Home » International » H-1B से ग्रीन कार्ड का रास्ता बंद करने की तैयारी! अमेरिकी संसद में नया बिल, लाखों भारतीयों के ‘अमेरिकन ड्रीम’ पर संकट

H-1B से ग्रीन कार्ड का रास्ता बंद करने की तैयारी! अमेरिकी संसद में नया बिल, लाखों भारतीयों के ‘अमेरिकन ड्रीम’ पर संकट

अंतरराष्ट्रीय | आद्या ठुकराल | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 6 जून 2026

अमेरिका में काम कर रहे लाखों भारतीय पेशेवरों और वहां जाने का सपना देख रहे युवाओं के लिए एक बड़ी चिंता पैदा हो गई है। अमेरिकी कांग्रेस में रिपब्लिकन सांसद चिप रॉय ने एक नया विधेयक पेश किया है, जिसका उद्देश्य H-1B वीज़ा प्रणाली में व्यापक बदलाव करना है। इस प्रस्तावित कानून का सबसे विवादास्पद प्रावधान यह है कि H-1B वीज़ा धारकों के लिए ग्रीन कार्ड हासिल करने का मौजूदा रास्ता लगभग बंद हो सकता है। यदि यह बिल कानून बन जाता है तो अमेरिका में स्थायी निवास का सपना देख रहे लाखों भारतीयों के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

टेक्सास से रिपब्लिकन सांसद चिप रॉय द्वारा पेश किए गए “अमेरिकन व्हाइट-कॉलर वर्कर जॉब्स एक्ट 2026” में H-1B वीज़ा प्रणाली को पूरी तरह नए ढंग से परिभाषित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इस बिल में कहा गया है कि H-1B आवेदकों को यह साबित करना होगा कि उनका अपने मूल देश में स्थायी निवास बना हुआ है और वे उसे छोड़ने का इरादा नहीं रखते। आव्रजन विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रावधान H-1B वीज़ा की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता “ड्यूल इंटेंट” को समाप्त कर देगा। अभी तक H-1B वीज़ा धारक अमेरिका में नौकरी करते हुए ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते थे, लेकिन नए प्रस्ताव के तहत यह प्रक्रिया लगभग असंभव हो सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि H-1B वीज़ा की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण यही था कि यह विदेशी पेशेवरों को अमेरिका में स्थायी रूप से बसने का अवसर देता था। भारतीय आईटी पेशेवरों, इंजीनियरों, डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने इसी रास्ते का उपयोग करके अमेरिका में अपना भविष्य बनाया है। लेकिन नए बिल के तहत H-1B वीज़ा केवल अस्थायी रोजगार का माध्यम बन सकता है और स्थायी निवास की संभावना बेहद सीमित हो जाएगी।

ALSO READ  “क्या हुआ मोदीजी? कूरियर नहीं मिल रहा क्या?” — महुआ मोइत्रा का अडानी घोटाले पर वार, अमेरिकी अदालत के बयान के बाद पीएम मोदी पर कसा तंज

बिल में केवल ग्रीन कार्ड के रास्ते को कठिन बनाने की बात नहीं है, बल्कि कई अन्य सख्त प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। प्रस्ताव के अनुसार कंपनियों को H-1B कर्मचारियों को या तो समान योग्यता वाले अमेरिकी कर्मचारियों के बराबर वेतन देना होगा या फिर श्रम विभाग द्वारा निर्धारित 75वें प्रतिशतक वेतनमान के अनुसार भुगतान करना होगा, जो भी अधिक हो। इसके अलावा कंपनियों को पहले यह साबित करना होगा कि उस पद के लिए योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं। उन्हें सरकारी पोर्टल पर नौकरी का विज्ञापन देना होगा और यदि कोई अमेरिकी उम्मीदवार समान या बेहतर योग्यता वाला मिलता है तो उसे प्राथमिकता देनी होगी।

प्रस्तावित कानून में यह भी कहा गया है कि किसी कंपनी के कुल अमेरिकी कर्मचारियों में गैर-आप्रवासी कर्मचारियों की संख्या 5 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। साथ ही कोई भी कंपनी H-1B कर्मचारी नियुक्त करने से एक वर्ष पहले या बाद में उसी श्रेणी के अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी नहीं कर सकेगी। इन प्रावधानों का सीधा असर बड़ी टेक कंपनियों और आईटी सेवा कंपनियों पर पड़ सकता है, जो बड़ी संख्या में विदेशी पेशेवरों को रोजगार देती हैं।

एक और बड़ा बदलाव H-1B वीज़ा की अवधि को लेकर प्रस्तावित किया गया है। वर्तमान में यह वीज़ा अधिकतम छह वर्षों तक वैध रहता है, लेकिन नए बिल में इसे घटाकर केवल दो वर्ष करने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा वीज़ा आवंटन की मौजूदा लॉटरी प्रणाली को समाप्त कर वेतन आधारित प्रणाली लागू करने का प्रस्ताव है। इसका मतलब यह होगा कि अधिक वेतन पाने वाले आवेदकों को प्राथमिकता मिलेगी, जबकि अपेक्षाकृत कम वेतन वाले आवेदकों के लिए अवसर कम हो जाएंगे।

ALSO READ  बांग्लादेश में फिर खूनखराबा: हादी के बाद एक और छात्र नेता के सिर में मारी गई गोली

भारतीय समुदाय पर इस प्रस्ताव का सबसे अधिक प्रभाव पड़ने की संभावना है। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024 में जारी लगभग चार लाख नए H-1B वीज़ा में से करीब 2.83 लाख भारतीय नागरिकों को मिले थे। यानी कुल H-1B वीज़ा धारकों में लगभग 71 प्रतिशत भारतीय हैं। इसके अलावा रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड श्रेणी में 12.6 लाख से अधिक भारतीय और उनके परिवार के सदस्य वर्षों से प्रतीक्षा सूची में हैं। यदि यह बिल पारित हो जाता है तो इन लाखों लोगों की अमेरिका में स्थायी रूप से बसने की उम्मीदों को बड़ा झटका लग सकता है।

हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बिल के कानून बनने की राह आसान नहीं होगी। अमेरिका में आव्रजन नीति को लेकर रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों के बीच गहरे मतभेद हैं। सीनेट और प्रतिनिधि सभा दोनों में इस प्रस्ताव को कई राजनीतिक और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इसके बावजूद इस बिल ने अमेरिकी आव्रजन नीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है और भारतीय समुदाय के बीच चिंता बढ़ा दी है।

यह केवल एक प्रस्तावित विधेयक है, लेकिन यदि भविष्य में इसे मंजूरी मिलती है तो यह अमेरिकी आव्रजन व्यवस्था में दशकों का सबसे बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। खासकर भारतीय आईटी पेशेवरों और छात्रों के लिए, जो H-1B वीज़ा को अमेरिकी सपने की पहली सीढ़ी मानते हैं, यह प्रस्ताव दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *