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संसद रिपोर्ट — शीतकालीन सत्र 2025 का उथल–पुथल भरा दिन

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आलोक कुमार । नई दिल्ली 3 दिसंबर 2025

संसद में गतिरोध टूटा: SIR पर बहस की मांग आखिरकार सरकार ने मानी

शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन संसद में ऐसा गतिरोध टूटा, जिसने पिछले 48 घंटे से देश की विधायी प्रक्रिया को लगभग जकड़ रखा था। विपक्ष की सबसे बड़ी और तीखी मांग—स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (SIR)—पर केंद्र सरकार ने स्वीकृति दे दी। यह वह मुद्दा था, जिस पर INDIA ब्लॉक लगातार एकजुट होकर सदन में विरोध प्रदर्शन कर रहा था। दो दिनों तक लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही लगभग ठप रही, और विपक्ष बार-बार यह आरोप लगा रहा था कि सरकार SIR के बहाने मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर ‘नाम काटने’ का षड्यंत्र कर रही है। बुधवार की सुबह विपक्ष की रणनीति बैठक हुई, जिसमें मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने नेतृत्व किया और यह स्पष्ट संदेश दिया कि विपक्ष एक इंच पीछे नहीं हटेगा। इसके बाद स्पीकर ओम बिड़ला द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में सरकार दबाव में झुक गई। यह घटना भारतीय संसदीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनी, जहाँ विपक्ष के दबाव और नैतिक आग्रह ने सरकार को अपने रुख में बदलाव लाने पर मजबूर किया।

सरकार ने घोषणा की कि 9 दिसंबर को लोकसभा में चुनाव सुधार, SIR और मतदाता सूची में सुधारों पर विस्तृत बहस होगी। साथ ही 8 दिसंबर को ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर भी चर्चा का प्रस्ताव पारित किया गया। विपक्ष ने सरकार की सहमति को अपनी रणनीतिक जीत बताते हुए कहा कि यह “लोकतंत्र की जवाबदेही की जीत” है। वहीं सरकार ने बयान दिया कि वह “लोकतांत्रिक परंपराओं के प्रति प्रतिबद्ध है”, परंतु राजनीतिक हलकों में इसे विपक्ष की बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है।

Sanchar Saathi विवाद ने संसद को हिला दिया: नागरिकों की निजता पर राष्ट्रव्यापी चिंता

लोकसभा में बुधवार को Sanchar Saathi ऐप को लेकर गहरा विवाद खड़ा हो गया। इस ऐप को लेकर पहले भी तकनीकी और सामाजिक चिंताएँ थीं, लेकिन सदन में इसकी तीखी आलोचना पहली बार इस स्तर पर दिखाई दी। शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ सांसद अरविंद सावंत ने इसे “सरकारी स्तर पर निगरानी का सबसे खतरनाक औज़ार” बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ने मोबाइल फोन निर्माताओं और विक्रेताओं को निर्देश दिया है कि यह ऐप हर नए फोन में ‘अनिवार्य रूप से’ डाला जाए, और उपयोगकर्ता इसे हटाने या निष्क्रिय करने में सक्षम नहीं होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यह ऐप भारत की 110 करोड़ मोबाइल उपयोगकर्ताओं की निजता को निगल सकता है।

सावंत के बयान ने न केवल विपक्ष बल्कि कई NDA दलों के सांसदों को भी बेचैन किया। उन्होंने कहा कि ऐप वास्तविक समय में उपयोगकर्ताओं की लोकेशन ट्रैकिंग, डिवाइस इंटेलिजेंस, सर्च पैटर्न, कॉल डेटा, और लेनदेन गतिविधियों तक पहुंच सकता है। सावंत ने इस ऐप की तुलना “डिजिटल पेगासस” से की और कहा कि भारत में लोकतंत्र खतरे में पड़ सकता है यदि ऐसे ऐप्स को निगरानी के औजार के रूप में इस्तेमाल किया गया। विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार इस ऐप को “MTNL और BSNL के पुनर्गठन के साथ जोड़कर” एक बड़े निगरानी तंत्र का निर्माण करने की योजना बना रही है।

राज्यसभा में रणदीप सुरजेवाला का तीखा हमला: ‘Sanchar Saathi लोकतंत्र के लिए खतरा है’

लोकसभा में उठे विवाद का प्रभाव तुरंत राज्यसभा में भी देखने को मिला। कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस ऐप को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ऐप के माध्यम से सरकार हर नागरिक के फोन में एक “स्थायी बैकडोर” तैयार कर रही है। सुरजेवाला ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार इस ऐप का उपयोग पत्रकारों, विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और असहमति व्यक्त करने वाले आवाज़ों को नियंत्रित करने के लिए कर सकती है। उन्होंने कहा कि “यह ऐप किसी भी नागरिक के फोन को बंद करने, चालू करने, डेटा मिटाने या गतिविधियों की निगरानी करने की क्षमता रखता है”—जो किसी भी आधुनिक लोकतंत्र में अस्वीकार्य है।

