एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 19 फरवरी 2026
ऊर्जा क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों के बीच केंद्र सरकार ने चीनी उपकरणों के आयात पर लगे प्रतिबंधों में सीमित ढील देने का फैसला किया है। सरकारी बिजली और कोयला कंपनियों को कुछ जरूरी उपकरण चीन से आयात करने की अनुमति दी गई है, ताकि लंबित परियोजनाओं में आ रही देरी और आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं को दूर किया जा सके।
सूत्रों के मुताबिक पावर-ट्रांसमिशन से जुड़े एक अहम उपकरण को अब बिना अलग से सरकारी मंजूरी के खरीदा जा सकेगा। पिछले लगभग पांच वर्षों में यह पहला मौका है जब इस तरह की ढील दी गई है। इसे ऊर्जा क्षेत्र की तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए उठाया गया व्यावहारिक कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कई बिजली परियोजनाएं उपकरणों की कमी और सप्लाई चेन में रुकावट के कारण प्रभावित हो रही थीं। ऐसे में सीमित आयात की अनुमति मिलने से परियोजनाओं की रफ्तार बढ़ सकती है, जिससे बिजली आपूर्ति में स्थिरता आएगी और ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार में भी मदद मिलेगी। कोयला आधारित संयंत्रों के संचालन और आधुनिकीकरण पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि सरकार का जोर अभी भी घरेलू विनिर्माण और आत्मनिर्भरता पर बना हुआ है। जानकारों के मुताबिक यह ढील स्थायी नीति बदलाव नहीं, बल्कि तत्काल जरूरतों को देखते हुए लिया गया संतुलित निर्णय है। लंबी अवधि में घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने की रणनीति जारी रहने की उम्मीद है।
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि देश में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है और बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए समय पर उपकरण उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। ऐसे में यह फैसला परियोजनाओं की लागत, समयसीमा और उत्पादन क्षमता—तीनों पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
फिलहाल इस निर्णय ने ऊर्जा सुरक्षा, चीन पर निर्भरता और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के बीच संतुलन को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि सीमित आयात की यह नीति बिजली क्षेत्र की जरूरतों और घरेलू उद्योग के विकास के बीच किस तरह संतुलन स्थापित करती है।




