महेंद्र कुमार | 9 जनवरी 2026
दिल्ली अदालत ने लालू परिवार पर तय किए आरोप
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव तथा उनके परिवार की कानूनी परेशानियां एक बार फिर बढ़ गई हैं। दिल्ली की एक विशेष अदालत ने चर्चित रेलवे जमीन के बदले नौकरी (Land for Job) घोटाले में लालू यादव, उनके परिजनों और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है। अदालत के इस आदेश के साथ ही केस अब ट्रायल के चरण में पहुंच गया है। आरोप तय होने का अर्थ है कि कोर्ट ने CBI द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों को प्रथम दृष्टया पर्याप्त माना है और अब मामले की नियमित सुनवाई होगी। यह मामला उस अवधि से जुड़ा है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्रीय रेल मंत्री थे।
CBI का आरोप है कि रेल मंत्रालय में रहते हुए ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से रेलवे की कीमती जमीन ली गई। एजेंसी के मुताबिक, यह जमीन बाद में लालू यादव के परिवार के सदस्यों या उनसे जुड़ी संस्थाओं के नाम ट्रांसफर कराई गई। CBI का दावा है कि यह पूरा मामला भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और नियमों की अनदेखी से जुड़ा है।
इस केस में लालू यादव के परिवार के कई सदस्य भी आरोपी बनाए गए हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि नौकरी देने की प्रक्रिया में तय मानकों का पालन नहीं किया गया और इसके बदले निजी लाभ उठाया गया। CBI पहले ही इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर चुकी थी, जिस पर सुनवाई के बाद अदालत ने आरोप तय किए।
वहीं, लालू प्रसाद यादव और RJD ने इन आरोपों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है। पार्टी का कहना है कि केंद्र सरकार के दबाव में जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है और अदालत में सच्चाई सामने आएगी। RJD नेताओं का दावा है कि यह कार्रवाई विपक्षी राजनीति को कमजोर करने की कोशिश है।
इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल इसे भ्रष्टाचार का गंभीर मामला बता रहे हैं, जबकि RJD और उसके सहयोगी दल इसे लोकतांत्रिक आवाज़ों को दबाने की कोशिश बता रहे हैं। अब सबकी निगाहें ट्रायल पर टिकी हैं, जहां CBI अपने सबूत पेश करेगी और बचाव पक्ष अपनी दलीलें रखेगा। अदालत के अंतिम फैसले का असर न सिर्फ लालू परिवार, बल्कि बिहार की राजनीति पर भी दूरगामी हो सकता है।




