एबीसी डेस्क 16 दिसंबर 2025
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मनरेगा (MGNREGA) को लेकर मोदी सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने साफ शब्दों में कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दो चीज़ों से गहरी नफ़रत है—महात्मा गांधी के विचार और गरीबों के अधिकार। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा, जो गांधी जी के ग्राम स्वराज के विचारों का जीवंत स्वरूप है, हमेशा से प्रधानमंत्री मोदी को असहज करता रहा है और पिछले दस वर्षों से उनकी सरकार इसे व्यवस्थित तरीके से कमजोर करने में लगी रही है। अब हालात ऐसे बना दिए गए हैं कि सरकार मनरेगा को पूरी तरह मिटाने पर आमादा है।
राहुल गांधी ने कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह करोड़ों ग्रामीण भारतीयों के लिए जीवनरेखा रही है। खासतौर पर कोविड महामारी के दौरान, जब पूरा देश आर्थिक संकट से गुजर रहा था, तब मनरेगा ने ग्रामीण भारत को आर्थिक सुरक्षा कवच प्रदान किया। लाखों परिवारों के लिए यह योजना भूख और बेरोजगारी के बीच अंतर साबित हुई। इसके बावजूद मोदी सरकार ने इस योजना को मजबूती देने के बजाय, इसे लगातार कमजोर करने का रास्ता चुना।
राहुल गांधी ने मनरेगा की मूल आत्मा को रेखांकित करते हुए कहा कि यह योजना तीन बुनियादी सिद्धांतों पर आधारित थी। पहला—काम का अधिकार, यानी जो भी काम मांगे उसे रोजगार दिया जाए। दूसरा—गांवों को यह अधिकार कि वे अपने विकास कार्य स्वयं तय करें। तीसरा—केंद्र सरकार द्वारा पूरी मजदूरी का भुगतान और सामग्री लागत का 75 प्रतिशत वहन। राहुल गांधी के मुताबिक, यही सिद्धांत गांधी जी के ग्राम स्वराज और अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को प्राथमिकता देने की सोच का आधार थे।
लेकिन राहुल गांधी का आरोप है कि मोदी सरकार अब मनरेगा को “केंद्रीकृत नियंत्रण के औज़ार” में बदलना चाहती है। नए प्रस्तावों के तहत बजट, योजनाएं और नियम दिल्ली से तय किए जाएंगे, राज्यों पर 40 प्रतिशत खर्च का बोझ डाल दिया जाएगा और जैसे ही फंड खत्म होंगे या फसल का मौसम आएगा, मजदूरों को महीनों तक काम से वंचित कर दिया जाएगा। राहुल गांधी ने चेतावनी दी कि इसका सीधा असर गरीब ग्रामीण परिवारों की आजीविका पर पड़ेगा और मनरेगा का अधिकार-आधारित ढांचा पूरी तरह ढह जाएगा।
कांग्रेस नेता ने इसे महात्मा गांधी के आदर्शों का सीधा अपमान बताया। उन्होंने कहा कि पहले मोदी सरकार ने बेरोजगारी बढ़ाकर देश के युवाओं का भविष्य तबाह किया और अब ग्रामीण गरीबों की सुरक्षित आजीविका पर हमला किया जा रहा है। राहुल गांधी के अनुसार, यह केवल आर्थिक फैसला नहीं, बल्कि एक वैचारिक हमला है—जिसका मकसद गांधी के विचार, सामाजिक न्याय और संविधान में निहित गरीबों के अधिकारों को कमजोर करना है।
राहुल गांधी ने ऐलान किया कि कांग्रेस इस “जनविरोधी बिल” का हर स्तर पर विरोध करेगी। उन्होंने कहा, “सड़क से संसद तक, हम इस लड़ाई को लड़ेंगे।” कांग्रेस के मुताबिक, यह संघर्ष केवल मनरेगा को बचाने का नहीं, बल्कि गांधी के विचारों, ग्राम स्वराज, और भारत के गरीबों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा का है। पार्टी ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा देश की राजनीति के केंद्र में रहेगा और सरकार को इसका जवाब जनता के सामने देना ही होगा।




