एबीसी नेशनल न्यूज | जिनेवा | 17 फरवरी 2026
रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधि 17 और 18 फरवरी को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आमने-सामने बैठने जा रहे हैं। यह ताज़ा दौर की शांति वार्ता अमेरिका की मध्यस्थता में हो रही है। मॉस्को की ओर से संकेत दिए गए हैं कि बातचीत का केंद्र मुख्य रूप से “जमीन” यानी कब्जे वाले और विवादित क्षेत्रों की स्थिति पर रहेगा।
करीब दो साल से अधिक समय से जारी युद्ध के बीच यह बैठक अहम मानी जा रही है। युद्ध ने पूर्वी और दक्षिणी यूक्रेन के कई इलाकों को तबाह कर दिया है और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय लंबे समय से किसी राजनीतिक समाधान की उम्मीद लगाए हुए है। जिनेवा में होने वाली यह वार्ता उसी दिशा में एक नई कोशिश के रूप में देखी जा रही है।
क्रेमलिन का कहना है कि मौजूदा वास्तविक नियंत्रण रेखा और कब्जे वाले क्षेत्रों की कानूनी-राजनीतिक स्थिति पर चर्चा अनिवार्य होगी। रूस पहले भी कह चुका है कि जिन इलाकों को उसने अपने साथ मिलाने की घोषणा की है, वे बातचीत का विषय नहीं हैं। दूसरी ओर, कीव स्पष्ट कर चुका है कि उसकी प्राथमिकता अपनी क्षेत्रीय अखंडता की बहाली है और वह किसी स्थायी सीमा परिवर्तन को स्वीकार नहीं करेगा।
अमेरिका, जो इस दौर की वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, ने दोनों पक्षों से “व्यावहारिक और यथार्थवादी रुख” अपनाने की अपील की है। वॉशिंगटन का कहना है कि उद्देश्य तत्काल युद्धविराम और दीर्घकालिक समाधान की दिशा में ठोस कदम तलाशना है। हालांकि, अब तक दोनों पक्षों के रुख में गहरे मतभेद बने हुए हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि जमीन और सीमा का प्रश्न ही इस संघर्ष की जड़ में है, इसलिए इस पर सहमति बनाना आसान नहीं होगा। फिर भी, लगातार सैन्य टकराव के बीच कूटनीतिक चैनल का खुला रहना अपने आप में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जिनेवा की यह बैठक क्या किसी ठोस समझौते की ओर बढ़ेगी या फिर मतभेद जस के तस रहेंगे, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। फिलहाल इतना तय है कि युद्ध की थकान और बढ़ते मानवीय संकट ने दोनों पक्षों पर बातचीत की मेज तक आने का दबाव जरूर बनाया है।




