देहरादून / नई दिल्ली, 27 सितम्बर 2025
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा प्रहार किया है और इस बार उन्होंने उत्तराखंड में हुई पेपर लीक घटनाओं को मुद्दा बनाया। राहुल गांधी ने कहा कि अब बीजेपी का दूसरा नाम “पेपर चोर” हो चुका है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक राज्य का मामला नहीं है, बल्कि पूरे देश के युवाओं की मेहनत और सपनों से खिलवाड़ है। राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेगी और युवाओं के संघर्ष के साथ मजबूती से खड़ी है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की भर्ती परीक्षा में पेपर लीक के मामले ने साबित कर दिया है कि बीजेपी सरकार युवाओं को सुरक्षित और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली देने में नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि लाखों मेहनती युवाओं ने इस परीक्षा की तैयारी की, लेकिन कुछ “पेपर माफियाओं” ने सत्ता की छत्रछाया में उनकी मेहनत को मिट्टी में मिला दिया। राहुल गांधी ने कहा, “आज देश के युवाओं का सबसे बड़ा सवाल रोजगार है और बीजेपी उन्हें रोजगार देने की बजाय उनके पेपर ही चोरी करवा रही है।”
अपने भाषण में राहुल गांधी ने आगे कहा कि यह सिर्फ एक isolated घटना नहीं बल्कि बीजेपी की सरकार में एक पैटर्न बन चुका है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं हर राज्य में हो रही हैं और इससे सबसे ज्यादा नुकसान मेहनतकश गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को हो रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि युवाओं की इस लड़ाई को कांग्रेस सड़क से संसद तक ले जाएगी और न्याय दिलाने तक चैन से नहीं बैठेगी।
राहुल गांधी ने युवाओं के नारे “पेपर चोर, गद्दी छोड़” का जिक्र करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक नारा नहीं बल्कि युवाओं की पीड़ा की आवाज है। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार को अब यह समझ लेना चाहिए कि युवाओं का गुस्सा बढ़ता जा रहा है और इसे दबाने की बजाय समाधान निकालने की जरूरत है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि कांग्रेस एक ऐसी पारदर्शी परीक्षा प्रणाली बनाने के लिए रोडमैप तैयार कर रही है जिससे भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी का यह बयान उत्तराखंड में आगामी चुनावों से पहले युवाओं को साधने का बड़ा प्रयास है। पेपर लीक की घटनाओं से राज्य में पहले से ही नाराजगी है और कांग्रेस इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश में है। बीजेपी की ओर से फिलहाल इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पार्टी के कुछ नेताओं ने इसे राहुल गांधी की राजनीति का “लोकप्रियता पाने का प्रयास” बताया है।