उन्होंने तकनीकी दृष्टिकोण से भी चिंता जताई कि Sanchar Saathi ऐप लाखों डिवाइसों को हैकर्स के लिए एक आसान लक्ष्य बना सकता है। क्योंकि ऐप के अपडेट और सुरक्षा नियंत्रण पूरी तरह सरकार के नियंत्रण में होंगे, किसी भी देरी से व्यापक साइबर हमले का खतरा बढ़ जाएगा। विपक्ष ने इसे “राष्ट्रव्यापी निगरानी” का उपकरण बताया और कहा कि सरकार को तुरंत संसद में इसकी तकनीकी, कानूनी और संवैधानिक व्याख्या देनी चाहिए।

मणिपुर में अब भी संकट: DMK सांसद ने सदन में खोला मोर्चा—‘राज्य वेंटिलेटर पर है’

राज्यसभा में DMK सांसद पी. विल्सन ने मणिपुर की स्थिति पर बेहद भावुक और तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मणिपुर पिछले डेढ़ वर्ष से सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक संकट से उबर नहीं पा रहा। उन्होंने कहा कि राज्य “वेंटिलेटर पर” है और यह मानवता का सवाल है कि वहां कब तक लोकतंत्र को रोका जाएगा? केंद्रीय सरकार के चुनाव न कराने के फैसले पर उन्होंने कड़ी आलोचना की और कहा कि चुनाव से भागना लोकतांत्रिक मूल्यों का सीधा अपमान है।

इसके बाद विल्सन ने दिल्ली की वायु-प्रदूषण समस्या पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि दिल्ली में रहने वाले लाखों लोग बदतर वायु गुणवत्ता के कारण औसतन “आठ वर्ष कम जी रहे हैं”, और ऐसे में क्या संसद के शीतकालीन सत्र को हर वर्ष इसी प्रदूषण वाले महीने में आयोजित करना उचित है? उन्होंने सुझाव दिया कि सुप्रीम कोर्ट की शाखाएँ देश के अन्य महानगरों में खोली जाएँ, जिससे न्यायपालिका और प्रशासन पर दिल्ली का बोझ कम हो सके। उनके वक्तव्य ने सदन में हंगामा तो किया, लेकिन इसने देश की राजधानी के संरचनात्मक बोझ पर एक नया विमर्श भी शुरू कर दिया।

भूजल प्रदूषण पर गहरी चिंता: YSRCP सांसद ने कहा—‘कानून सिर्फ सतही जल तक सीमित क्यों?’

राज्यसभा में जल प्रदूषण संशोधन विधेयक पर बोलते हुए YSRCP के अयोध्या रामी रेड्डी ने चिंता जताई कि भारत की जल नीति अभी भी आधी-अधूरी है। उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में सतही जल की तुलना में भूजल कहीं अधिक प्रदूषित है, लेकिन कानून में भूजल प्रदूषण का स्पष्ट उल्लेख ही नहीं है। उन्होंने कहा कि कृषि अपवाह (agricultural runoff)—जिसमें रसायन, कीटनाशक और उर्वरक शामिल होते हैं—देश भर में जलाशयों को विषैला कर रहा है।

उन्होंने कहा कि केवल कुछ राज्यों में भूजल प्रबंधन के लिए कानून हैं, और यह “राष्ट्रीय स्तर पर असमानता” पैदा करता है। इस विषय पर AAP सांसद राघव चड्ढा ने भी पंजाब की भूजल समस्या का संदर्भ देते हुए केंद्र से तत्काल सहायता की मांग की। इस बहस ने संकेत दिया कि जल प्रदूषण की समस्या दिल्ली तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश की जन–जीवन और कृषि को प्रभावित कर रही है।

पंजाब में बाढ़ से तबाही: हरसिमरत कौर बादल का केंद्र पर हमला—‘3 लाख फसलें नष्ट, कोई राहत नहीं’

लोकसभा में पंजाब की पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर केंद्र सरकार की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि पंजाब के सीमावर्ती जिले अगस्त–सितंबर में भीषण बाढ़ से प्रभावित हुए, जिसमें तीन लाख से अधिक किसानों की फसलें पूरी तरह नष्ट हो गईं, लेकिन केंद्र ने अभी तक राहत पैकेज की घोषणा नहीं की। उन्होंने इसे “पंजाब की बेरहम उपेक्षा” बताया। बादल ने चेतावनी दी कि कृषि संकट सिर्फ राज्य का नहीं, पूरे देश का संकट बन सकता है। उन्होंने कहा कि केंद्र ने राजनीतिक कारणों से पंजाब को नज़रअंदाज़ किया है, और यदि समय रहते राहत नहीं दी गई, तो किसान आंदोलन की आग फिर से भड़क सकती है।

