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₹590 करोड़ IDFC फ्रॉड पर RBI सख्त, बैंकिंग सिस्टम सुरक्षित : गवर्नर मल्होत्रा

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सुनील कुमार सिंह | एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 23 फरवरी 2026

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा में सामने आए करीब ₹590 करोड़ के कथित फ्रॉड ने बैंकिंग और निवेश जगत में हलचल पैदा कर दी है। मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने स्पष्ट किया है कि वह पूरे घटनाक्रम की लगातार निगरानी कर रहा है, लेकिन इस घटना से देश की बैंकिंग व्यवस्था पर किसी प्रकार का सिस्टेमिक खतरा नहीं है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने जमाकर्ताओं और निवेशकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि बैंकिंग प्रणाली मजबूत और स्थिर बनी हुई है।

कैसे सामने आया मामला

प्राथमिक जांच के मुताबिक यह अनियमितता चंडीगढ़ स्थित एक ही शाखा तक सीमित है और इसमें हरियाणा सरकार से जुड़े कुछ विभागों के खातों में संदिग्ध लेन-देन का पता चला। जानकारी के अनुसार 18 फरवरी के आसपास तब गड़बड़ी उजागर हुई जब एक सरकारी विभाग ने अपना खाता बंद कर धनराशि दूसरे बैंक में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया। बैलेंस मिलान के दौरान खातों में असंगति सामने आई, जिसके बाद विस्तृत जांच शुरू की गई।

फ्रॉड का तरीका और प्रारंभिक निष्कर्ष

बैंक की आंतरिक पड़ताल में संकेत मिले हैं कि कुछ कर्मचारियों ने कथित तौर पर बाहरी पक्षों के साथ मिलकर फर्जी चेक और मैनुअल प्रोसेस के माध्यम से अनधिकृत ट्रांजैक्शन किए। धनराशि को अन्य बैंकों में लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर किया गया, जिससे खातों में बैलेंस मिसमैच उत्पन्न हुआ। शुरुआती स्तर पर लगभग ₹490 करोड़ की अनियमितता सामने आई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर करीब ₹590 करोड़ आंका गया।

बैंक की त्वरित कार्रवाई

मामला सामने आते ही बैंक ने चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। स्वतंत्र एजेंसी के माध्यम से फॉरेंसिक ऑडिट शुरू किया गया है, जबकि संदिग्ध खातों में धन की रिकवरी के लिए अन्य बैंकों में लियन मार्किंग और कानूनी प्रक्रिया भी अपनाई जा रही है। बैंक ने RBI सहित सभी नियामकीय संस्थाओं को घटना की सूचना देकर जांच में पूर्ण सहयोग का भरोसा दिया है।

बाजार और वित्तीय प्रभाव

फ्रॉड की खबर के बाद शेयर बाजार में बैंक के शेयरों पर दबाव देखने को मिला और कीमत में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार पूंजीकरण में उल्लेखनीय कमी आई। हालांकि बैंक प्रबंधन का कहना है कि यह घटना अलग-थलग है और बैंक की कुल नेटवर्थ पर प्रभाव सीमित रहने की संभावना है। संभावित वित्तीय असर का एक हिस्सा रिकवरी और बीमा के माध्यम से संतुलित किया जा सकता है।

सरकारी और नियामकीय प्रतिक्रिया

मामले के सामने आने के बाद हरियाणा सरकार ने एहतियातन बैंक को कुछ सरकारी लेन-देन की सूची से बाहर कर दिया है। दूसरी ओर, RBI ने निगरानी बढ़ाते हुए जोखिम नियंत्रण और अनुपालन प्रक्रियाओं की समीक्षा शुरू कर दी है। गवर्नर मल्होत्रा ने दोहराया कि जमाकर्ताओं के हित सुरक्षित हैं और घटना से व्यापक बैंकिंग संकट की आशंका नहीं है।

बैंक प्रबंधन का पक्ष

बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने निवेशकों को संबोधित करते हुए इसे कर्मचारी-स्तर का फ्रॉड बताया और कहा कि बैंक की पूंजी स्थिति मजबूत है। प्रबंधन ने विश्वास जताया कि जांच और रिकवरी प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ स्थिति स्पष्ट होगी तथा बैंक के परिचालन और विकास पर दीर्घकालिक असर सीमित रहेगा।

जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क और लेन-देन की कड़ियों को खंगाल रही हैं। RBI की निगरानी और बैंक की कार्रवाई के बीच यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि यह एक सीमित घटना है और देश की बैंकिंग प्रणाली सुरक्षित तथा स्थिर बनी हुई है।

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