एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली, 16 मार्च 2026
लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आज नई दिल्ली के आर.के. पुरम स्थित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) मेस में कोबरा बटालियन के असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक से मुलाकात की। यह मुलाकात देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले जवानों के प्रति गहरे सम्मान और आभार की भावना से प्रेरित थी। अजय मलिक हाल ही में झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले के सारंडा जंगलों में माओवादियों के खिलाफ चलाए गए एक कठिन नक्सल विरोधी अभियान के दौरान आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) विस्फोट की चपेट में आ गए थे। इस भीषण विस्फोट में गंभीर रूप से घायल होने के कारण डॉक्टरों को उनकी जान बचाने के लिए उनका एक पैर (बायां पैर) काटना पड़ा था। इसके बावजूद अजय मलिक का अदम्य साहस और राष्ट्र के प्रति समर्पण अटल बना हुआ है, जो पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
राहुल गांधी ने मुलाकात के दौरान अजय मलिक का हालचाल जाना, उनके स्वास्थ्य की विस्तृत जानकारी ली और उनके परिवार के सदस्यों से भी बातचीत की। उन्होंने कहा कि ऐसे जांबाजों का बलिदान ही देश की एकता और सुरक्षा की नींव है। राहुल गांधी ने अजय मलिक के साहस को सलाम करते हुए कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में दिन-रात कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी निभाने वाले कोबरा कमांडो जैसे योद्धा राष्ट्र की रक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं, और उनका यह योगदान पूरे देश को प्रेरित करता है। मुलाकात के दौरान राहुल गांधी ने अजय मलिक को आश्वासन दिया कि उनका पूरा समर्थन और देश का आभार उनके साथ है, तथा ऐसे बहादुर जवानों के पुनर्वास और देखभाल के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए।
कोबरा बटालियन (कॉम्बैट बटालियन फॉर रेस्क्यू एंड ऑपरेशंस) सीआरपीएफ की एक विशेष इकाई है, जो मुख्य रूप से नक्सलवाद विरोधी अभियानों के लिए प्रशिक्षित की जाती है। यह बटालियन घने जंगलों, पहाड़ी इलाकों और दुर्गम क्षेत्रों में ऑपरेशन चलाने के लिए जानी जाती है, जहां नक्सली संगठन सक्रिय रहते हैं। अजय मलिक 209 कोबरा बटालियन से जुड़े थे और सारंडा के जंगलों में माओवादियों के खिलाफ चल रहे अभियान में शामिल थे, जहां आईईडी विस्फोट जैसी घातक चुनौतियां आम हैं। इस घटना ने एक बार फिर नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों की बहादुरी और जोखिम को रेखांकित किया है। अजय मलिक जैसे अधिकारियों का बलिदान देश के आंतरिक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, और ऐसे मामलों में राजनीतिक नेताओं द्वारा व्यक्तिगत मुलाकात सम्मान का प्रतीक बन जाती है।
यह मुलाकात सुरक्षा बलों के प्रति राजनीतिक नेतृत्व के सम्मान को दर्शाती है, खासकर तब जब देश नक्सलवाद जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। राहुल गांधी की यह पहल न केवल अजय मलिक और उनके परिवार के लिए प्रोत्साहन का काम करेगी, बल्कि पूरे सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा बलों के जवानों को यह संदेश देगी कि उनका योगदान और बलिदान देश द्वारा कभी भुलाया नहीं जाएगा। देश ऐसे वीरों पर गर्व करता है, जो चुपचाप अपनी ड्यूटी निभाते हुए राष्ट्र की सेवा में लगे रहते हैं।






