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यमन में सऊदी–UAE तनाव चरम पर : मुकल्ला बंदरगाह पर बमबारी, UAE की सेना वापसी और आपातकाल से गहराता संकट

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अंतरराष्ट्रीय डेस्क | 30 दिसंबर 2025

मुकल्ला पर हमला: सिर्फ बमबारी नहीं, एक सख्त राजनीतिक संदेश

यमन के दक्षिणी बंदरगाह शहर मुकल्ला पर सऊदी अरब की हवाई बमबारी ने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया है। यह हमला केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि खाड़ी देशों के भीतर गहराते मतभेदों का खुला संकेत माना जा रहा है। जिस शहर को यमन की आर्थिक और मानवीय जीवनरेखा कहा जाता है, उसी पर हमला यह बताता है कि संघर्ष अब रणनीतिक दायरों से निकलकर खुले राजनीतिक टकराव में बदल चुका है। स्थानीय लोगों के लिए यह हमला डर, अनिश्चितता और एक बार फिर विस्थापन की आशंका लेकर आया है।

सऊदी अरब का दावा: हथियारों की ‘अनधिकृत’ खेप थी निशाने पर

सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन का कहना है कि मुकल्ला बंदरगाह पर किया गया हमला UAE से आई हथियारों और बख्तरबंद वाहनों की खेप को रोकने के लिए था। सऊदी अधिकारियों के अनुसार, यह खेप दक्षिणी अलगाववादी संगठन साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) के लिए भेजी जा रही थी, जो हाल के महीनों में दक्षिण यमन, खासकर हदरमौत प्रांत में अपनी पकड़ मजबूत कर चुका है।

दावा किया गया कि यह खेप UAE के फुजैराह बंदरगाह से दो जहाजों के जरिए आई थी, जिनमें एक जहाज ‘ग्रीनलैंड’ बताया गया, और इन जहाजों ने अपनी ट्रैकिंग प्रणाली बंद कर रखी थी। सऊदी अरब ने इस कार्रवाई को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य कदम बताया है।

UAE की सख्त सफाई: हथियार नहीं, केवल वाहन भेजे गए थे

सऊदी आरोपों के बाद संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने कड़ा बयान जारी कर सभी आरोपों को खारिज कर दिया। अबू धाबी का कहना है कि भेजी गई खेप में कोई हथियार नहीं थे, बल्कि केवल वाहन और सामग्री थी, जो यमन में तैनात उसके काउंटर-टेररिज्म बलों के इस्तेमाल के लिए थी। UAE ने बमबारी पर नाराज़गी और आश्चर्य जताते हुए कहा कि इस तरह की सैन्य कार्रवाई यमन में हालात को और बिगाड़ेगी। उसने यह भी साफ किया कि उसका उद्देश्य किसी अलगाववादी समूह को समर्थन देना नहीं है।

अलगाववादियों को समर्थन के आरोप सिरे से खारिज

UAE के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह यमन के किसी भी अलगाववादी संगठन को समर्थन देने के आरोपों को स्वीकार नहीं करता। मंत्रालय ने कहा कि ऐसे आरोप क्षेत्रीय स्थिरता को नुकसान पहुंचाते हैं और सभी फैसले तथ्यों, आपसी समन्वय और राजनीतिक समाधान के आधार पर होने चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब खाड़ी क्षेत्र में UAE की भूमिका को लेकर सवाल तेजी से उठ रहे हैं।

सेना वापसी का फैसला: दबाव, चेतावनी और बदले समीकरण

तेजी से बदले हालात के बीच UAE ने बड़ा फैसला लेते हुए यमन से अपनी शेष सैन्य टुकड़ियों, खासकर काउंटर-टेररिज्म यूनिट्स को स्वेच्छा से वापस बुलाने की घोषणा कर दी। यह कदम उस समय उठाया गया जब सऊदी समर्थित यमनी प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल (PLC) ने UAE को 24 घंटे के भीतर अपनी सेनाएँ हटाने और रक्षा समझौता रद्द करने का अल्टीमेटम दिया था। यह साफ संकेत है कि जो देश कभी इस युद्ध में साझेदार थे, अब उनके हित और रास्ते अलग हो चुके हैं।

आपातकाल और 72 घंटे का सख्त प्रतिबंध: आम ज़िंदगी पर भारी असर

बमबारी के बाद यमन सरकार ने मुकल्ला और आसपास के इलाकों में आपातकाल घोषित कर दिया और 72 घंटे का सख्त प्रतिबंध लागू किया गया। बंदरगाहों, हवाई अड्डों और जमीनी सीमाओं पर आवाजाही रोक दी गई। इसका सबसे गहरा असर आम नागरिकों पर पड़ा है—भोजन, दवाइयों और मानवीय सहायता की आपूर्ति बाधित होने का खतरा मंडरा रहा है। शहर में धुएं के गुबार, क्षतिग्रस्त वाहन और खाली सड़कें भय और असुरक्षा की तस्वीर पेश कर रही हैं।

पुराने सहयोगी, नए विरोधी: टकराव की गहरी जड़ें

सऊदी अरब और UAE कभी हूती विद्रोहियों के खिलाफ एक साझा मोर्चे पर थे, लेकिन अब उनके हित स्पष्ट रूप से टकरा रहे हैं। सऊदी अरब जहां यमन की एकीकृत सरकार का समर्थन करता है, वहीं UAE को दक्षिणी अलगाववादी STC के करीब माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण यमन के तेल क्षेत्र, रणनीतिक बंदरगाह और राजनीतिक प्रभाव को लेकर यह टकराव और गहरा सकता है, जिसका असर पूरे खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) पर भी पड़ सकता है।

सबसे बड़ा संकट: यमन का आम आदमी

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा नुकसान यमन के आम नागरिकों को उठाना पड़ रहा है। वर्षों की जंग ने पहले ही लाखों लोगों को बेघर कर दिया है, भुखमरी और बीमारियां आम हो चुकी हैं। अब यह नया तनाव उनकी बची-खुची उम्मीदों पर भी भारी पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों से शांति प्रयास तेज़ करने और मानवीय राहत बढ़ाने की मांग फिर तेज हो गई है। यमन एक बार फिर उसी सच्चाई से जूझ रहा है—जहां सत्ता, प्रभाव और रणनीति की लड़ाई में सबसे पीछे रह जाता है इंसान।

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