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EMI में राहत नहीं, RBI ने रेपो रेट 5.5% पर बरकरार रखा

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नई दिल्ली। 6 अगस्त 2025

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने आज वित्त वर्ष 2025-26 की मौजूदा तिमाही के लिए अपनी समीक्षा बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए रेपो रेट में किसी भी प्रकार की कटौती नहीं की है। रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 5.5 फीसदी पर स्थिर बनाए रखने का निर्णय लिया है, जो कि आम जनता, खासकर लोन लेने वाले ग्राहकों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। इसका सीधा अर्थ यह है कि होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन लेने वाले लोगों की मासिक किस्त यानी EMI में फिलहाल कोई राहत नहीं मिलेगी।

दरअसल, रेपो रेट वह दर होती है जिस पर केंद्रीय बैंक यानी आरबीआई देश के वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण उपलब्ध कराता है। जब रेपो रेट घटाई जाती है तो बैंक कम दर पर कर्ज लेते हैं और इसका लाभ ग्राहकों को सस्ते लोन के रूप में मिलता है। इसके विपरीत जब रेपो रेट को स्थिर रखा जाता है या बढ़ाया जाता है, तो बैंकों की कर्ज लागत में कमी नहीं आती और वे लोन की ब्याज दरों में बदलाव नहीं करते। यही वजह है कि इस बार की घोषणा से उम्मीद लगाए बैठे लोनधारकों को कोई फायदा नहीं होगा और उनकी ईएमआई पूर्ववत ही बनी रहेगी।

रिजर्व बैंक ने यह फैसला महंगाई को नियंत्रण में रखने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया है। RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने इस निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि हाल के महीनों में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, जिससे महंगाई पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में रेपो रेट में कटौती करना अभी सही नहीं होगा, क्योंकि इससे बाजार में तरलता बढ़ सकती है और महंगाई को काबू में रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

ब्याज दरों में स्थिरता बनाए रखने के इस फैसले का असर न केवल व्यक्तिगत लोन लेने वालों पर पड़ेगा, बल्कि यह रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर जैसे क्षेत्रों के लिए भी थोड़ी निराशा का कारण बन सकता है, जहां ब्याज दरों की थोड़ी सी कटौती से मांग में अच्छी-खासी बढ़ोतरी देखी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ महीनों तक रेपो रेट में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा, जब तक कि महंगाई की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ जाती और वैश्विक आर्थिक संकेतक सकारात्मक नहीं हो जाते।

इस बीच बैंकिंग विशेषज्ञों ने यह भी संकेत दिए हैं कि रेपो रेट में स्थिरता का यह निर्णय मौद्रिक संतुलन और वित्तीय अनुशासन को बनाए रखने की दिशा में एक सही कदम हो सकता है, हालांकि इसका तात्कालिक लाभ आम जनता को नहीं मिलेगा। अब निगाहें आने वाली तिमाही की मौद्रिक नीति बैठक पर टिकी रहेंगी, जहां यदि महंगाई दर में गिरावट आती है तो RBI फिर से दरों की समीक्षा कर सकता है।

लोनधारकों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने बैंक या वित्तीय संस्थान से संपर्क कर अपनी लोन शर्तों की समीक्षा करें और यदि संभव हो तो सस्ती ब्याज दर वाले विकल्पों पर विचार करें। वहीं निवेशकों को उम्मीद है कि फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और अन्य बचत योजनाओं पर मिलने वाला ब्याज दर यथावत रहेगा, जिससे बचतकर्ताओं को थोड़ी राहत मिल सकती है।

फिलहाल, रेपो रेट को 5.5% पर स्थिर रखने के इस निर्णय ने यह साफ कर दिया है कि रिजर्व बैंक महंगाई के जोखिमों को लेकर बेहद सतर्क है और आर्थिक विकास के साथ-साथ मूल्य स्थिरता को प्राथमिकता देने की अपनी नीति पर कायम है।

 

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