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RSS की अखिल भारतीय प्रचारक बैठक में मणिपुर से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ तक, समसामयिक मुद्दों से लेकर सेवा और संस्कृति पर हुआ मंथन

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अखिल भारतीय प्रचारक बैठक का समापन: संगठन, समाज और संस्कृति पर हुआ गहन चिंतन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रचारक बैठक 7 जुलाई को संपन्न हुई। इस विशेष बैठक में देशभर से वरिष्ठ प्रचारकों ने भाग लिया और संगठन की वर्तमान गतिविधियों की समीक्षा के साथ-साथ भविष्य की रणनीति पर विस्तार से विचार किया। यह वार्षिक बैठक संघ के लिए केवल संगठनात्मक समन्वय का मंच नहीं होती, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण, सामाजिक चेतना और वैचारिक दिशा तय करने का अवसर भी होती है।

मणिपुर से मंथन की शुरुआत, सामाजिक समरसता पर विशेष फोकस

बैठक के शुरुआती सत्रों में मणिपुर में जारी जातीय-सामाजिक टकराव और हिंसा को लेकर विशेष चर्चा हुई। संघ ने माना कि स्थायी समाधान केवल प्रशासनिक कदमों से नहीं, बल्कि स्थानीय समाज में विश्वास और संवाद की बहाली से ही संभव है। स्वयंसेवकों को निर्देश दिया गया कि वे शांति और समरसता के वाहक बनें, विशेषकर पूर्वोत्तर के संवेदनशील इलाकों में। यह एक ऐसा मुद्दा था जिसने बैठक को एक मानवीय और राष्ट्रीय चिंता के धरातल पर जोड़ दिया।

 ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को मिला समर्थन: महिला सशक्तिकरण के प्रति संघ की प्रतिबद्धता

बैठक में संघ के सामाजिक संगठनों द्वारा चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सराहना की गई, जो त्यागी, पीड़ित और वंचित महिलाओं के पुनर्वास और सम्मान के लिए समर्पित एक पहल है। यह ऑपरेशन केवल राहत नहीं, बल्कि स्त्री गरिमा की पुनर्स्थापना का एक सांस्कृतिक और सामाजिक अभियान है। संघ ने इस कार्यक्रम को देशभर में विस्तार देने का संकल्प लिया और महिला-संवेदनशील दृष्टिकोण को संगठित समाज का अनिवार्य हिस्सा माना।

वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका और “विश्वगुरु” की दिशा

बैठक में इस पर भी गंभीर मंथन हुआ कि आज के बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका क्या होनी चाहिए। संघ ने यह स्पष्ट किया कि भारत केवल राजनीतिक शक्ति नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और नैतिक मार्गदर्शक की भूमिका निभाने के लिए तैयार है। “वसुधैव कुटुंबकम” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” जैसे भारतीय विचारों को वैश्विक संवाद का केंद्र बनाने की दिशा में कार्य करने की बात कही गई।

सामाजिक समरसता, शिक्षा और सेवा कार्यों को और सशक्त बनाने की रणनीति

बैठक में निर्णय लिया गया कि शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्राम विकास, और सेवा प्रकल्पों को और सुदृढ़ किया जाएगा। संघ का मानना है कि वंचित, पिछड़े और उपेक्षित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़कर ही एक अखंड और आत्मनिर्भर भारत की कल्पना साकार की जा सकती है। इसके लिए स्वयंसेवकों को उनके क्षेत्रों में नए सेवा प्रकल्पों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

परिवार प्रबोधन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण संघ की प्राथमिकता

बैठक में पारिवारिक संस्था के विघटन को लेकर भी चिंता जताई गई। संघ ने ‘परिवार प्रबोधन’ अभियान को गति देने की योजना बनाई है, जिससे संस्कार, संवाद और संतुलन को पुनः केंद्र में लाया जा सके। इसके साथ ही, सांस्कृतिक कार्यक्रम, भारतीय परंपराओं और जीवन मूल्यों के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष कार्ययोजनाएं बनाई गईं, ताकि युवा पीढ़ी अपने संस्कारों और राष्ट्रीय कर्तव्यों से जुड़े।

राष्ट्र सेवा के लिए एकात्म भावना और संगठन की ऊर्जा का समन्वय

तीन दिनों की यह अखिल भारतीय बैठक संघ के सेवा-भाव, राष्ट्र-समर्पण और वैचारिक स्पष्टता का प्रतीक बनकर सामने आई। मणिपुर की सामाजिक चुनौतियों से लेकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के ज़रिए महिला पुनर्वास तक, और वैश्विक विमर्श में भारत की सांस्कृतिक भूमिका से लेकर गाँव-गाँव सेवा अभियान तक—संघ ने अपनी भावी दिशा को स्पष्ट किया। बैठक के समापन पर संघ पदाधिकारियों ने कहा: “संघ का कार्य भारत माता की सेवा है, और प्रत्येक स्वयंसेवक उसका साधक।”

अब यह तय है कि आने वाले महीनों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने संगठनात्मक विस्तार के साथ-साथ सामाजिक समरसता, महिला गरिमा, परिवार प्रबोधन और वैश्विक सांस्कृतिक संदेश को केंद्र में रखकर सेवा कार्यों को गति देगा।

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