एबीसी डेस्क 20 नवंबर 2025
लद्दाख के उन बर्फीले पहाड़ों में, जहां इंसान का सांस लेना भी कठिन हो जाता है, सोनम वांगचुक ने 2021 में एक ऐसी तकनीक दुनिया को दी जिसे सिर्फ ‘आविष्कार’ कहना उसके महत्व को छोटा कर देगा। यह था—दुनिया का पहला सोलर हीटेड टेंट, भारतीय सेना के उन जवानों के लिए जो –14°C की जानलेवा ठंड में देश की रक्षा करते हुए अपनी जान दांव पर लगाते हैं। वांगचुक ने इस टेंट को दो हिस्सों में डिजाइन किया—एक सोलर लाउंज, जो सूरज की रोशनी को पकड़कर प्राकृतिक गर्मी में बदल देता है, और दूसरा स्लीपिंग चैंबर, जिसमें 10 जवान आराम से सो सकते हैं। यह टेंट बिजली और ईंधन के बिना +15°C तापमान पैदा कर देता है, वह भी उन दर्रों में जहां डीज़ल पहुंचाना ही एक युद्ध जैसा ऑपरेशन होता है। सिर्फ इतना ही नहीं, हर टेंट 9 टन CO₂ उत्सर्जन की बचत करता है, यानी पर्यावरण की सुरक्षा में भी योगदान। यह टेंट 5 लाख की लागत में वह सुविधा देता है जो सेना की पारंपरिक हीटिंग व्यवस्था करोड़ों में भी नहीं दे पाती।
यह वही वांगचुक हैं जिन्होंने ‘आइस स्तूपा’ जैसे नवाचारों से पूरी दुनिया का ध्यान खींचा और लद्दाख की पानी की समस्या को विज्ञान से हल करने का रास्ता दिखाया। गैलवान संघर्ष के बाद, जब सीमा पर थरथराती ठंड जवानों की सबसे बड़ी दुश्मन बन गई थी, उसी समय वांगचुक ने रात–दिन मेहनत कर इस टेंट को सेना को सौंपा। यह इनोवेशन आज लद्दाख की दुर्गम चौकियों में तैनात हर सैनिक की ढाल बन चुका है। लेकिन विडंबना देखिए—जिस इंसान ने सैनिकों को मौत की ठंड से बचाया, उसी को सरकार ने ‘खतरा’ घोषित कर जेल भेज दिया।
सितंबर 2025 में वांगचुक को NSA के तहत गिरफ्तार कर लिया गया—एक ऐसा कानून जो आतंकवादियों पर लगता है। उनका अपराध? लद्दाख के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा मांगना, छठी अनुसूची के तहत आदिवासी अधिकारों की रक्षा की आवाज उठाना, और पर्यावरण बचाने की लड़ाई लड़ना। जिस वांगचुक ने हमेशा अहिंसा की बात की, उन्हें हिंसा भड़काने का आरोपी बना दिया गया। 1,600 किलोमीटर दूर जोधपुर सेंट्रल जेल में स्थानांतरित करना अपने आप में बताता है कि सरकार किसे चुप कराना चाहती है। एडवाइजरी बोर्ड तक ने 28 दिन देर से दस्तावेज देने पर कानूनी प्रक्रिया के उल्लंघन की बात उठाई, लेकिन केंद्र सरकार की जिद जारी रही।
लद्दाख में 2019 के बाद ‘प्रत्यक्ष शासन’ का वादा किया गया था, लेकिन हुआ क्या? स्थानीय लोगों की जमीन, नौकरियों और सांस्कृतिक अधिकारों पर हमला हुआ, इंटरनेट बंद किया गया, FCRA लाइसेंस रद्द हुए, और अब आवाज उठाने वालों को आतंकवादियों की तरह जेल में डाला जा रहा है। लाखों लोग सोशल मीडिया पर #SonamWangchukArrested के साथ सरकार के दमन के खिलाफ खड़े हैं, जबकि विपक्ष खुलेआम कह रहा है—”यह मोदी सरकार की तानाशाही है।”
सवाल सीधा है—क्या यही है वह ‘नया भारत’, जहां इनोवेशन की सराहना नहीं, बल्कि सजा मिलती है? जहां वैज्ञानिकों को राष्ट्रद्रोही और चापलूसों को देशभक्त घोषित कर दिया जाता है? वांगचुक की गिरफ्तारी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि एक विचार की गिरफ्तारी है। यह वह विचार है जो कहता है कि देशभक्ति सरकार की चापलूसी नहीं, बल्कि जनता और प्रकृति के हित में खड़े होने का नाम है।
आज पूरी दुनिया देख रही है कि जिस सरकार ने सैनिकों की जान बचाने वाले इनोवेटर को जेल में धकेल दिया, वह असल में किसकी दुश्मन है—विरोध की, लोकतंत्र की, या इस देश के भविष्य की? इतिहास बताता है कि सत्ता की जंजीरें लंबे समय तक टिकती नहीं, लेकिन वांगचुक जैसे लोग पीढ़ियों को प्रेरणा देकर जाते हैं। वक्त आएगा जब न्याय होगा—और वह बर्फीला लद्दाख फिर उसी धूप से गर्म होगा जिसने वांगचुक को एक प्रतीक बनाया।