शिक्षा पर तकरार: धर्मेंद्र प्रधान ने विपक्ष पर निशाना साधा—‘कुछ राज्य फंड राजनीति में झोंक रहे’

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने लोकसभा में “समग्र शिक्षा अभियान” पर जवाब देते हुए कहा कि केंद्र ने पर्याप्त फंड दिए हैं, लेकिन कई राज्य “राजनीतिक कारणों” से फंड खर्च नहीं कर रहे। उन्होंने कहा कि कई राज्यों ने केंद्र के शिक्षा मॉडल को अपनाने से इंकार किया है। उनके इस बयान पर पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और अन्य राज्यों के सांसदों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। प्रधान ने NEP पर बोलते हुए कहा कि शिक्षा को मातृभाषा से जोड़ना समय की मांग है, और IIT-मद्रास द्वारा ज़ांज़ीबार में खोली गई शाखा भारतीय शिक्षा मॉडल की वैश्विक सफलता का प्रमाण है।

यह बहस यह दिखाती है कि केंद्र और राज्यों के बीच शिक्षा नीति को लेकर वैचारिक और राजनीतिक विभाजन लगातार गहरा रहा है। राज्य-केंद्र संबंधों में यह तनाव आने वाले वर्षों की शिक्षा व्यवस्थाओं को प्रभावित करेगा।

श्रम संहिताओं पर विपक्ष का बड़ा प्रदर्शन—‘यह मजदूर विरोधी कानून हैं’

संसद परिसर में INDIA ब्लॉक के नेताओं ने नए Labour Codes के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन किया। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि नई संहिताएँ श्रमिक अधिकारों को खत्म करने की दिशा में उठाया गया “सबसे खतरनाक कदम” हैं। उन्होंने कहा कि 29 श्रम कानूनों को मिलाकर 4 कोड बनाए गए, लेकिन उनमें मजदूर के अधिकारों को कमजोर किया गया। विपक्ष का दावा है कि ये कोड कॉर्पोरेट हितों को बढ़ावा देते हैं और मजदूर पर नियंत्रण बढ़ा देंगे।

सरकार का दावा है कि कोड “मॉडर्न लेबर मार्केट” के लिए आवश्यक हैं, लेकिन देश भर के मजदूर संगठनों, ट्रेड यूनियनों और विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया है। संसद परिसर में यह विरोध प्रदर्शन दिखाता है कि यह मुद्दा आने वाले महीनों में बड़ी राजनीतिक लड़ाई का केंद्र रहेगा।

फेक न्यूज़ और AI पर तीखी बहस—पप्पू यादव ने चेतावनी दी: ‘डिजिटल अफवाहें देश को तोड़ सकती हैं’

लोकसभा में बिहार के सांसद पप्पू यादव ने फेक न्यूज़ और AI आधारित deepfakes के तेजी से फैलते खतरे पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गलत सूचनाएँ सांप्रदायिक तनाव, सामाजिक विभाजन और भीड़ हिंसा को बढ़ावा दे रही हैं। उन्होंने पूछा कि सरकार इस डिजिटल खतरे से निपटने के लिए क्या कर रही है।

IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार ने deepfakes के खिलाफ नए नियम बनाए हैं, और ऑनलाइन जुआ तथा फेक न्यूज़ पर “कड़े कदम” उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना होगा।

यह चर्चा भारत के डिजिटल भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि AI आधारित मिथ्या सूचनाएँ चुनावों, सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं।

संसद में उग्रता, सवाल और जवाब—एक ऐसा दिन जिसने भारतीय लोकतंत्र की दिशा तय की

शीतकालीन सत्र का यह दिन भारतीय संसद के इतिहास में बड़े राजनीतिक, तकनीकी, सामाजिक और आर्थिक मुद्दों के टकराव के रूप में याद रखा जाएगा।
SIR से लेकर Sanchar Saathi तक, पंजाब की बाढ़ से लेकर मणिपुर के चुनाव तक, भूजल प्रदूषण से लेकर श्रम संहिताओं तक—हर मुद्दा न केवल सरकार पर दबाव बढ़ा रहा है बल्कि भारतीय लोकतंत्र की संरचना, जनता के अधिकार और भविष्य की नीति-निर्माण प्रक्रिया को भी प्रभावित कर रहा है।

यह दिन एक संकेत है कि आने वाले सप्ताहों में संसद में टकराव और गहराएगा। भारत के लोकतंत्र में विचारों की यह भिड़ंत ही भविष्य की दिशा तय करेगी।

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