अरिंदम बनर्जी| कोलकाता 9 जनवरी 2026
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की छापेमारी के विरोध में कोलकाता में निकाली गई एक विशाल रैली में ऐसा बयान दिया, जिसने देश की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। ममता ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि कोयला तस्करी/घोटाले से जुटाया गया अवैध पैसा शुभेंदु अधिकारी और भाजपा सांसद जगन्नाथ सरकार जैसे नेताओं के जरिए अमित शाह तक पहुंचा। ममता ने कहा कि इस कथित लेन-देन के ठोस सबूत एक पेन ड्राइव में मौजूद हैं और यदि उन पर या उनकी सरकार/पार्टी पर दबाव बढ़ाया गया तो वह इसे सार्वजनिक कर देंगी—जिससे “पूरे देश को झटका लगेगा।” ममता बनर्जी ने कहा, “मैं आमतौर पर चुप रहती हूं, लेकिन अगर कोई मुझे छेड़ता है, तो मैं छोड़ती नहीं।” उन्होंने ईडी की कार्रवाई को राजनीतिक बदला करार देते हुए आरोप लगाया कि एजेंसी का मकसद TMC की चुनावी रणनीति चुराना है। उनका कहना था कि विपक्ष और केंद्र की एजेंसियां मिलकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर रही हैं।
ईडी रेड की पृष्ठभूमि और आरोप
यह पूरा घटनाक्रम 8 जनवरी 2026 को उस वक्त तेज हुआ, जब ईडी ने TMC से जुड़ी पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC (Indian Political Action Committee) के दफ्तर और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के ठिकानों पर छापेमारी की। ईडी ने इसे कोयला तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस से जोड़ा है, जिसमें पूर्व TMC नेता अनूप माझी उर्फ ‘लाला’ के सिंडिकेट का नाम सामने आया है। जांच एजेंसी का दावा है कि अवैध कोयला खनन से अर्जित करोड़ों रुपये I-PAC तक पहुंचे, जो TMC की चुनावी रणनीति संभालती है।
ईडी का दावा बनाम ममता का जवाब
ईडी ने आरोप लगाया कि छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंचीं और कुछ फाइलें/डिवाइस ले गईं। इसी आधार पर ईडी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर ममता और कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ CBI जांच की मांग की है। ममता और TMC ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे संस्थागत उत्पीड़न बताया। TMC की ओर से ईडी के खिलाफ दो FIR दर्ज कराई गईं। दिल्ली में अमित शाह के दफ्तर के बाहर TMC सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया, जहां कुछ सांसदों को हिरासत में भी लिया गया।
बीजेपी और शुभेंदु अधिकारी की प्रतिक्रिया
बीजेपी ने ममता के आरोपों को निराधार और राजनीतिक ड्रामा बताया। पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने ममता को 72 घंटे का कानूनी नोटिस भेजते हुए कहा कि यदि वह अपने आरोपों के सबूत पेश नहीं करतीं, तो उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा।
कोयला घोटाला: पुराना मामला, नई सियासत
पश्चिम बंगाल का कोयला तस्करी/अवैध खनन मामला वर्षों से CBI और ED की जांच में है। इस दौरान कई गिरफ्तारियां हुई हैं, लेकिन किसी केंद्रीय मंत्री, विशेषकर अमित शाह के खिलाफ अब तक कोई आधिकारिक कार्रवाई या दोष सिद्ध नहीं हुआ है। ममता के ताजा आरोपों ने इस पुराने केस को एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
अब तक की स्थिति: तथ्य क्या कहते हैं?
कोई पेन ड्राइव सार्वजनिक नहीं हुई है। ED/CBI ने अमित शाह से न तो पूछताछ की है और न समन भेजा है। मामला फिलहाल राजनीतिक आरोप–प्रत्यारोप तक सीमित है।2026 बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले सियासी तापमान तेज़ी से बढ़ा है। यह पूरा प्रकरण सियासी दबाव, जांच एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोप और चुनावी रणनीतियों के बीच उलझा हुआ है। सच क्या है—यह जांच, सबूत और अदालत ही तय करेंगी। फिलहाल, पेन ड्राइव का दावा राजनीतिक हलचल जरूर बढ़ा रहा है, लेकिन ठोस प्रमाण सामने आए बिना यह बयानबाजी के दायरे से बाहर नहीं निकल सका है।




