नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट 13 अक्टूबर 2025
भारत और कनाडा के बीच हाल के वर्षों में तनावपूर्ण रहे कूटनीतिक रिश्ते अब नए सिरे से सुधार की दिशा में बढ़ते नज़र आ रहे हैं। कनाडा की भारतीय मूल की रक्षा मंत्री अनीता आनंद रविवार से नई दिल्ली की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं, जिसके दौरान दोनों देश व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा के क्षेत्रों में रणनीतिक सहयोग का ढांचा (Strategic Cooperation Framework) तैयार करने पर विचार करेंगे।
यह अनीता आनंद की राजनीति में आने के बाद भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है। अपनी यात्रा के दौरान वे भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात करेंगी। चर्चाओं का मुख्य फोकस व्यापार विविधीकरण, ऊर्जा परिवर्तन और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग पर रहेगा।
कनाडा के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “दिल्ली में अपने प्रवास के दौरान मंत्री अनीता आनंद, भारतीय नेतृत्व के साथ ऐसे ढांचे पर चर्चा करेंगी जो दोनों देशों को व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा के क्षेत्रों में दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी की दिशा में ले जाएगा।”
आर्थिक साझेदारी पर फोकस
अनीता आनंद अपनी यात्रा के दौरान मुंबई भी जाएंगी, जहां वे भारतीय और कनाडाई कारोबारी नेताओं से मुलाकात करेंगी। उनका कार्यक्रम निवेश बढ़ाने, रोजगार सृजन करने और दोनों देशों के बीच आर्थिक अवसरों का विस्तार करने पर केंद्रित रहेगा। कनाडा सरकार ने कहा है कि वह भारत के साथ कृषि, ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक व्यापारिक संबंधों को और मजबूत बनाना चाहती है।
वर्तमान में भारत, कनाडा का सातवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है — यह तथ्य इस यात्रा को और भी अहम बनाता है।
अनीता आनंद ने रवाना होने से पहले कहा, “इंडो-पैसिफिक रणनीति के अनुरूप, कनाडा अब इस क्षेत्र के देशों के लिए एक विश्वसनीय और भरोसेमंद साझेदार बनने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। भारत हमारे लिए इस प्रयास का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है।”
तनाव के बाद रिश्तों में पिघलाव का संकेत
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत-कनाडा के रिश्ते धीरे-धीरे पिघलने की प्रक्रिया में हैं। वर्ष 2024 और 2025 के बीच दोनों देशों के बीच रिश्तों में भारी ठंडक तब आई थी जब कनाडा ने अपने यहां मारे गए खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय अधिकारियों की संलिप्तता का आरोप लगाया था — जिसे भारत ने “पूरी तरह झूठा और बेबुनियाद” करार दिया था।
लेकिन अगस्त 2025 में दोनों देशों द्वारा नए हाई कमिश्नरों की नियुक्ति ने इस दिशा में सुधार का संकेत दिया था। अब अनीता आनंद की यह यात्रा उस कूटनीतिक संवाद को पुनर्जीवित करने का ठोस कदम मानी जा रही है।
इंडो-पैसिफिक रणनीति में भारत की अहम भूमिका
कनाडा ने हाल ही में अपनी इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटेजी (Indo-Pacific Strategy) को फिर से परिभाषित किया है, जिसमें भारत को प्रमुख भागीदार के रूप में चिन्हित किया गया है। इस नीति का उद्देश्य चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करते हुए भारत जैसे लोकतांत्रिक और आर्थिक रूप से उभरते देशों के साथ सुरक्षा, ऊर्जा और व्यापारिक संबंधों को मज़बूत करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अनीता आनंद की यह यात्रा नया भरोसा और संवाद का रास्ता खोल सकती है, खासकर तब जब दोनों देशों के बीच शिक्षा, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा और प्रवासी भारतीयों से जुड़े मुद्दे भी तेजी से बढ़ रहे हैं।
कनाडा की भारतीय मूल की रक्षा मंत्री अनीता आनंद का भारत आना केवल एक राजनयिक यात्रा नहीं, बल्कि विश्व राजनीति में बदलते समीकरणों का संकेत भी है — जिसमें भारत अब सिर्फ़ साझेदार नहीं, बल्कि निर्णायक शक्ति के रूप में उभर रहा है।




