पटना ब्यूरो 11 नवंबर 2025
बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण में मंगलवार को राज्यभर में जनसैलाब उमड़ पड़ा। 122 सीटों पर हो रहे इस चरण को न सिर्फ सत्ता परिवर्तन की दिशा तय करने वाला बल्कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दो दशक लंबे शासन पर एक जनमत संग्रह माना जा रहा था। दोपहर होते-होते ही बूथों के बाहर लंबी कतारें दिखने लगीं और मतदान खत्म होने तक राज्य ने अपनी चुनावी इतिहास का नया रिकॉर्ड रच दिया—67.14% की भारी वोटिंग, जो पहले चरण के 65.09% से भी अधिक रही। यह बढ़ता उत्साह बता रहा है कि बिहार का मतदाता इस बार अपने वोट से एक साफ संदेश देना चाहता है—चाहे वह बदलाव का हो या स्थिरता का।
इस बार का दूसरा चरण इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण रहा क्योंकि इस हिस्से में सीमांचल और कोसी-सीमांचल के वे संवेदनशील जिले आते हैं जहां मुस्लिम आबादी बड़ी संख्या में है। परिणामस्वरूप, मुकाबला अपने आप ही अधिक तीखा और सांप्रदायिक विमर्शों के टकराव से भर गया। इनमें से कई जिले नेपाल सीमा से जुड़े हैं, जहां सुरक्षा बंदोबस्त भी सख्त रहे। किशनगंज—राज्य का एकमात्र मुस्लिम बहुल जिला—ने 76.26% के साथ इतिहास रचते हुए सबसे अधिक मतदान दर्ज कराया, जबकि कटिहार, पूर्णिया, सुपौल और अररिया जैसे जिलों ने भी 70% से अधिक टर्नआउट के साथ रिकॉर्ड कायम किया। यह असाधारण उत्साह सीमांचल की जनता के नए राजनीतिक संकेतों की ओर इशारा करता है—जहां विपक्ष INDIA गठबंधन भरोसे के वोट तलाश रहा है, वहीं NDA पैठ बढ़ाने के लिए अपनी पूरी मशीनरी झोंके हुए है।
पूर्वी और पश्चिमी चंपारण, मधुबनी, सीतामढ़ी और सुपौल जैसे जिलों में सुबह 7 बजे से ही मतदान शुरू हो गया था और दोपहर के बाद बूथों पर भीड़ लगातार बढ़ती गई। सुरक्षा के लिहाज से पूरे राज्य में भारी पुलिस बल तैनात था। बिहार के DGP विनय कुमार ने मतदान शुरू होने के बाद कहा कि प्रत्येक बूथ पर पुलिस की मौजूदगी सुनिश्चित है और राज्य शांतिपूर्ण मतदान को लेकर पूरी तरह तैयार है। दिन भर के हालात बताते हैं कि अधिकारी लगातार निगरानी में लगे रहे और मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
दूसरे चरण में नीतीश सरकार के 12 मंत्रियों समेत 1,302 उम्मीदवारों की किस्मत EVM में बंद हुई। इनमें JDU, BJP, कांग्रेस, RJD, CPI-ML से लेकर नए खिलाड़ी जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार तक शामिल हैं। BJP-JDU गठबंधन के लिए यह चरण इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि इन सीटों पर चुनावी मुद्दे “गुड गवर्नेंस” बनाम “बदलाव की लहर” में बंटे हुए हैं। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने दावा किया कि बिहार की जनता NDA के ‘सबका साथ, सबका विकास’ पर भरोसा करने जा रही है। दूसरी ओर विपक्ष इसे सरकार के खिलाफ गुस्से का विस्फोट बता रहा है।
कांग्रेस के लिए भी यह चरण बेहद निर्णायक रहा क्योंकि 2020 में जीती उसकी 19 सीटों में से 12 इसी चरण में हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार राम (कुटुंबा) और शकील अहमद खान (कदवा) जैसे बड़े नाम एक बार फिर जनता की कसौटी पर थे। दूसरे चरण की सीटें सामाजिक समीकरणों के लिहाज से भी जटिल मानी जाती हैं जहां जातीय गठजोड़ और स्थानीय असंतोष दोनों मिलकर परिणामों को उलट-पलट कर सकते हैं।
पहले चरण में राज्य ने रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया था और आज के मतदान ने उस रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया। लोगों में एक अजीब सा उत्साह और बेचैनी दिख रही थी—हर राजनीतिक दल इसे अपने पक्ष में बताते रहे, लेकिन जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने इसे जनता की “परिवर्तन की तलाश” बताया। वे खुद को एक नए विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं और सीमांचल सहित कई स्थानों से उन्हें अप्रत्याशित समर्थन मिल रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सुबह ही संदेश जारी कर युवाओं और पहली बार वोट डालने वालों से भारी संख्या में मतदान करने की अपील की। दोनों नेताओं ने इसे राज्य के भविष्य से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण चुनाव बताया। नीतीश कुमार खुद JD(U) के वार रूम से चुनावी गतिविधियों की निगरानी करते रहे और अपने विश्वस्त नेताओं से लगातार फीडबैक लेते रहे।
मतदान समाप्ति के बाद भी राज्यभर के कई बूथों पर लंबी कतारें दिख रही थीं, जिससे चुनाव आयोग को उम्मीद है कि अंतिम प्रतिशत अभी और बढ़ सकता है। अब बिहार की निगाहें 14 नवंबर पर टिक चुकी हैं—जब मतों की गिनती होगी और तय होगा कि बिहार ने स्थिरता का रास्ता चुना है या बदलाव का बिगुल बजाया है। चुनाव जिस तापमान पर लड़े गए हैं, उससे इतना तो साफ है कि परिणाम किसी भी शिविर के लिए चौंकाने वाले हो सकते हैं। बिहार ने अपनी भूमिका निभा दी—अब बारी EVM की है।




