नई दिल्ली | ABC NATIONAL NEWS | 20 मार्च 2026
दिल्ली दंगों से जुड़े चर्चित मामले में आरोपी शरजील इमाम को करीब 6 साल बाद अंतरिम जमानत मिलने के बाद जेल से रिहा कर दिया गया है। उनकी रिहाई की खबर सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। साल 2020 में दिल्ली में हुए दंगों के बाद शरजील इमाम को गिरफ्तार किया गया था और उन पर देशद्रोह, भड़काऊ भाषण देने और हिंसा की साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद अब अदालत से मिली इस अंतरिम राहत ने एक बार फिर पूरे मामले को सुर्खियों में ला दिया है।
जेल से बाहर निकलते ही शरजील इमाम ने मीडिया से बातचीत में अपनी रिहाई को “छोटी आजादी” बताया। उनके चेहरे पर राहत साफ नजर आ रही थी और समर्थकों के बीच एक तरह का उत्साह भी देखने को मिला। उनके समर्थकों ने इसे न्याय की दिशा में एक कदम बताया, जबकि विरोधी पक्ष इस पर सवाल उठा रहा है। इस बीच यह भी साफ किया गया है कि यह अंतिम फैसला नहीं है, बल्कि केवल अंतरिम जमानत है और केस अभी अदालत में चल रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर देश की न्याय व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतने गंभीर आरोपों वाले मामले में 6 साल तक कोई अंतिम फैसला क्यों नहीं आ पाया। अगर किसी व्यक्ति पर देशद्रोह जैसे आरोप लगे हैं, तो क्या इतने लंबे समय तक केस लंबित रहना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ नहीं है? और अगर अदालत अब जमानत दे रही है, तो क्या इसका मतलब यह माना जाए कि जांच या सुनवाई में कहीं न कहीं देरी या कमजोरी रही है?
एक और अहम सवाल यह भी उठता है कि अगर शरजील इमाम निर्दोष साबित होते हैं, तो उनके जीवन के ये 6 साल कौन लौटाएगा और इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। वहीं दूसरी ओर, अगर वे दोषी हैं, तो अब तक सजा क्यों नहीं हो पाई और न्याय प्रक्रिया इतनी धीमी क्यों रही। क्या यह देरी सिस्टम की कमजोरी को दिखाती है या फिर मामलों की जटिलता के कारण ऐसा हो रहा है?
आम आदमी के नजरिए से देखें तो यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की रिहाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। लोगों के मन में यह चिंता भी है कि कहीं न्याय मिलने में देरी ही न्याय से वंचित करने के बराबर तो नहीं हो रही। अदालतों पर बढ़ता बोझ, जांच एजेंसियों की कार्यशैली और कानूनी प्रक्रिया की लंबी अवधि—ये सभी मुद्दे इस मामले के जरिए फिर से सामने आ गए हैं।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आगे अदालत इस केस में क्या रुख अपनाती है और क्या इस मामले में जल्द कोई ठोस फैसला सामने आता है। फिलहाल, शरजील इमाम की रिहाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि देश में न्याय की प्रक्रिया कितनी तेज और कितनी प्रभावी है, और क्या आम आदमी को समय पर इंसाफ मिल पाता है या नहीं।




