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गौरव भाटिया के सवालों पर पवन खेड़ा का सर्जिकल स्ट्राइक — BJP चारों खाने चित, पाखंड का पर्दाफाश

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नई दिल्ली 11 अक्टूबर 2025

छब्बे बनने गए चौबे, दुबे भी न रहे

भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता गौरव भाटिया द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘X’ पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सीधे निशाना बनाते हुए सवालों की एक तीखी बौछार की गई थी, जिसका उद्देश्य कांग्रेस के मुस्लिम महिला अधिकारों के प्रति कथित दोहरे रवैये को उजागर करना था। भाटिया ने प्रश्न उठाए थे कि “आपने तीन तलाक का विरोध क्यों किया?”, “आप बहुविवाह पर चुप क्यों हैं?”, “आप हलाला पर कुछ क्यों नहीं बोलते?”, और “आपने यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड (UCC) का विरोध क्यों किया?” बीजेपी का यह घिसा-पिटा और विभाजनकारी नैरेटिव इस बार सोशल मीडिया पर ज़्यादा देर तक अपनी जगह नहीं बना सका, क्योंकि कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने उसी मंच और उसी गति से ऐसा पलटवार किया, जिसने बीजेपी की “मुस्लिम महिला चिंता” की पूरी पोल खोलकर रख दी। खेड़ा ने अपनी जवाबी कार्रवाई में बीजेपी की नैतिकता और ईमानदारी पर सीधे सवाल उठाते हुए पूछा कि “गौरव भाटिया जी, अगर आप मुस्लिम महिलाओं के लिए इतने चिंतित हैं तो ज़रा बताइए — आपकी अपनी पार्टी में मुस्लिम महिलाओं की भागीदारी कहाँ है?” यह जवाबी हमला केवल एक ट्वीट नहीं था, बल्कि यह बीजेपी के ‘मुस्लिम महिला कार्ड’ की राजनीति पर किया गया एक ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ था, जिसने उनके पाखंड और दोहरी सोच को एक झटके में उधेड़ दिया।

“ज़ीरो” से शुरू होकर “ज़ीरो” पर खत्म: पवन खेड़ा ने बीजेपी का प्रतिनिधित्व रिकॉर्ड उधेड़ा

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने बीजेपी के नैतिक उच्चाधिकार को चुनौती देते हुए, पार्टी के प्रतिनिधित्व रिकॉर्ड पर सीधे छह तीखे और तथ्यात्मक सवाल दागे, जिनके जवाब में बीजेपी पूरी तरह मौन हो गई। खेड़ा ने पूछा कि बीजेपी के पास आज केंद्रीय कैबिनेट में कितनी मुस्लिम महिला मंत्री हैं, राज्यसभा और लोकसभा में कितनी मुस्लिम महिला सांसद पार्टी की टिकट पर जीतकर पहुँची हैं, देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बीजेपी की कितनी मुस्लिम महिला विधायक हैं, और सबसे महत्वपूर्ण, बीजेपी ने हाल के 2024 लोकसभा चुनाव या हाल के किसी भी विधानसभा चुनाव में कितनी मुस्लिम महिलाओं को टिकट दिया था? इसके साथ ही उन्होंने बिहार जैसे मुस्लिम बहुल राज्य से चुनाव में कितनी मुस्लिम महिलाओं को मैदान में उतारने की पार्टी की योजना है, यह सवाल भी पूछा। 

फिर पवन खेड़ा ने बिना रुके इन सभी सवालों का जवाब खुद ही दे दिया — “अगर इन सभी सवालों का जवाब ‘शर्मनाक ज़ीरो’ है, तो कृपया मुस्लिम महिलाओं के नाम पर नैतिकता का भाषण देना बंद कीजिए। आपकी पार्टी का रिकॉर्ड ही आपके पाखंड और दोगली राजनीति की सबसे बड़ी गवाही है।” खेड़ा के इस तथ्यात्मक पलटवार ने यह स्पष्ट कर दिया कि बीजेपी के लिए मुस्लिम महिला अधिकार कोई सामाजिक सरोकार नहीं, बल्कि केवल राजनीतिक लाभ और ध्रुवीकरण का एक हथियार मात्र है।

