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बांग्लादेश सियासत में नया तूफान : खालिदा की पोती ज़ायमा रहमान

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एबीसी डेस्क | 27 दिसंबर 2025

बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर करवट लेती दिख रही है। लंबे समय से सत्ता संघर्ष, आंदोलन और राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहे देश में अब एक नया नाम चर्चाओं के केंद्र में है— जायमा रहमान। यह नाम सिर्फ एक युवा महिला का नहीं, बल्कि उस राजनीतिक विरासत का है, जिसने दशकों तक बांग्लादेश की राजनीति की दिशा तय की। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की पोती और बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान की बेटी जायमा की वापसी को कई लोग आने वाले सियासी बदलावों का संकेत मान रहे हैं।

जायमा रहमान ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती हैं, जहां राजनीति सिर्फ पेशा नहीं बल्कि विरासत रही है। उनके दादा जियाउर रहमान बांग्लादेश के राष्ट्रपति रहे, दादी खालिदा जिया देश की सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों में गिनी जाती हैं और पिता तारिक रहमान लंबे समय से बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के सबसे बड़े रणनीतिक चेहरों में शामिल हैं। ऐसे में जायमा का नाम सामने आना स्वाभाविक रूप से देश की राजनीति में हलचल पैदा करता है।

जायमा का बचपन बांग्लादेश में बीता, लेकिन 2008 के बाद उनका जीवन लंदन में गुजरा। राजनीतिक उथल-पुथल और कानूनी मामलों के चलते जब तारिक रहमान परिवार के साथ ब्रिटेन चले गए, तब जायमा भी अपनी मां डॉ. जुबैदा रहमान के साथ विदेश चली गईं। वहीं उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल की और कानून के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। वे लंदन की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई कर बैरिस्टर बनीं और पेशेवर तौर पर वकालत भी की। उनकी यह शैक्षणिक और पेशेवर पृष्ठभूमि उन्हें पारंपरिक राजनीति से अलग, एक आधुनिक और शिक्षित चेहरे के रूप में पेश करती है।

हाल ही में जायमा रहमान एक बार फिर सुर्खियों में तब आईं, जब वे अपने पिता के साथ 17 साल बाद बांग्लादेश लौटीं। यह वापसी सिर्फ एक पारिवारिक घटना नहीं थी, बल्कि इसे बीएनपी की राजनीति में संभावित पुनर्जागरण के रूप में देखा गया। एयरपोर्ट से लेकर सड़कों तक समर्थकों की निगाहें सिर्फ तारिक रहमान पर नहीं, बल्कि उनके साथ मौजूद जायमा पर भी टिकी थीं। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें और संदेश तेजी से वायरल हुए, जिसने यह सवाल और गहरा कर दिया—क्या जायमा अब राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने जा रही हैं?

हालांकि जायमा रहमान ने अभी तक औपचारिक रूप से राजनीति में कदम रखने का ऐलान नहीं किया है, न ही किसी चुनाव या पद की घोषणा की है। लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि बीएनपी आने वाले समय में उन्हें एक युवा चेहरे और नई पीढ़ी के प्रतिनिधि के रूप में आगे ला सकती है। खासकर ऐसे समय में, जब बांग्लादेश की राजनीति में युवा मतदाता बदलाव और नए नेतृत्व की तलाश में हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जायमा की मौजूदगी सिर्फ पारिवारिक विरासत का विस्तार नहीं है, बल्कि यह बीएनपी की रणनीति का हिस्सा भी हो सकती है। शिक्षित, अंतरराष्ट्रीय अनुभव रखने वाली और विवादों से फिलहाल दूर एक युवा नेता के रूप में जायमा पार्टी की छवि को नया रंग दे सकती हैं। साथ ही, खालिदा जिया और तारिक रहमान की विरासत के कारण उनका नाम अपने-आप में एक मजबूत राजनीतिक पूंजी है।

आज बांग्लादेश जिस मोड़ पर खड़ा है, वहां हर नया चेहरा उम्मीद और आशंका—दोनों लेकर आता है। जायमा रहमान भी उसी उम्मीद का प्रतीक बनकर उभर रही हैं। क्या वे सच में बांग्लादेश की राजनीति में नया तूफान लाएंगी या फिलहाल यह सिर्फ अटकलों का दौर है—इसका जवाब आने वाला समय देगा। लेकिन इतना तय है कि जायमा रहमान का नाम अब बांग्लादेश की सियासत में अनदेखा नहीं किया जा सकता।

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