एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 18 फरवरी 2026
बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस से जुड़े एक बहुचर्चित और लंबे समय से चल रहे मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उन्हें अंतरिम जमानत प्रदान की है, लेकिन यह राहत सख्त शर्तों के साथ दी गई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत केवल अस्थायी है और इसे अंतिम निर्णय नहीं माना जाएगा। अभिनेता को शिकायतकर्ता कंपनी के खाते में ₹1.5 करोड़ की राशि जमा कराने का निर्देश दिया गया था, जिसकी पुष्टि होने के बाद ही उन्हें राहत दी गई।
यह मामला वर्ष 2012 में बनी फिल्म “अता पता लापता” से जुड़ा है, जिसका निर्देशन स्वयं राजपाल यादव ने किया था। फिल्म के निर्माण के लिए दिल्ली के व्यवसायी माधव गोपाल अग्रवाल से लगभग ₹5 करोड़ का लोन लिया गया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही और कथित रूप से निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कई दौर की बातचीत हुई और कुल ₹10.40 करोड़ का सेटलमेंट तय हुआ। हालांकि, शिकायतकर्ता का आरोप है कि सेटलमेंट के तहत जारी किए गए चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद कानूनी कार्यवाही तेज हो गई।
मामले की सुनवाई के दौरान निचली अदालत ने राजपाल यादव को छह महीने की सजा सुनाई थी। इसी आदेश के अनुपालन में 5 फरवरी 2026 को उन्होंने तिहाड़ जेल में सरेंडर किया था। यह घटनाक्रम फिल्म उद्योग और उनके प्रशंसकों के बीच व्यापक चर्चा का विषय बना। इसके बाद अभिनेता की ओर से उच्च न्यायालय में अपील दायर की गई, जहां मामले की सुनवाई जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की बेंच ने की।
16 फरवरी 2026 को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अंतरिम जमानत देते हुए स्पष्ट किया कि आरोपी को पहले ₹1.5 करोड़ की राशि शिकायतकर्ता कंपनी M/s Murli Projects Pvt. Ltd. के बैंक खाते में जमा करानी होगी। अदालत ने दोपहर 3 बजे तक भुगतान की पुष्टि मांगी थी। राशि जमा होने के बाद ही जमानत आदेश प्रभावी हुआ। इसके अलावा अदालत ने ₹1 लाख का पर्सनल बॉन्ड और एक जमानतदार प्रस्तुत करने की भी शर्त रखी। साथ ही सजा को 18 मार्च 2026 तक निलंबित कर दिया गया।
अदालत ने यह भी माना कि 19 फरवरी को शाहजहांपुर में उनकी भतीजी की शादी है, और पारिवारिक कारणों को ध्यान में रखते हुए उन्हें यह अस्थायी राहत दी गई। हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि यह कोई स्थायी राहत नहीं है और यदि आगे किसी भी शर्त का उल्लंघन हुआ तो जमानत तुरंत रद्द की जा सकती है।
17 फरवरी 2026 को राजपाल यादव तिहाड़ जेल से रिहा हुए। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने मीडिया से संक्षिप्त बातचीत की, समर्थकों का आभार जताया और कहा कि वे न्यायिक प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि वह जल्द ही विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना पक्ष सार्वजनिक रूप से रखेंगे।
दूसरी ओर, शिकायतकर्ता माधव गोपाल अग्रवाल का कहना है कि यह स्पष्ट रूप से लोन था, न कि कोई जोखिम आधारित निवेश। उनका आरोप है कि उन्होंने कई बार बकाया राशि की मांग की, यहां तक कि व्यक्तिगत रूप से गुहार भी लगाई, लेकिन भुगतान नहीं हुआ। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य केवल अपनी राशि की वसूली है और वे कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से ही न्याय चाहते हैं।
फिलहाल मामला पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अगली सुनवाई 18 मार्च 2026 को निर्धारित है, जहां अदालत इस प्रकरण पर आगे विचार करेगी और अंतिम आदेश दे सकती है। तब तक राजपाल यादव को अस्थायी राहत जरूर मिली है, लेकिन कानूनी लड़ाई अभी जारी है। फिल्म उद्योग और उनके प्रशंसकों के बीच इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, और सभी की नजर अब आगामी सुनवाई पर टिकी है।




