एबीसी नेशनल न्यूज | रियाद | 26 फरवरी 2026
सार्वजनिक स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सऊदी अरब ने बड़ा फैसला लेते हुए भारत सहित 40 देशों से पोल्ट्री उत्पाद और अंडों के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह निर्णय सऊदी फूड एंड ड्रग अथॉरिटी (SFDA) द्वारा वैश्विक स्तर पर बर्ड फ्लू के बढ़ते मामलों और पशुजनित बीमारियों की आशंकाओं को देखते हुए लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम एहतियाती उपाय के तौर पर उठाया गया है, ताकि स्थानीय बाजार में खाद्य सुरक्षा मानकों को मजबूत रखा जा सके और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा हो सके।
प्रतिबंध की सूची में भारत के अलावा जर्मनी, बांग्लादेश, चीन, ब्रिटेन, जापान, नेपाल, मिस्र, दक्षिण अफ्रीका, ईरान और कई अन्य देश शामिल हैं। इसके साथ ही 16 देशों के कुछ राज्यों और शहरों पर आंशिक प्रतिबंध भी लगाया गया है, जहां बीमारी के जोखिम को देखते हुए आयात पर निगरानी बढ़ाई गई है। सऊदी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह सूची स्थायी नहीं है और वैश्विक स्वास्थ्य स्थिति तथा जोखिम आकलन के आधार पर समय-समय पर इसकी समीक्षा की जाती रहेगी।
अधिकारियों के अनुसार जिन पोल्ट्री उत्पादों को पर्याप्त तापमान पर प्रोसेस या हीट ट्रीटमेंट किया गया है और जिनमें वायरस के खत्म होने की पुष्टि होती है, उन्हें कुछ शर्तों के साथ आयात की अनुमति दी जा सकती है। इसके लिए निर्यातक देश की सक्षम प्राधिकरण द्वारा जारी स्वास्थ्य प्रमाणपत्र अनिवार्य होगा, जिसमें यह प्रमाणित किया जाएगा कि उत्पाद सुरक्षित हैं और निर्धारित मानकों का पालन करते हैं। साथ ही यह भी जरूरी होगा कि उत्पाद किसी स्वीकृत और प्रमाणित उत्पादन इकाई से आए हों।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर वैश्विक पोल्ट्री व्यापार पर पड़ सकता है और प्रभावित देशों के निर्यातकों को वैकल्पिक बाजार तलाशने पड़ सकते हैं। भारत जैसे देशों के लिए यह कदम पोल्ट्री उद्योग और निर्यात कारोबार पर अल्पकालिक दबाव पैदा कर सकता है, हालांकि घरेलू बाजार की मजबूत मांग के कारण इसका प्रभाव सीमित रहने की संभावना भी जताई जा रही है।
सऊदी अरब का कहना है कि बर्ड फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए आयात नियमों को सख्त करना जरूरी हो गया था और यह निर्णय पूरी तरह सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा के हित में लिया गया है। फिलहाल इस फैसले के बाद वैश्विक पोल्ट्री बाजार में हलचल देखी जा रही है और निर्यातक देशों की नजर आगे होने वाली समीक्षा तथा प्रतिबंध में संभावित ढील पर टिकी हुई है।



