एबीसी डेस्क 12 दिसंबर 2025
लोकसभा के सत्र में आज असम के धुबड़ी से सांसद और एआईसीसी के पूर्व उपनेता रकीबुल हुसैन ने निचले असम की जनता की गंभीर समस्याओं को बेहद मजबूती के साथ उठाया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र वर्षों से बुनियादी सुविधाओं की कमी और प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहा है, लेकिन अब स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि तुरंत हस्तक्षेप के बिना लाखों लोगों की सुरक्षा और आजीविका खतरे में पड़ सकती है। हुसैन ने विशेष रूप से दो महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी लिंक की दयनीय हालत पर सदन का ध्यान आकर्षित किया और जोरदार तरीके से सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग रखी।
उन्होंने बताया कि गोलपारा जिले के अगिया से मेघालय के फुलबारी होते हुए दक्षिण सलमारा-मानकाचर जिले तक जाने वाली अंतरराज्यीय सड़क बिल्कुल जर्जर हो चुकी है। यह मार्ग अंतरराष्ट्रीय सीमा के समानांतर चलता है और हर दिन हजारों लोग इसका उपयोग करते हैं, लेकिन सड़क पर बने गहरे गड्ढे और लगातार टूट-फूट अब लोगों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। व्यापार, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजमर्रा की गतिविधियों पर इसका भारी असर पड़ रहा है। हुसैन ने कहा कि इस सड़क की मरम्मत तत्काल न की गई तो स्थिति और भयावह हो सकती है।
दूसरी ओर, बारपेटा जिले में बेकी नदी पर कराकुर में बना पुल इतनी खराब स्थिति में पहुँच गया है कि प्रशासन को इसे पूरी तरह बंद करना पड़ा है। इस निर्णय से पूरे क्षेत्र की यातायात व्यवस्था चरमराकर रह गई है। अब लोगों को न केवल कई किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ रहा है, बल्कि कई गांवों में लोग नावों के सहारे यात्रा करने को मजबूर हो गए हैं। छात्रों, मरीजों, व्यापारियों और किसानों के लिए यह स्थिति अत्यंत कष्टकारी बन गई है।
रकीबुल हुसैन ने सदन में मांग की कि इन दोनों महत्वपूर्ण मार्गों और पुल का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए, पर्याप्त धनराशि तुरंत जारी की जाए और स्थायी मरम्मत व पुनर्निर्माण के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर काम शुरू किया जाए। उन्होंने कहा कि यह केवल सड़क या पुल की समस्या नहीं है, बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और मानव जीवन से सीधे जुड़ा हुआ सवाल है।
इतना ही नहीं, हुसैन ने असम में हर साल आने वाली भीषण बाढ़ और कटाव की समस्या पर भी गहरी चिंता जताई और इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की जोरदार मांग की। उन्होंने कहा कि हर वर्ष लाखों लोग बेघर होते हैं, हजारों हेक्टेयर फसल बर्बाद होती है, स्कूल-हॉस्पिटल बह जाते हैं और राज्य की अर्थव्यवस्था को अपूरणीय क्षति पहुंचती है। ऐसी स्थिति में राज्य अकेले इस आपदा से निपटने की क्षमता नहीं रखता, इसलिए केंद्र को आगे आकर इसे राष्ट्रीय आपदा का दर्जा देना चाहिए।
रकीबुल हुसैन का यह हस्तक्षेप आज लोकसभा में निचले असम की जनता की एक बुलंद आवाज़ बनकर गूंजा है। उनके उठाए मुद्दों ने न केवल सरकार का ध्यान आकर्षित किया है, बल्कि क्षेत्र के लोगों में यह उम्मीद भी जगाई है कि शायद अब उनकी दशकों पुरानी समस्याओं पर गंभीरता से कार्रवाई की जाएगी।




