महेंद्र सिंह | नई दिल्ली, 26 नवंबर 2025
बीजेपी सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थक अक्सर यह दावा करते दिखाई देते हैं कि देश की असली शुरुआत वर्ष 2014 के बाद हुई। मोदी स्वयं कई मंचों पर कहते रहे हैं कि “70 साल में कुछ नहीं हुआ” और कांग्रेस शासन ने देश के लिए कोई महत्वपूर्ण काम नहीं किया। यह बयानबाज़ी राजनीतिक नारेबाज़ी के स्तर पर तो प्रभावशाली हो सकती है, लेकिन ठोस तथ्यों और ऐतिहासिक विकास के दृष्टिकोण से इसे चुनौती मिलने लगी है। वास्तविकता यह है कि भारत की औद्योगिक नींव, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, ऊर्जा, रक्षा, स्टील, कोयला, पेट्रोलियम, मैन्युफैक्चरिंग, शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़ा हिस्सा कांग्रेस शासन में खड़ा हुआ — जिसे आज की मोदी सरकार बेचने, निजीकरण करने या लीज़ पर देने का काम कर रही है।
कांग्रेस शासन के दौरान आज़ादी के तुरंत बाद से लेकर मनमोहन सिंह सरकार तक देश ने सार्वजनिक क्षेत्र में एक मज़बूत औद्योगिक ढांचा खड़ा किया। 1950 से 2000 के बीच भारत में रणनीतिक और राष्ट्रीय महत्व के सैकड़ों संस्थानों की स्थापना की गई, जिनमें ऊर्जा उत्पादन, रक्षा निर्माण, विज्ञान और तकनीक, अनुसंधान, परिवहन, रेलवे, खनन, खाद्य सुरक्षा, बीमा, बैंकिंग और स्वास्थ्य जैसी महत्वपूर्ण सेवाएँ शामिल थीं। आज जिस भारत की अर्थव्यवस्था, उद्योग और बुनियादी ढांचा का श्रेय मोदी सरकार अपने खाते में डालती है, उसकी जड़ें वास्तव में उन्हीं सार्वजनिक उपक्रमों में हैं जिन्हें कांग्रेस ने स्थापित किया और वर्षों तक विकसित किया। विडंबना यह है कि इन्हीं संस्थानों को मोदी सरकार ने “अप्रभावी” या “अप्रासंगिक” बताकर निजी हाथों में देने की नीति अपनाई है।
बीजेपी और मोदी समर्थकों की राजनीतिक लाइन यह कहती है कि कांग्रेस ने देश को कुछ नहीं दिया, परंतु तथ्यों की लंबी सूची इस दावे को झूठा साबित करती है। उदाहरण के तौर पर ऊर्जा और कोयला क्षेत्र में Bharat Coking Coal (1972), Coal India (1973), NTPC (1975), NHPC (1975), Nuclear Power Corporation (1987), Western Coalfields (1975), Mahanadi Coalfields (1992), और Dedicated Freight Corridor Corporation (2007) जैसी संस्थाएँ कांग्रेस शासन की देन हैं। आज भारत में बिजली उत्पादन, रेल विद्युतीकरण, खनन और औद्योगिक विकास इन्हीं संस्थानों पर आधारित है, जिनके राजस्व का बड़ा हिस्सा आज सरकार की आय और संसाधन का स्रोत है।
इसी तरह रक्षा और रणनीतिक विनिर्माण क्षेत्र में Hindustan Aeronautics Limited (1963), Bharat Dynamics (1970), Bharat Earth Movers BEML (1964), Bharat Electronics BEL (1954), Mishra Dhatu Nigam (1973), और Brahmaputra Cracker and Polymer Limited (2006) जैसी कंपनियाँ स्थापित की गईं। ये संस्थाएँ आज भी मिसाइल सिस्टम, लड़ाकू विमान, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उपकरण और स्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में देश की रीढ़ बनी हुई हैं। प्रधानमंत्री मोदी का “Make in India” उसी ढांचे पर आधारित है जिसे कांग्रेस ने खड़ा किया था।
बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र को देखें तो State Bank of India (1955), Export Credit Guarantee Corporation (1957), Power Finance Corporation (1986), Indian Railway Finance Corporation (1986), और National Cooperative Development Corporation (1963) जैसे संस्थानों ने देश की आर्थिक मज़बूती में अहम भूमिका निभाई। खाद्य सुरक्षा और सामाजिक संरचना के क्षेत्र में Food Corporation of India (1965), National Seeds Corporation (1963), National Small Industries Corporation (1955), National Handloom Development Corporation (1983) जैसी संस्थाएँ आज भी करोड़ों किसानों, बुनकरों और छोटे उद्योगों की जीवनरेखा बनी हुई हैं।
आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि मोदी सरकार जिन कंपनियों में विनिवेश और निजीकरण कर रही है, उनमें से अधिकांश कांग्रेस द्वारा स्थापित हैं। Bharat Petroleum, Hindustan Shipyard, Air India, BEML, CONCOR, Shipping Corporation of India, और कई अन्य सार्वजनिक संस्थान मोदी शासन में बेचे या बेचने की प्रक्रिया में हैं। आलोचकों का कहना है कि मोदी सरकार ने खुद कुछ नया बनाया नहीं, बल्कि केवल बेचने और निजी कॉर्पोरेट समूहों को सौंपने का काम किया — वह भी उसी राष्ट्रीय संपत्ति को, जिसे कांग्रेस ने दशकों की मेहनत से बनाया था।
सच यह है कि 2014 से पहले भारत ने सिर्फ “कुछ” नहीं बनाया था, बल्कि एक ऐसा औद्योगिक, वैज्ञानिक और आर्थिक ढांचा खड़ा किया था जिस पर आज का आधुनिक भारत खड़ा है। “70 साल में कुछ नहीं हुआ” का दावा राजनीतिक प्रचार है, तथ्य नहीं। इस सूची में शामिल 130 से अधिक संस्थान इस बात का प्रमाण हैं कि कांग्रेस शासन ने देश का निर्माण किया, जबकि मोदी शासन ने उस निर्माण को बेचने का रास्ता चुना। यह बहस अब केवल राजनीतिक नहीं रही, बल्कि यह सवाल बन गई है कि देश की राष्ट्रीय संपत्ति किसकी है— जनहित की या कुछ खास कॉर्पोरेट समूहों की?
इसलिए यह कहना कि भारत की कहानी 2014 से शुरू हुई, न केवल ऐतिहासिक रूप से गलत है बल्कि देश के विकास और मेहनत को नकारने जैसा भी है। भारत की असली यात्रा 1947 से शुरू हुई थी, और उसके विकास के मजबूत स्तंभ कांग्रेस शासन में खड़े किए गए थे। आज जब मोदी सरकार “नए भारत” का नारा देती है, तब यह समझना आवश्यक है कि नया भारत उसी पुराने भारत की नींव पर खड़ा है, जिसे बनाने में कांग्रेस ने दशकों लगाए थे।




