एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली / तिरुवनंतपुरम | 8 फरवरी 2026
लो-प्रोफाइल लेकिन रणनीतिक रूप से अहम दौरा
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval ने जनवरी 2026 में केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित Vikram Sarabhai Space Centre (VSSC) का दौरा किया। यह दौरा प्रधानमंत्री Narendra Modi के सीधे निर्देश पर हुआ और इसे जानबूझकर पूरी तरह लो-प्रोफाइल रखा गया। न तो कोई आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई और न ही मीडिया को इसकी पूर्व जानकारी दी गई। बाद में जब इस विज़िट की खबर सामने आई, तो कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इसे “सीक्रेट मिशन” और “स्पेस प्रोग्राम खतरे में” जैसे सनसनीखेज दावों से जोड़ दिया गया, जबकि ज़मीनी हकीकत इससे काफ़ी अलग थी।
PSLV के दो लगातार फेलियर: चिंता की असली पृष्ठभूमि
डोभाल के VSSC दौरे की असली वजह भारत के सबसे भरोसेमंद रॉकेट PSLV के दो लगातार फेलियर रहे। मई 2025 में PSLV-C61 मिशन थर्ड स्टेज में आई तकनीकी खराबी के कारण असफल रहा। इसके बाद 12 जनवरी 2026 को PSLV-C62 मिशन में भी थर्ड स्टेज में अनॉमली दर्ज की गई, जिसके चलते 15 भारतीय उपग्रह खो गए। PSLV की 90 प्रतिशत से अधिक सफलता दर को देखते हुए ये दोनों घटनाएं असामान्य मानी गईं। चूंकि इन मिशनों में कुछ पेलोड राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े और संवेदनशील प्रकृति के थे, इसलिए मामला सिर्फ़ तकनीकी नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बन गया।
राष्ट्रीय सुरक्षा के नज़रिये से हाई-लेवल टेक्निकल रिव्यू
इन विफलताओं के बाद सरकार ने तय किया कि केवल वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग जांच पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी देखा जाना चाहिए। इसी क्रम में अजीत डोभाल VSSC पहुंचे। उन्होंने केंद्र के निदेशक, डिप्टी डायरेक्टर्स और वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ विस्तृत बैठकों में मिशन डेटा, थर्ड स्टेज की परफॉर्मेंस रिपोर्ट और फेलियर एनालिसिस की गहराई से समीक्षा की। इस दौरान तकनीकी प्रक्रियाओं के साथ-साथ सुरक्षा प्रोटोकॉल और सप्लाई चेन से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा हुई।
सैबोटाज एंगल क्यों आया जांच के दायरे में
PSLV-C61 और PSLV-C62—दोनों में थर्ड स्टेज से जुड़ी समस्या सामने आना स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े करता है। जब एक ही स्टेज में बार-बार गड़बड़ी हो और पेलोड राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हों, तो यह ज़िम्मेदारी बनती है कि हर संभावित पहलू—तकनीकी, प्रक्रियात्मक और सुरक्षा—की जांच की जाए। इसी वजह से सैबोटाज या किसी बाहरी हस्तक्षेप की संभावना को भी जांच के दायरे में रखा गया, ताकि किसी भी आशंका को शुरुआती स्तर पर ही पूरी तरह खारिज या पुष्टि किया जा सके।
आधिकारिक निष्कर्ष: सैबोटाज नहीं, तकनीकी कारण जिम्मेदार
केंद्रीय विज्ञान एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री Jitendra Singh ने बाद में डोभाल की समीक्षा और ISRO की जांच रिपोर्ट के आधार पर स्थिति साफ़ कर दी। सरकार ने स्पष्ट कहा कि दोनों फेलियर के कारण पूरी तरह तकनीकी थे और किसी तरह की सैबोटाज या विदेशी जासूसी का कोई सबूत नहीं मिला है। मंत्री के अनुसार, दोनों घटनाओं के कारण अलग-अलग थे—एक में इलेक्ट्रिकल “बल्ब फ्यूज” जैसी समस्या और दूसरे में “ट्रिपिंग” से जुड़ी तकनीकी अनियमितता सामने आई। मामले की गहराई से जांच के लिए एक आंतरिक और एक बाहरी विशेषज्ञ समिति गठित की गई है।
आगे की रणनीति: जून 2026 में अगला PSLV लॉन्च
सरकार और Indian Space Research Organisation (ISRO) ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन तकनीकी खामियों को दूर करने के बाद अगला PSLV लॉन्च जून 2026 में किया जाएगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि इन विफलताओं से मिले सबक लॉन्च सिस्टम को और मज़बूत करेंगे। PSLV की विश्वसनीयता पर कोई बुनियादी सवाल नहीं उठता, बल्कि यह पूरी प्रक्रिया सिस्टम को और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक ज़रूरी सुधारात्मक कदम है।
मीडिया की सनसनी बनाम तथ्यात्मक सच्चाई
कुछ हिंदी और क्षेत्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में “रिसर्च प्रोग्राम्स की जासूसी” और “भारत का स्पेस मिशन खतरे में” जैसे दावे किए गए, लेकिन इनमें कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं रखा गया। विशेषज्ञों का कहना है कि अजीत डोभाल का VSSC दौरा किसी गुप्त साजिश का संकेत नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार हाई-लेवल रिव्यू था—ठीक वैसा ही, जैसा किसी बड़े औद्योगिक या रणनीतिक ढांचे में तकनीकी गड़बड़ी के बाद किया जाता है।
खतरे की घंटी नहीं, जिम्मेदारी का संकेत
स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम सुरक्षित है और ISRO पर सरकार का भरोसा कायम है। NSA अजीत डोभाल का VSSC दौरा किसी बड़े खतरे का संकेत नहीं, बल्कि यह दिखाता है कि जब बात राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील तकनीक की आती है, तो सरकार किसी भी स्तर पर समीक्षा करने से पीछे नहीं हटती। तकनीकी समस्याएं पहचान ली गई हैं, समाधान की प्रक्रिया जारी है और ISRO आगे भी पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी उड़ान जारी रखने को तैयार है।




