एबीसी नेशनल न्यूज | गुवाहाटी | 19 फरवरी 2026
असम विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में नया प्रयोग शुरू किया है। पार्टी ने इसे ‘पायलट मॉडल’ के रूप में लागू करते हुए पारंपरिक दिल्ली-केंद्रित निर्णय प्रक्रिया के बजाय जमीनी फीडबैक को प्राथमिकता देने की रणनीति अपनाई है।
इस नई व्यवस्था के तहत स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्यों—Saptagiri Sankar Ulaka, Imran Masood और Sirivella Prasad—को अलग-अलग जिलों में जाकर स्थानीय कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और पत्रकारों से बातचीत करने की जिम्मेदारी दी गई है। उद्देश्य यह है कि उम्मीदवारों का चयन केवल संगठनात्मक सिफारिशों के आधार पर नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्वीकार्यता और जनता की राय को ध्यान में रखकर किया जाए।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस मॉडल का मकसद स्थानीय नेतृत्व को मजबूत करना और टिकट वितरण को अधिक पारदर्शी तथा लोकतांत्रिक बनाना है। कांग्रेस का मानना है कि जमीनी स्तर पर लोकप्रिय और सक्रिय चेहरों को मौका देने से चुनावी प्रदर्शन बेहतर हो सकता है और संगठन की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।
126 सीटों वाली असम विधानसभा के लिए यह प्रयोग कांग्रेस की रणनीति में अहम बदलाव माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का संकेत है कि यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में अन्य राज्यों के चुनावों में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उम्मीदवार चयन में स्थानीय फीडबैक को शामिल करना क्षेत्रीय मुद्दों को बेहतर ढंग से समझने और गुटबाजी को कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि यह भी चुनौती रहेगी कि विभिन्न स्तरों से आने वाली राय को संतुलित कर अंतिम निर्णय तक कैसे पहुंचा जाए।
फिलहाल प्रियंका गांधी के इस ‘पायलट मॉडल’ को कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक सुधार और चुनावी रणनीति में बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले महीनों में इसके प्रभाव का आकलन चुनावी नतीजों और संगठन की एकजुटता के आधार पर किया जाएगा।




