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राहुल को लखनऊ कोर्ट से बेल, अगली सुनवाई 2 अगस्त; बयानबाज़ी बनाम संवैधानिक मर्यादा

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लखनऊ, उत्तर प्रदेश 

16 जुलाई 2025

भारतीय सेना पर कथित रूप से “अपमानजनक” टिप्पणी के चलते दर्ज मानहानि मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को मंगलवार को लखनऊ की एक अदालत से बड़ी राहत मिली। विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश हुए राहुल गांधी को कोर्ट ने अंतरिम ज़मानत प्रदान की। यह मामला 2022 की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान दिए गए उस बयान से जुड़ा है, जिसे लेकर शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने भारतीय सैनिकों की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली टिप्पणी की थी।

राहुल गांधी की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता प्रंशु अग्रवाल ने बताया कि यह आपराधिक मामला एक निजी शिकायत के आधार पर दायर किया गया था, जिसमें कहा गया कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने कथित रूप से सेना के खिलाफ ‘झूठे, भ्रामक और मानहानिक’ शब्दों का इस्तेमाल किया। शिकायतकर्ता का दावा है कि यह टिप्पणी न केवल राष्ट्र की रक्षा में तैनात जवानों का मनोबल गिराने वाली थी, बल्कि इससे आम जनता के बीच सेना की छवि को लेकर भ्रम भी पैदा हो सकता है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राहुल गांधी को उपस्थित रहने का निर्देश दिया था, जिस पर वे आज पेश हुए।

कोर्ट में सुनवाई के बाद उन्हें ज़मानत प्रदान कर दी गई है। अगली सुनवाई की तारीख 2 अगस्त निर्धारित की गई है, जिसमें बचाव पक्ष को अपना जवाब दाखिल करना होगा। यह प्रकरण ऐसे समय सामने आया है जब कांग्रेस राहुल गांधी को एक “जनता के नेता” और “संवेदनशील वक्ता” के रूप में प्रस्तुत कर रही है। वहीं भारतीय जनता पार्टी सहित कई विपक्षी दलों का आरोप है कि राहुल गांधी बार-बार संवेदनशील मुद्दों पर गैर-जिम्मेदाराना बयानबाज़ी करते हैं।

गौरतलब है कि यह कोई पहला मामला नहीं है जब राहुल गांधी मानहानि जैसे कानूनी पेंच में फंसे हों। इससे पहले 2019 में ‘सारे चोरों के नाम में मोदी क्यों होते हैं?’ वाले बयान के चलते उन्हें सूरत की अदालत ने दोषी ठहराया था, जिसकी वजह से उनकी लोकसभा सदस्यता तक रद्द कर दी गई थी। हालाँकि बाद में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद वह फिर से संसद में लौटे।

इस ताज़ा प्रकरण ने देश के राजनीतिक विमर्श में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मानहानि की सीमा और राष्ट्रीय संस्थाओं पर टिप्पणी के अधिकार जैसे सवालों को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। क्या लोकतंत्र में राजनेताओं के लिए आलोचना की आज़ादी सीमित होती जा रही है? क्या अब आलोचना और अपमान के बीच की रेखा अदालत तय करेगी?

फिलहाल राहुल गांधी को अदालत से अस्थायी राहत मिल गई है, लेकिन यह मामला आने वाले समय में भारतीय राजनीति और अभिव्यक्ति की सीमाओं पर बड़ा असर डाल सकता है। कानूनी लड़ाई अभी जारी है।

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