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संयम बिना दृष्टि और न्याय के खोखला है, गवर्नेंस नहीं—हेडलाइन मैनेजमेंट कर रही सरकार : कांग्रेस

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एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 10 फरवरी 2026

दोनों सदनों से उठे सवालों ने खोली बजट की असल तस्वीर

कांग्रेस ने बजट-2026 पर सरकार को जिस अंदाज़ में घेरा, उसी से यह हेडलाइन खुद-ब-खुद न्यायसंगत हो जाती है। लोकसभा में जहां Shashi Tharoor ने नीति, दृष्टि और न्याय के अभाव को उजागर किया, वहीं राज्यसभा में Digvijaya Singh, Neeraj Dangi और Rajani Patil ने बेरोज़गारी, महंगाई, बजट खर्च की विफलता, बाजार की प्रतिक्रिया और पर्यावरणीय संकट जैसे मुद्दों पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया। कांग्रेस का आरोप साफ है—बजट में शब्दों और आंकड़ों की चमक तो है, लेकिन आम आदमी के जीवन में बदलाव की कोई ठोस रोशनी नहीं। यही वजह है कि पार्टी इसे गवर्नेंस नहीं, बल्कि “हेडलाइन मैनेजमेंट” करार दे रही है।

लोकसभा में शशि थरूर का सधा हुआ लेकिन तीखा प्रहार

लोकसभा में केंद्रीय बजट पर चर्चा के दौरान शशि थरूर ने कहा कि सरकार जिस बजट को “संयमित” बताकर सराहना बटोर रही है, वह दरअसल दृष्टि और न्याय के अभाव में खोखला है। उन्होंने साफ कहा कि बजट बेरोज़गारी, बढ़ती महंगाई, जीवन-यापन की लागत और गहराती असमानता जैसे बुनियादी सवालों से आंखें मूंदे हुए है। थरूर के मुताबिक, आंकड़ों की सजावट और शब्दों की कलाबाज़ी के बावजूद यह बजट आम आदमी की वास्तविक ज़रूरतों और आकांक्षाओं से पूरी तरह कटा हुआ है। उन्होंने दो टूक कहा—यह शासन नहीं, बल्कि सिर्फ हेडलाइन मैनेजमेंट है।

PM-KUSUM और ग्रीन हाइड्रोजन पर सरकार की पोल

शशि थरूर ने नई और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाते हुए बताया कि PM-KUSUM जैसी महत्वाकांक्षी योजना अपने तय लक्ष्य से करीब 70 प्रतिशत पीछे रह गई है और आवंटित बजट का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा खर्च ही नहीं हो पाया। उन्होंने पूछा कि जब मौजूदा योजनाओं का यह हाल है, तो 2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के बड़े-बड़े दावे आखिर कैसे पूरे होंगे। थरूर ने यह भी रेखांकित किया कि सरकार के पास न तो ग्रीन हाइड्रोजन की मांग बढ़ाने की कोई ठोस रणनीति है और न ही उद्योग, परिवहन व कृषि क्षेत्रों में इसके उपयोग का स्पष्ट रोडमैप।

राज्यसभा में कांग्रेस का साझा और आक्रामक हमला

राज्यसभा में दिग्विजय सिंह ने बजट को आम आदमी से कटा हुआ बताते हुए कहा कि यह दस्तावेज़ बेरोज़गारी, महंगाई और सामाजिक-आर्थिक असमानता जैसे ज्वलंत मुद्दों को पूरी तरह नज़रअंदाज़ करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार भाषणों में कल्याण की बात करती है, लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि बजट आवंटन का बड़ा हिस्सा खर्च ही नहीं हो पाता। यह प्रशासनिक विफलता और योजनाओं की खोखली घोषणा का स्पष्ट प्रमाण है।

“आंकड़ों की चमक, आम इंसान के जीवन में अंधेरा”

राज्यसभा में बजट-2026 पर बोलते हुए नीरज डांगी ने कहा कि मोदी सरकार का यह बजट देखने में भले ही आंकड़ों की चमक से भरा हो, लेकिन आम इंसान के जीवन में इससे कोई रोशनी नहीं आती। उन्होंने इसे अब तक का सबसे नीरस बजट बताते हुए कहा कि सरकार पुरानी घोषणाएं पूरी करने में नाकाम रही है, लेकिन हर साल की तरह इस बार भी भविष्य के लिए नई घोषणाओं का पुलिंदा थमा दिया गया है। उनके अनुसार, यह बजट उम्मीद नहीं, बल्कि निराशा पैदा करता है।

शेयर बाजार की गिरावट ने बढ़ाए सवाल

नीरज डांगी ने यह भी कहा कि बजट पेश होते ही शेयर बाजार में तेज गिरावट आई और सेंसेक्स नीचे लुढ़क गया। उनके मुताबिक, यह बाजार की प्रतिक्रिया खुद बताती है कि उद्योग जगत और निवेशकों को बजट में कोई ठोस आर्थिक दिशा या भरोसा नज़र नहीं आया। अगर बजट में दम होता, तो बाजार का रुख बिल्कुल अलग होता।

पर्यावरण और उर्वरक नीति पर भी सरकार कटघरे में

राज्यसभा में राजनी पाटिल ने उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल से हो रहे पर्यावरणीय नुकसान का मुद्दा उठाया। उन्होंने CPCB और अंतरराष्ट्रीय शोधों का हवाला देते हुए कहा कि नाइट्रोजन और फॉस्फोरस आधारित उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से नदियों और झीलों का यूट्रोफिकेशन, भूजल में नाइट्रेट प्रदूषण और जलीय जीवन को गंभीर नुकसान हो रहा है। उन्होंने सरकार से पूछा कि उर्वरक निर्माण इकाइयों द्वारा नियमों की अनदेखी और बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे।

लोकसभा में शशि थरूर और राज्यसभा में दिग्विजय सिंह, नीरज डांगी व रजनी पाटिल—चारों नेताओं की दलीलों और सवालों ने कांग्रेस की हेडलाइन को पूरी तरह सही ठहरा दिया। पार्टी का स्पष्ट कहना है कि बजट-2026 आम आदमी विरोधी, दृष्टिहीन और प्रचार-केंद्रित दस्तावेज़ है। जब तक बजट ज़मीनी हकीकत, रोज़गार, महंगाई और पर्यावरण जैसे मुद्दों से सीधे नहीं जुड़ता, तब तक वह गवर्नेंस नहीं, सिर्फ हेडलाइन मैनेजमेंट बनकर ही रह जाएगा।

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