12 जून को अहमदाबाद में हुए भीषण Air India Flight AI-171 हादसे के बाद देश भर में उड्डयन सुरक्षा को लेकर चिंता और बहस तेज़ हो गई थी। इस पृष्ठभूमि में 27 जून 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें नागरिक उड्डयन मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, DGCA (नागर विमानन महानिदेशालय), और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार समेत देश की प्रमुख एजेंसियों के अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में सबसे पहले Boeing 787 Dreamliner विमानों की व्यापक जाँच का निर्णय लिया गया, जिनमें से कई भारत की प्रमुख एयरलाइनों के बेड़े में शामिल हैं। इस निर्णय के तहत, भारत में पंजीकृत सभी Dreamliner विमानों की फ्लाइट-वर्दी और इंजनों की विस्तृत ऑडिट 30 दिनों में पूरी करने का लक्ष्य रखा गया, जिसमें GE और Rolls Royce इंजनों की बारीकी से जांच की जाएगी।
प्रधानमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि “यात्री सुरक्षा सिर्फ एक नियम नहीं, एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है।” उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि देश में मौजूद एविएशन प्रोटोकॉल को अगले 90 दिनों में वैश्विक मानकों के अनुरूप अद्यतन किया जाए। इसके लिए National Aviation Safety Council की स्थापना की बात दोबारा जोर पकड़ने लगी, जिसे विशेषज्ञों ने लंबे समय से जरूरी माना था।
बैठक के दौरान यह भी तय किया गया कि:
पायलट और तकनीकी स्टाफ की ट्रेनिंग अब अधिक कठोर मानकों के तहत होगी, जिसमें नियमित सिमुलेशन टेस्ट, मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन और तकनीकी दक्षता पुनर्परीक्षण अनिवार्य होंगे।
Engine Burn-in Test, जो अब तक केवल नवनिर्मित विमानों पर लागू होता था, उसे अब भारत में हर 500 उड़ानों के बाद अनिवार्य रूप से किया जाएगा।
विमान टेक-ऑफ से पहले Pre-Flight Diagnostic Scan की प्रक्रिया को अनिवार्य बनाया जाएगा, जो अभी तक एयरलाइनों पर निर्भर थी।
विदेशी रूट पर उड़ान भरने वाले सभी विमानों पर एक स्वतंत्र विमान निरीक्षण अधिकारी नियुक्त किए जाने की सिफारिश की गई।
समीक्षा बैठक में Air India द्वारा दी गई प्राथमिक रिपोर्ट का भी अध्ययन किया गया, जिसमें हादसे के बाद कंपनी द्वारा 69 घरेलू और 14 अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रद्द या पुनर्निर्धारित किए जाने की जानकारी दी गई थी। प्रधानमंत्री ने एयर इंडिया से स्पष्ट शब्दों में कहा कि दुर्घटना प्रबंधन और यात्रियों को मुआवजा देने की प्रक्रिया पारदर्शी और तेज़ होनी चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने हादसे में जान गंवाने वाले सभी यात्रियों को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए कहा था, “यह सिर्फ तकनीकी विफलता नहीं, बल्कि देश की आत्मा पर लगा घाव है। हम अपने नागरिकों की सुरक्षा और संरक्षा से कभी समझौता नहीं करेंगे — चाहे इसके लिए कितने भी कदम क्यों न उठाने पड़ें।”
प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस बैठक के बाद यह भी निर्देश जारी किया कि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के बीच संयुक्त आपातकालीन अभ्यास (Mock Drills) अब हर महीने देश के सभी बड़े हवाई अड्डों पर आयोजित किए जाएंगे। यह कदम प्रतिक्रिया समय को कम करने और समन्वय बेहतर बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
इस ऐतिहासिक समीक्षा बैठक के बाद भारत ने दुनिया को यह स्पष्ट संकेत दिया है कि वह उड्डयन सुरक्षा में सिर्फ फॉलोअर नहीं, अब एक लीडर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।




