खेल | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 11 अप्रैल 2026
क्रिकेट के मैदान पर उभरी नई सनसनी, नाम — वैभव
भारतीय क्रिकेट में प्रतिभाओं की कभी कमी नहीं रही, लेकिन कभी-कभी कोई खिलाड़ी अपनी उम्र से कहीं आगे जाकर खेलता है और सबको चौंका देता है। 15 साल के युवा बल्लेबाज़ वैभव के साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। जिस उम्र में बच्चे क्रिकेट को सिर्फ सीख रहे होते हैं, उस उम्र में वैभव अपने खेल से दिग्गजों को प्रभावित कर रहा है। हाल ही में पूर्व विस्फोटक ओपनर Virender Sehwag ने इस युवा खिलाड़ी को लेकर जो टिप्पणी की, उसने क्रिकेट जगत में हलचल पैदा कर दी है।
“अग्रेसिव नहीं… लेकिन सबसे खतरनाक” — सहवाग का बड़ा बयान
Virender Sehwag अपने बेबाक अंदाज़ के लिए जाने जाते हैं, और जब उन्होंने वैभव के खेल का विश्लेषण किया तो शब्दों का चयन भी उतना ही सटीक था। उन्होंने कहा कि वैभव पारंपरिक अर्थों में “अग्रेसिव” बल्लेबाज़ नहीं है, लेकिन वह “सबसे खतरनाक” है। सहवाग के मुताबिक, वैभव का खेल शोर-शराबे वाला नहीं बल्कि शांत और सटीक है—वह गेंदबाज़ों पर बिना जोखिम लिए दबाव बनाता है और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।
सहवाग का यह बयान इसलिए भी अहम हो जाता है क्योंकि उन्होंने अपने समय में दुनिया के सबसे तेज़ और खतरनाक गेंदबाज़ों का सामना किया है। ऐसे खिलाड़ी से यह तारीफ मिलना किसी भी युवा के लिए बड़ी बात है।
रोहित, यशस्वी और अभिषेक से भी आगे क्यों रखा?
सहवाग ने वैभव की तुलना मौजूदा भारतीय सितारों से भी की और उन्हें Rohit Sharma, Yashasvi Jaiswal और Abhishek Sharma जैसे खिलाड़ियों से अलग और कुछ मामलों में बेहतर बताया। उन्होंने कहा कि जहां ये खिलाड़ी आक्रामक अंदाज़ में रन बनाते हैं, वहीं वैभव की खासियत उसका संयम और मैच की स्थिति के हिसाब से खेलने की समझ है।
यह तुलना किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए बहुत बड़ी बात है, क्योंकि जिन नामों का जिक्र हुआ है, वे आज भारतीय क्रिकेट के अहम स्तंभ बन चुके हैं। ऐसे में वैभव को उनसे आगे रखना इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में वह भारतीय क्रिकेट का बड़ा चेहरा बन सकता है।
तकनीक और मानसिकता — वैभव की असली ताकत
वैभव की बल्लेबाज़ी की सबसे बड़ी खासियत उसकी तकनीकी मजबूती और मानसिक संतुलन है। वह बिना घबराए, बिना जल्दबाज़ी किए गेंदबाज़ों को पढ़ता है और फिर अपने शॉट्स का चयन करता है। आज के टी20 युग में जहां आक्रामकता को ही सफलता का पैमाना माना जाता है, वहां वैभव का यह शांत और सोच-समझकर खेलने का अंदाज़ उसे बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाता है।
क्रिकेट विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की परिपक्वता आमतौर पर वर्षों के अनुभव के बाद आती है, लेकिन वैभव ने इतनी कम उम्र में ही इसे हासिल कर लिया है। यही कारण है कि उसे “खतरनाक” कहा जा रहा है—क्योंकि वह जोखिम लिए बिना मैच पर पकड़ बना लेता है।
भारतीय क्रिकेट को मिल सकता है अगला बड़ा सितारा
अगर वैभव इसी तरह अपने खेल को निखारता रहा, तो वह आने वाले वर्षों में भारतीय क्रिकेट के लिए बड़ी संपत्ति साबित हो सकता है। सहवाग जैसे दिग्गज की नजर में आना और उनसे इतनी बड़ी तारीफ पाना इस बात का संकेत है कि क्रिकेट जगत इस युवा खिलाड़ी पर गंभीरता से ध्यान दे रहा है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वैभव आने वाले मैचों और टूर्नामेंट्स में अपने प्रदर्शन को कैसे बनाए रखता है। लेकिन एक बात साफ है—भारतीय क्रिकेट को एक ऐसा खिलाड़ी मिल गया है, जो शोर नहीं करता, लेकिन मैदान पर खामोशी से मैच अपने नाम कर लेता है।




