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रावी का पानी अब नहीं बहेगा बेकार: शाहपुर कंडी बांध से भारत करेगा पूरा उपयोग

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एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 18 फरवरी 2026

सीमा क्षेत्र में रणनीतिक परियोजना को मिली रफ्तार

भारत सरकार Shahpur Kandi Dam परियोजना को अंतिम रूप देने की दिशा में तेज़ी से काम कर रही है। यह बांध Jammu and Kashmir और Punjab की सीमा पर स्थित है और इसके पूरा होने के बाद Ravi River के अतिरिक्त जल प्रवाह को पाकिस्तान की ओर जाने से रोका जा सकेगा। अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना लंबे समय से लंबित थी, लेकिन अब इसके पूर्ण होने से क्षेत्रीय जल प्रबंधन में बड़ा बदलाव आने की संभावना है।

सिंधु जल संधि के दायरे में भारत का अधिकार

भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुई Indus Waters Treaty के तहत रावी, ब्यास और सतलुज नदियों का जल उपयोग भारत के अधिकार क्षेत्र में है। विशेषज्ञों का कहना है कि शाहपुर कंडी बांध के माध्यम से भारत उन जल संसाधनों का पूर्ण उपयोग कर सकेगा, जो अब तक तकनीकी या संरचनात्मक कारणों से पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो पा रहे थे। इस परियोजना के जरिए सिंचाई और बिजली उत्पादन दोनों क्षेत्रों में लाभ मिलने की उम्मीद है।

पंजाब और जम्मू-कश्मीर को होगा सीधा लाभ

परियोजना के पूरा होने के बाद पंजाब और जम्मू-कश्मीर के हजारों हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को अतिरिक्त सिंचाई सुविधा मिलेगी। अनुमान है कि इससे क्षेत्र में फसल उत्पादन बढ़ेगा और किसानों को स्थायी जल आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। इसके अलावा, बांध से जलविद्युत उत्पादन भी होगा, जिससे स्थानीय ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। लंबे समय से सीमावर्ती इलाकों में जल प्रबंधन एक बड़ी चुनौती रहा है, जिसे यह परियोजना काफी हद तक संतुलित कर सकती है।

पाकिस्तान पर क्या पड़ेगा असर?

विशेषज्ञों के अनुसार, रावी नदी का जो अतिरिक्त पानी अब तक पाकिस्तान की ओर बह जाता था, वह भारत द्वारा संरक्षित और उपयोग में लाया जाएगा। हालांकि यह कदम संधि के दायरे में बताया जा रहा है, लेकिन इससे भारत-पाकिस्तान जल संबंधों में नई चर्चा शुरू हो सकती है। पाकिस्तान पहले भी भारतीय जल परियोजनाओं पर आपत्ति जताता रहा है, हालांकि भारत का रुख स्पष्ट है कि वह केवल अपने हिस्से के जल का ही उपयोग कर रहा है।

रणनीतिक और आर्थिक महत्व

शाहपुर कंडी बांध केवल जल प्रबंधन परियोजना नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सीमावर्ती क्षेत्र में जल संसाधनों का प्रभावी उपयोग राष्ट्रीय हित से जुड़ा विषय है। इसके पूरा होने से भारत को अपने हिस्से के जल संसाधनों पर बेहतर नियंत्रण मिलेगा और कृषि, ऊर्जा तथा क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, बांध के निर्माण कार्य लगभग पूर्णता की ओर हैं और जल्द ही इसे औपचारिक रूप से संचालित किया जा सकता है। यह परियोजना न केवल जल संरक्षण का प्रतीक बनेगी, बल्कि भारत की दीर्घकालिक जल नीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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