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मुंबई CNG ब्रेकडाउन: पाइपलाइन फटी, शहर ठप—ऑटो-टैक्सी और यात्रियों की बड़ी मुश्किल

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अमरनाथ कुमार | मुंबई 18 नवंबर 2025

मुंबई महानगर आज ऐसे ईंधन संकट में फंस गया है जिसने लाखों यात्रियों, ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और कैब चालकों के जीवन को ठहराव की स्थिति में ला दिया है। यह संकट उस समय शुरू हुआ जब RCF (Rashtriya Chemicals & Fertilisers) परिसर के पास थर्ड-पार्टी निर्माण कार्य के दौरान एक मुख्य गैस पाइपलाइन को भारी नुकसान पहुँचा, जो GAIL द्वारा संचालित है और Mahanagar Gas Limited (MGL) के वाडाला सिटी-गेट स्टेशन को गैस सप्लाई करती है। इसके चलते मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई में CNG की सप्लाई अचानक चरमरा गई—और शहर की पूरी परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो गई।

स्थिति का अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि MGL ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि 389 CNG स्टेशनों में से लगभग 225 ही किसी तरह काम कर पा रहे हैं, वह भी बेहद कम दबाव पर। जिन स्टेशनों पर गैस उपलब्ध है, वहाँ सामान्यतः 15–20 मिनट में होने वाली भराई में अब 3–4 घंटे से अधिक इंतज़ार लग रहा है। सुबह से देर रात तक कतारों में खड़े ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों का कहना है कि वे पूरे दिन में मुश्किल से दो या तीन बार ही गैस भर पा रहे हैं, जिससे उनकी कमाई लगभग आधी हो चुकी है।

सबसे ज़्यादा प्रभावित वे ड्राइवर हैं जिनकी रोज़ की मजदूरी पूरी तरह से उनकी गाड़ी चलाने पर निर्भर है। कई चालकों ने बताया कि वे भोर से लाइन में लगे हैं लेकिन फिर भी गैस नहीं मिल पा रही। इसी वजह से शहर में ऑटो और टैक्सी की संख्या कम हो गई, और जहाँ उपलब्ध हैं वहाँ मांग बढ़ने से यात्रियों को किराए में भारी बढ़ोतरी झेलनी पड़ रही है। कई यात्रियों ने शिकायत की कि जहाँ सामान्यतः ₹100–₹120 का किराया लगता था, वहाँ ड्राइवर ₹200–₹300 माँग रहे थे। कुछ रूट्स पर तो किराए में 3–5 गुना तक उछाल देखने को मिला।

यह संकट केवल ऑटो-टैक्सियों तक सीमित नहीं है। BEST ने चेतावनी जारी की कि उसकी CNG-चलित बसें भी प्रभावित हो सकती हैं। कुछ डिपो में सप्लाई कम होने से रूट कम करने पड़े और कई बसें देर से चलीं। इससे कार्यालय आने-जाने वाले यात्रियों, स्कूली छात्रों और बुजुर्गों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। स्कूल बस ऑपरेटरों ने भी कहा कि गैस उपलब्ध न होने के कारण उन्हें सेवाएँ घटानी पड़ीं और कई जगह बच्चों को निजी वाहनों में भेजना पड़ा, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा।

इस हादसे ने एक बार फिर मुंबई की ईंधन निर्भरता और बुनियादी ढाँचे की नाज़ुकता को उजागर कर दिया है। पूरे मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में लगभग 5 लाख से अधिक वाहन CNG पर निर्भर हैं—ऐसे में अचानक हुई सप्लाई बाधा ने पूरे शहर की गतिशीलता पर चोट की है। विशेषज्ञों का कहना है कि मुंबई जैसे शहर में बैक-अप गैस नेटवर्क, वैकल्पिक पाइपलाइन रूट और आपातकालीन सप्लाई प्रबंधन की प्रणाली मजबूत होनी चाहिए, ताकि एकल बिंदु पर हुई गलती से पूरा महानगर संकट में न चले जाए।

MGL ने कहा है कि घरेलू PNG उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है और वे जल्दी से जल्दी गैस आपूर्ति बहाल करने पर काम कर रहे हैं। उद्योगों और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को अस्थायी रूप से वैकल्पिक ईंधन अपनाने की सलाह दी गई है। पूर्ण बहाली में अभी 24–48 घंटे का समय लग सकता है। इस बीच, शहर में समस्या जस की तस बनी हुई है — न ऑटो मिल रहे हैं, न टैक्सी, और जो मिल रहे हैं वे महंगे पड़ रहे हैं।

कुल मिलाकर, यह संकट न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है, बल्कि भविष्य के लिए यह सबक भी देता है कि मुंबई जैसे महानगर में ईंधन सप्लाई सिस्टम को मजबूत करना केवल सुविधा नहीं, बल्कि शहरी जीवन की जीवनरेखा है।

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