अमनप्रीत सिंह । चंडीगढ़ 9 दिसंबर 2025
पंजाब की राजनीति आज उस समय गरम हो गई जब पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) ने एक आधिकारिक आदेश जारी करते हुए पूर्व राज्यसभा सदस्य और नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह फैसला प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग द्वारा हस्ताक्षरित आदेश के साथ सार्वजनिक किया गया, जिसमें साफ लिखा गया कि उनका निलंबन तुरंत लागू होता है। यह कदम कांग्रेस हाईकमान की उस नाराज़गी का प्रत्यक्ष परिणाम माना जा रहा है जो पिछले दिनों नवजोत कौर द्वारा लगाए गए विवादित आरोपों के बाद लगातार बढ़ रही थी।
कुछ दिन पहले नवजोत कौर सिद्धू ने आरोप लगाया था कि पंजाब में मुख्यमंत्री की कुर्सी 500 करोड़ रुपये में बेची जाती है, और कांग्रेस नेतृत्व भ्रष्टाचार में लिप्त है। यह बयान न केवल पार्टी की छवि पर सीधा प्रहार था, बल्कि चुनावी वर्ष में कांग्रेस की रणनीति, नेतृत्व और विश्वसनीयता को गहरा नुकसान पहुंचाने वाला था। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली हाईकमान इस आरोप से बेहद नाराज़ था और इसे पार्टी-विरोधी गतिविधि मानते हुए तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की गई थी। पार्टी नेताओं ने भी खुले तौर पर कहा कि इस तरह के आरोप कांग्रेस की परंपरा नहीं बल्कि बीजेपी के राजनीतिक व्यवहार की पहचान हैं, जहाँ धन, दबाव और सत्ता सौदों के आरोप पहले से ही चर्चा में रहते हैं।
पंजाब कांग्रेस के आंतरिक सूत्रों का मानना है कि नवजोत कौर सिद्धू का बयान कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष पैदा कर रहा था, क्योंकि इस आरोप से पार्टी की ईमानदार छवि पर प्रश्नचिह्न लग गया था। कार्यकर्ताओं और जिला स्तर के नेतृत्व ने लगातार प्रदेश नेतृत्व पर कठोर कदम उठाने का दबाव बनाया था। कई वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि पार्टी के भीतर रहकर पार्टी को बदनाम करने की यह परंपरा बर्दाश्त नहीं की जा सकती। इसी कारण आज PPCC ने आधिकारिक आदेश जारी कर दिया, जिससे पार्टी के भीतर एक स्पष्ट संदेश गया कि अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है।
कांग्रेस के इस कदम के बाद पार्टी के कार्यकर्ताओं में राहत की भावना देखी जा रही है। उनका कहना है कि नवजोत कौर सिद्धू द्वारा लगाए गए आरोप गंभीर थे और विरोधियों को कांग्रेस पर हमला करने का मौका दे रहे थे। कई नेताओं ने इसे “पार्टी विरोधी गतिविधि” और “स्वयं को सुर्खियों में रखने का प्रयास” बताया। दूसरी ओर, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में सिद्धू परिवार और कांग्रेस के बीच संबंध और ज्यादा तनावपूर्ण हो सकते हैं, जिससे पंजाब की राजनीति में नई हलचल होना तय है।
यह निलंबन केवल एक अनुशासनात्मक निर्णय नहीं, बल्कि इस संदेश का प्रतीक है कि कांग्रेस हाईकमान किसी भी स्थिति में अपनी पार्टी लाइन से विचलन और सार्वजनिक बदनाम करने वाली राजनीति को सहन नहीं करेगा। अब देखना होगा कि नवजोत सिंह सिद्धू इस फैसले पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं, क्योंकि पंजाब की राजनीति में उनकी भूमिका और प्रभाव अभी भी काफी महत्वपूर्ण है।





