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NRC मानवता के खिलाफ़ साजिश, बंगाल झुकेगा नहीं — ममता बनर्जी का ऐलान

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कोलकाता 30 अक्टूबर 2025

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीजेपी पर अब तक का सबसे आक्रामक वार करते हुए कहा है कि “SIR प्रक्रिया” दरअसल NRC को बंगाल में थोपने की एक गंदी साजिश है, जिसे उनकी सरकार कभी भी लागू नहीं होने देगी। ममता ने कहा कि बीजेपी की यह नीति डर, विभाजन और नफरत फैलाने पर आधारित है, जिससे समाज की एकता और देश की आत्मा दोनों पर चोट पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि बीजेपी की इस साजिश ने बंगाल में ऐसा भय का माहौल पैदा कर दिया है कि लोग अपनी ही जमीन पर अपने अस्तित्व को लेकर डरने लगे हैं। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार और गृह मंत्री पर तीखा सवाल दागते हुए कहा — “क्या बीजेपी इतनी अमानवीय हो गई है कि लोगों को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए जान देने पर मजबूर कर रही है?”

तीन दिनों में तीन आत्महत्याएं — NRC के डर से टूटी इंसानियत:

ममता बनर्जी ने कहा कि बीजेपी की NRC नीति ने बंगाल में एक के बाद एक निर्दोष लोगों की जान ले ली है। उन्होंने बताया कि 27 अक्टूबर को उत्तर 24 परगना के खड़दह के रहने वाले 57 वर्षीय प्रदीप कर ने आत्महत्या कर ली। अपने सुसाइड नोट में उन्होंने साफ लिखा — “NRC is responsible for my death” (मेरी मौत का जिम्मेदार NRC है)। यह वाक्य सिर्फ एक आदमी की चीख नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों की पुकार है जो बीजेपी की नीतियों के चलते अपमान और असुरक्षा में जी रहे हैं।

अगले ही दिन, 28 अक्टूबर को, कूचबिहार के दिनहाटा में 63 वर्षीय एक व्यक्ति ने जान देने की कोशिश की। वो भयभीत थे कि SIR प्रक्रिया के तहत उन्हें भी “घुसपैठिया” या “बाहरी” घोषित कर दिया जाएगा। और 29 अक्टूबर को तो इंसानियत ही कांप उठी जब 95 वर्षीय खितीश मजूमदार — जो पश्चिम मेदिनीपुर के कोतवाली क्षेत्र के निवासी थे और अपनी बेटी के साथ इलामबाजार, बीरभूम में रह रहे थे — अपने ही देश में पराया बना दिए जाने के डर से आत्महत्या कर बैठे।

ममता बनर्जी ने कहा कि “एक 95 साल का बुजुर्ग, जिसने पूरी जिंदगी इस मिट्टी को दी, उसे अपनी भारतीयता साबित करने के लिए जान गंवानी पड़ी — इससे बड़ा अपमान, इससे बड़ा अपराध और क्या हो सकता है? यह केवल एक त्रासदी नहीं, यह मानवता के खिलाफ़ विश्वासघात है।”

“बीजेपी जवाब दे — कितनी मौतें चाहिए उन्हें?”

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गृह मंत्री और केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए पूछा कि “इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या गृह मंत्री अमित शाह आगे आकर जवाब देंगे? क्या बीजेपी यह स्वीकार करेगी कि उनकी नफरत की राजनीति ने बंगाल के आम आदमी को डर, असुरक्षा और मौत के साये में धकेल दिया है?”

उन्होंने कहा कि बीजेपी के पास अब सिर्फ दो हथियार बचे हैं — बेईमानी और साजिश। जब लोगों ने उनके झूठे वादों को पहचान लिया है, तो अब वे पहचान और नागरिकता के नाम पर भय फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। ममता ने कहा, “बीजेपी का असली एजेंडा है — डर फैलाओ, बांटो और राज करो। लेकिन बंगाल न तो डरेगा, न झुकेगा, न बंटेगा।”

हम बंगाल में NRC नहीं आने देंगे 

ममता बनर्जी ने राज्य के नागरिकों से अपील की कि वे किसी भी साजिश या अफवाह का शिकार न हों। उन्होंने कहा, “मैं बंगाल के हर नागरिक से कहती हूं — किसी के उकसावे में मत आइए, कोई चरम कदम मत उठाइए। हमारी ‘मां-माटी-मानुष सरकार’ हर नागरिक के साथ खड़ी है। हम बंगाल में NRC लागू नहीं होने देंगे — न फ्रंट डोर से, न बैक डोर से।”

उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार किसी भी वैध नागरिक को “बाहरी” घोषित नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि “यह मिट्टी उन सभी की है जिन्होंने इसमें अपना पसीना, मेहनत और जीवन लगाया है। बीजेपी को समझ लेना चाहिए कि बंगाल को अपने विभाजनकारी एजेंडे के लिए झुकाना नामुमकिन है।”

बीजेपी के खिलाफ सीधा एलान-ए-जंग:

अपने भाषण के अंत में ममता बनर्जी ने एक स्पष्ट संदेश दिया — “बीजेपी की राजनीति लोगों को बांटने की राजनीति है। लेकिन बंगाल वह भूमि है जिसने हमेशा एकता, प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया है। जब तक मेरे शरीर में खून की आखिरी बूंद बाकी है, हम बीजेपी की इस नफरत की राजनीति के खिलाफ लड़ेंगे। हम बंगाल के लोगों के अधिकार, अस्मिता और सम्मान की रक्षा करेंगे।”

उन्होंने कहा कि बीजेपी चाहे कितनी भी कोशिश कर ले, बंगाल की जनता उनके झूठ और दहशत के खेल को भलीभांति पहचान चुकी है। बंगाल के लोग अब डरने वाले नहीं — वे जवाब देंगे, लोकतंत्र के हथियार यानी वोट से। 4

ममता बनर्जी का यह बयान केवल एक राजनीतिक वक्तव्य नहीं, बल्कि एक घोषणा-पत्र की तरह है — बीजेपी की विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ एकजुट बंगाल की आवाज़। उनके शब्दों में वह दृढ़ता झलकती है जिसने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि बंगाल की आत्मा न तो बिकेगी, न झुकेगी — और न ही किसी के डर से अपना वजूद साबित करेगी।

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