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SC–ST बजट में “दिखावा ज़्यादा, न्याय कम” : कांग्रेस

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एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 10 फरवरी 2026

टारगेटेड योजनाओं के नाम पर 41% खर्च, बाकी बजट डायवर्ट

कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग (Congress SC Dept) के अध्यक्ष एडवोकेट राजेंद्र पाल गौतम ने केंद्र सरकार के कामकाज और बजट आवंटन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि देश की संसद में बजट सत्र चल रहा है और एनडीए सरकार ने हाल ही में करीब 58 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया है, लेकिन इस भारी-भरकम बजट में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के साथ न्याय नहीं हो रहा। राजेंद्र पाल गौतम ने बताया कि बजट में SC वर्ग के लिए 1 लाख 96 हजार 400 करोड़ रुपये और ST वर्ग के लिए 1 लाख 41 हजार 89 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। लेकिन कांग्रेस द्वारा किए गए पिछले कुछ वर्षों के बजट विश्लेषण से यह सामने आया है कि कुल बजट का सिर्फ 41 प्रतिशत ही वास्तव में SC/ST के लिए टारगेटेड योजनाओं पर खर्च होता है। उनका आरोप है कि बाकी पैसा या तो दूसरी मदों में घुमा दिया जाता है या फिर अंत में सरेंडर कर दिया जाता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा—“दिखाओ कुछ, करो कुछ—और बीजेपी इस काम में माहिर है।”

2020 से 2025 तक लगातार गिरता बजट

कांग्रेस SC विभाग के अध्यक्ष ने कहा कि 2020-21 से 2024-25 के बीच SC/ST वर्ग के लिए जो भी बजट तय किया गया, वह लगातार घटता (DECLINE) गया। इस पूरी प्रक्रिया में न तो कोई प्रभावी चेक-बैलेंस सिस्टम है और न ही जवाबदेही। नतीजा यह होता है कि साल के अंत में बजट खर्च नहीं होता और सरेंडर कर दिया जाता है, जिससे इन समुदायों के विकास से जुड़े लक्ष्य अधूरे रह जाते हैं।

नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप: आंकड़ों में करुण कहानी

राजेंद्र पाल ने नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप का उदाहरण देते हुए सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि 2025-26 के बजट में इस योजना के लिए करीब 130 करोड़ रुपये रखे गए थे। इसमें 106 छात्र-छात्राओं का चयन हुआ, लेकिन फंड की कमी के चलते सिर्फ 40 बच्चे ही विदेश जाकर उच्च शिक्षा हासिल कर पाए। करीब 66 चयनित छात्र सिर्फ इसलिए पीछे रह गए क्योंकि सरकार के पास उनके लिए पैसा नहीं था। उन्होंने कहा, “अगर हमारी सरकार इन बच्चों को विदेश पढ़ने भेजती, तो वे कल देश के लिए कुछ करते। दुख इस बात का है कि चयन होने के बाद भी उन्हें अवसर नहीं मिल पाया।”

जहां ज़रूरत थी, वहां पैसा नहीं—वहां डायवर्जन

राजेंद्र पाल ने आरोप लगाया कि जहां SC/ST समुदायों के बच्चों की शिक्षा, रोज़गार और सामाजिक उन्नति के लिए पैसा खर्च होना चाहिए था, वहां सरकार ने बजट का उपयोग नहीं किया। इसके बजाय SC/ST के बजट से रकम दूसरी मदों में डायवर्ट कर दी गई। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि—

– यूरिया सब्सिडी के लिए 14,584 करोड़ रुपये

– फर्टिलाइजर सब्सिडी के लिए 6,804 करोड़ रुपये

– टेलिकॉम कंपनसेशन के लिए 2,539 करोड़ रुपये

– इंफ्रास्ट्रक्चर मेंटेनेंस के लिए 2,535 करोड़ रुपये

– रोड वर्क्स के लिए 10,150 करोड़ रुपये SC/ST बजट से खर्च किए गए, जबकि इन समुदायों की मूलभूत ज़रूरतें आज भी अधूरी हैं।

भूमिहीन SC–ST समुदाय और सरकार की चुप्पी

कांग्रेस नेता ने कहा कि सच्चाई यह है कि भारत में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के बड़ी संख्या में लोग आज भी भूमिहीन हैं। उनके पास न स्थायी आजीविका है, न गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और न ही सामाजिक सुरक्षा। ऐसे में अगर उनके नाम पर तय बजट भी दूसरी जगह खर्च कर दिया जाए, तो यह सामाजिक न्याय के सिद्धांत के साथ सीधा विश्वासघात है।

कांग्रेस की मांग: कानून बने, बजट न हो डायवर्ट

राजेंद्र पाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस की स्पष्ट मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि शेड्यूल कास्ट कंपोनेंट प्लान (SCCP) पर एक सख्त कानून (Legislation) बनाया जाना चाहिए, क्योंकि इसका बजट पिछले कई वर्षों से लगातार डायवर्ट किया जा रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि एक Central Legislation लाई जाए, ताकि SC–ST के लिए तय बजट को किसी और मद में खर्च न किया जा सके। साथ ही, SC–ST से जुड़ी टारगेटेड योजनाओं के लिए बजट बढ़ाया जाए, ताकि इन समुदायों के बच्चे पढ़-लिखकर आगे बढ़ सकें और देश की मुख्यधारा में सम्मान के साथ स्थान पा सकें।

सामाजिक न्याय सिर्फ भाषणों तक सीमित

कांग्रेस SC डिपार्टमेंट का आरोप है कि मौजूदा बजट में सामाजिक न्याय की बात सिर्फ कागज़ों और भाषणों तक सीमित है। जब तक SC–ST बजट की कानूनी सुरक्षा नहीं होगी और उसे सही जगह खर्च नहीं किया जाएगा, तब तक बराबरी और समावेशी विकास का सपना अधूरा ही रहेगा।

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