एबीसी डेस्क 12 दिसंबर 2025
कर्नाटक के आलंद विधानसभा क्षेत्र में हुए बड़े वोटर फ्रॉड मामले पर आखिरकार SIT की पहली चार्जशीट सामने आ गई है—और इससे ठीक वही सच साबित हो गया है, जिसकी ओर राहुल गांधी महीने पहले इशारा कर चुके थे। चार्जशीट में पूर्व भाजपा विधायक सुबHASH गुट्टेदार और उनके बेटे हर्षानंद गुट्टेदार को इस पूरे “वोट चोरी” घोटाले का मुख्य आरोपी बताया गया है। SIT के अनुसार दोनों ने मिलकर 2023 के चुनाव से पहले मतदाता सूची में भारी पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया और हजारों मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश रची।
चार्जशीट में कहा गया है कि गुट्टेदारों ने एक कॉल-सेंटर जैसी फर्जी यूनिट चलाने वाले अकरम पाशा को हायर किया, जिसका काम था मतदाता सूची में ऐसे लोगों की पहचान करना जो चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार बी.आर. पाटिल का समर्थन करते हों। इसके बाद इन “चिह्नित मतदाताओं” के नाम हटाने के लिए फर्जी Form-7 भरे गए—और सबसे चौंकाने वाली बात यह कि जिन लोगों के नाम हटाए गए, उन्हें इसकी कोई जानकारी तक नहीं थी। SIT की जांच के अनुसार पाशा को प्रति नाम हटाने के 80 रुपये दिए जाते थे, और यह पूरा ऑपरेशन डिजिटल दुनिया में फर्जी ID बनाकर चलाया गया।
जांच में सामने आया कि दिसंबर 2022 से फरवरी 2023 के बीच कुल 5,994 फर्जी Form-7 जमा किए गए, जबकि कुल प्राप्त फॉर्म 6,018 थे—यानी मात्र 24 आवेदन असली थे और बाकी सभी फर्जी। यह साजिश उस समय की जा रही थी जब राज्य में BJP की सरकार थी और गुट्टेदार खुद दोबारा चुनाव लड़ रहे थे। 2018 में वह सिर्फ 697 वोटों से जीते थे, इसलिए टीम ने उन वोटरों को हटाने पर ज़ोर दिया था जिन्हें वे विरोधी समझते थे।
पूरा रैकेट तब खुला जब एक बूथ लेवल अधिकारी ने पाया कि उसके भाई का नाम हटाने के लिए एक फॉर्म जमा हुआ है—जबकि ऐसा कोई आवेदन परिवार ने नहीं किया था। इसके बाद निर्वाचन अधिकारी ने FIR दर्ज की और मामला आगे बढ़ा। SIT का कहना है कि जब उसने आलंद और कलबुर्गी में छापे मारे, तो गुट्टेदारों की टीम ने कई सबूत जला दिए या नष्ट कर दिए। फिर भी, SIT ने डिजिटल साक्ष्यों, फर्जी लॉगिन ID, पैसों के लेन-देन और फोन-लैपटॉप डेटा के आधार पर 22,000 पन्नों की चार्जशीट तैयार कर दी।
इस पूरी जांच के संदर्भ में राहुल गांधी पहले ही कह चुके थे कि आलंद में “संगठित वोट चोरी” हुई है और BJP इसे छिपाने की कोशिश कर रही है। अब चार्जशीट आने के बाद उनके आरोपों को राजनीतिक रूप से बड़ा आधार मिल गया है। राहुल गांधी ने सितंबर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा था कि चुनाव आयोग SIT को जरूरी डेटा नहीं दे रहा, जिससे जांच अटक गई है। अब SIT भी यही कह रही है कि ECI से तकनीकी डेटा न मिलने के कारण आगे की चार्जशीट रोकी हुई है। SIT अब अदालत से आदेश लेने की तैयारी कर रही है।
गुट्टेदार और उनका बेटा फिलहाल अग्रिम जमानत पर हैं। वहीं OTP Bazar वेबसाइट चलाने वाला बापी आद्या गिरफ्तार किया जा चुका है और बाकी आरोपियों से पूछताछ जारी है। चार्जशीट में उन्हें साजिश, धोखाधड़ी, पहचान की चोरी, फर्जीवाड़े और सबूत नष्ट करने से जुड़े गंभीर धाराओं में नामजद किया गया है।
यह मामला कर्नाटक ही नहीं, पूरे देश में चुनावी पारदर्शिता पर बड़ी बहस छेड़ रहा है। लोकतंत्र की सबसे बुनियादी प्रक्रिया—मतदाता सूची—को बड़े पैमाने पर फर्जी तरीके से छेड़ने का यह शायद सबसे बड़ा मामला है। SIT की जांच आगे बढ़ने के साथ इस राजनीतिक भूचाल के और गहराने की संभावना है।




