाल और संकेत छोड़ दिए। बीते कई महीनों से शशि थरूर की गैरहाज़िरी को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। कहा जा रहा था कि पार्टी नेतृत्व और उनके बीच विचारों की दूरी बढ़ रही है। लेकिन आज जब वे दिल्ली में मुस्कुराते हुए बैठक स्थल पहुंचे, तो माहौल कुछ और ही कहानी कहता नजर आया—जैसे संवाद के दरवाज़े फिर से खुल रहे हों।
बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेता मौजूद थे। देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, संसद के मुद्दे और आने वाली रणनीतियों पर चर्चा हुई। ऐसे समय में थरूर की मौजूदगी को पार्टी की बौद्धिक विविधता और आंतरिक लोकतंत्र के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।
शशि थरूर सिर्फ एक सांसद नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर एक ऐसा चेहरा हैं जो अपनी स्वतंत्र सोच, अंतरराष्ट्रीय अनुभव और बेबाक राय के लिए जाने जाते हैं। कई बार उनकी बातें पार्टी लाइन से अलग रही हैं, लेकिन यही अलग-अलग सुर कांग्रेस की राजनीति को ज़िंदा भी रखते हैं—यह संदेश आज की बैठक से साफ झलकता है।
CWC बैठक में शशि थरूर की वापसी सिर्फ औपचारिक उपस्थिति नहीं थी। यह उस राजनीतिक संकेत की तरह है, जो बताता है कि कांग्रेस में बातचीत, मतभेद और साथ चलने की कोशिशें अब भी ज़िंदा हैं। राजनीति में यह छोटी घटना नहीं—आने वाले दिनों की बड़ी कहानी का शुरुआती पन्ना हो सकती है।




