राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | पटना | 31 मार्च 2026
बिहार कांग्रेस में संगठनात्मक फेरबदल की कोशिश अब अंदरूनी विवाद में बदलती नजर आ रही है। हाल ही में जारी जिलाध्यक्षों की नई सूची पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने ही सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि इस सूची में सभी वर्गों और नेताओं की उचित भागीदारी नहीं दिख रही, इसलिए इसे अंतिम नहीं माना जा सकता।
राजेश राम का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस बिहार में खुद को मजबूत करने के लिए संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की कोशिश कर रही है। लेकिन जिलाध्यक्षों की सूची जारी होते ही पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा। कई नेताओं ने आरोप लगाया कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी हुई है।
प्रदेश अध्यक्ष ने भी इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संकेत दिए हैं कि सूची में बदलाव संभव है। उन्होंने कहा कि पार्टी में सभी समुदायों, वर्गों और समर्पित कार्यकर्ताओं को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। अगर कहीं कमी रह गई है तो उसे सुधारना जरूरी है। उनके इस बयान के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि जिलाध्यक्षों की नई संशोधित सूची जल्द जारी हो सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, कई जिलों से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सीधे हाईकमान तक अपनी नाराजगी पहुंचाई है। इसके बाद दिल्ली स्तर पर भी इस मुद्दे पर चर्चा शुरू हो गई है। कांग्रेस नेतृत्व नहीं चाहता कि चुनावी तैयारियों के बीच संगठनात्मक विवाद पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाए।
बिहार कांग्रेस पहले ही लंबे समय से गुटबाजी की समस्या से जूझ रही है। ऐसे में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर उठा यह विवाद पार्टी के लिए नई चुनौती बन गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर समय रहते इस असंतोष को दूर नहीं किया गया, तो इसका असर आगामी चुनावों पर भी पड़ सकता है।
अब सबकी नजर कांग्रेस हाईकमान पर टिकी है कि वह इस विवाद को किस तरह सुलझाता है और क्या वास्तव में नई सूची जारी कर संगठन में संतुलन बनाने की कोशिश की जाती है या नहीं।




