एबीसी नेशनल न्यूज | देहरादून | 14 मार्च 2026
उत्तराखंड में दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों ने केंद्र सरकार की प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) संबंधी प्रक्रिया को चुनौती देते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अधिकारियों का कहना है कि उन्हें ऐसे पद पर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए भेजा जा रहा है, जो उनके मौजूदा रैंक से नीचे का है, जबकि उन्होंने इसके लिए आवेदन भी नहीं किया था।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अधिकारियों की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि “मी लॉर्ड, हमने इसके लिए आवेदन तक नहीं किया था, फिर भी हमें निचले स्तर के पद पर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए भेजा जा रहा है।”
याचिका में कहा गया है कि भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों को उनके समकक्ष या उच्च स्तर के पदों पर ही प्रतिनियुक्ति दी जानी चाहिए। इससे नीचे के पद पर भेजना सेवा नियमों और कैडर की गरिमा के खिलाफ है।
अधिकारियों का आरोप है कि संबंधित आदेश में न तो उनकी सहमति ली गई और न ही सेवा नियमों का पालन किया गया। इस कारण उन्होंने अदालत से हस्तक्षेप की मांग की है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि इस तरह की प्रतिनियुक्ति से न केवल अधिकारियों के अधिकार प्रभावित होते हैं, बल्कि इससे सेवा संरचना और पदानुक्रम पर भी सवाल खड़े होते हैं।
हाईकोर्ट ने मामले को सुनने के बाद राज्य और केंद्र सरकार से जवाब तलब करते हुए अगली सुनवाई की तारीख तय की है। अदालत ने यह भी पूछा है कि यदि अधिकारियों ने आवेदन नहीं किया था तो उन्हें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए क्यों चुना गया।
मामले को प्रशासनिक सेवा में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की प्रक्रिया और वरिष्ठता के सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण विवाद माना जा रहा है। अब अदालत के अगले फैसले पर सभी की नजरें टिकी हैं।