 “बीजेपी को मुस्लिम महिलाओं का ठेका नहीं मिला है”: पाखंड पर सीधा पलटवार

पवन खेड़ा ने बीजेपी पर सीधा और तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि बीजेपी “मुस्लिम महिला अधिकारों” का इस्तेमाल सिर्फ राजनीतिक औज़ार की तरह करती है, जबकि उसकी अपनी पार्टी और सरकार में मुस्लिम महिलाओं को किसी भी तरह का वास्तविक प्रतिनिधित्व और नेतृत्व नहीं दिया गया है। उन्होंने अत्यंत कठोर शब्दों में लिखा कि “बीजेपी के नेताओं को मुस्लिम महिलाओं पर भाषण देने और उनके अधिकारों का ठेका लेने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

 जब उनकी अपनी पार्टी के संगठन में एक भी मुस्लिम महिला मंत्री, सांसद या विधायक नहीं है, तो ये दिखावटी सहानुभूति और चिंता केवल राजनीतिक पाखंड के सिवा कुछ नहीं है।” खेड़ा ने आगे कहा कि बीजेपी को किसी और को ज्ञान देने से पहले अपने घर में झाँककर देखना चाहिए — “जो पार्टी अपने संगठन और निर्णय लेने वाली प्रक्रियाओं में मुस्लिम महिलाओं को प्रतिनिधित्व नहीं दे सकती, उसे किसी और पार्टी को समान अधिकारों और सशक्तिकरण का ज्ञान देना शोभा नहीं देता।” खेड़ा का यह रुख कांग्रेस की रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है, जहाँ अब पार्टी बीजेपी के एजेंडे पर नहीं खेलेगी, बल्कि आक्रामक रूप से उसके पाखंड और दोहरे मापदंडों को उजागर करेगी।

महिलाओं का सशक्तिकरण कर्म से होता है, नारे से नहीं: कांग्रेस का समर्थन

कांग्रेस नेताओं ने पवन खेड़ा के इस सटीक और तथ्य-आधारित जवाब का पूरे जोश के साथ समर्थन किया है। कांग्रेस की महिला मोर्चा की नेताओं ने याद दिलाया कि बीजेपी केवल “महिला सशक्तिकरण” का एक खोखला नारा देती है, जबकि कांग्रेस पार्टी ने इतिहास में इंदिरा गांधी से लेकर सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी तक, महिलाओं को वास्तविक अवसर, नेतृत्व और निर्णय लेने की शक्ति दी है। उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह आज भी महिलाओं को, खासकर मुस्लिम महिलाओं को, राजनीतिक मंच पर खड़ा करने से डरती है, क्योंकि ऐसा करने से उनकी कोर वोट बैंक की राजनीति को खतरा हो सकता है। 

सोशल मीडिया पर भी बीजेपी के “नैतिक सवालों” पर लोगों ने जमकर प्रतिक्रिया दी है, जहाँ कई यूज़र्स ने तीखा तंज कसते हुए लिखा कि “बीजेपी के पास मुस्लिम महिलाओं की चिंता जताने के लिए ट्विटर हैंडल है, लेकिन उन्हें टिकट देने के लिए हिम्मत नहीं है।” यह स्पष्ट हो गया है कि पवन खेड़ा ने जो सवाल पूछे हैं, उनके जवाब बीजेपी नेतृत्व कभी नहीं दे पाएगा, क्योंकि वे सवाल सीधे उनकी पार्टी की विचारधारा और कार्यप्रणाली की जड़ पर हमला करते हैं

 पवन खेड़ा ने बीजेपी को आईना दिखाकर बोलती बंद की

गौरव भाटिया द्वारा उठाए गए सवाल बेशक कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करने के लिए थे, लेकिन पवन खेड़ा ने अपने तीखे और तथ्यात्मक जवाब में बीजेपी की पूरी नीति और उसके नेतृत्व को उल्टा आईना दिखा दिया। कांग्रेस के इस आक्रामक जवाब ने यह साफ़ कर दिया है कि बीजेपी के लिए “मुस्लिम महिलाओं की आज़ादी” कोई सच्चा सामाजिक सरोकार या नैतिक कर्तव्य नहीं, बल्कि केवल एक राजनीतिक हथियार है जिसका इस्तेमाल वह अपने चुनावी हितों को साधने के लिए करती है। और जैसे ही पवन खेड़ा ने बीजेपी के प्रतिनिधित्व रिकॉर्ड को सार्वजनिक करते हुए यह निर्णायक सवाल पूछा — “जब आपकी पार्टी में एक भी मुस्लिम महिला मंत्री/सांसद/विधायक नहीं, तो आप किस नैतिकता से उनके अधिकारों के ठेकेदार बन बैठे?” — बीजेपी के प्रवक्ता की बोलती सचमुच बंद हो गई, और बीजेपी की दोगली राजनीति का मुखौटा एक बार फिर सबके सामने उतर गया।

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