अखलाक अहमद | एबीसी नेशनल न्यूज | तेल अवीव | 25 फरवरी 2026
तनावपूर्ण पश्चिम एशिया के बीच शुरू हुआ दौरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दो दिवसीय इज़राइल दौरा ऐसे समय में शुरू हुआ है जब पश्चिम एशिया का सुरक्षा परिदृश्य असाधारण रूप से संवेदनशील बना हुआ है। गाज़ा युद्ध, समुद्री सुरक्षा पर बढ़ते खतरे और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित सैन्य टकराव की आशंकाओं ने पूरे क्षेत्र में रणनीतिक अनिश्चितता पैदा कर दी है। इसी पृष्ठभूमि में यह यात्रा सामान्य कूटनीतिक कार्यक्रम से आगे बढ़कर व्यापक सुरक्षा, स्थिरता और शक्ति संतुलन से जुड़ा अहम घटनाक्रम बन गई है। भारत और इज़राइल दोनों इस दौरे को बदलते क्षेत्रीय समीकरणों के बीच सहयोग को गहरा करने और रणनीतिक संवाद को मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रहे हैं।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग वार्ता का केंद्र
मोदी और नेतन्याहू के बीच होने वाली बातचीत में रक्षा और सुरक्षा सहयोग सबसे प्रमुख मुद्दा रहने की संभावना है। मिसाइल रक्षा प्रणाली, ड्रोन तकनीक, सीमा निगरानी उपकरण और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में मौजूदा परियोजनाओं की समीक्षा तथा नए सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हो सकती है। भारत इज़राइल को एक भरोसेमंद रक्षा तकनीकी साझेदार मानता रहा है और संयुक्त उत्पादन, तकनीक हस्तांतरण तथा खुफिया सहयोग को गहरा करने की दिशा में ठोस प्रगति इस वार्ता का महत्वपूर्ण लक्ष्य माना जा रहा है। आतंकवाद-रोधी रणनीति और शहरी सुरक्षा मॉडल पर अनुभव साझा करना भी एजेंडा का हिस्सा बन सकता है।
टेक्नोलॉजी, कृषि और जल प्रबंधन में सहयोग का विस्तार
रक्षा सहयोग के साथ-साथ हाई-टेक सेक्टर, स्टार्ट-अप इकोसिस्टम, कृषि नवाचार और जल प्रबंधन में साझेदारी को बढ़ाने पर भी ध्यान रहने की उम्मीद है। भारत इज़राइल की जल संरक्षण और डीसैलिनेशन तकनीक को अपने जल संकटग्रस्त क्षेत्रों में लागू करने के विकल्प तलाश रहा है, जबकि स्मार्ट खेती और एग्री-टेक परियोजनाओं के विस्तार पर भी चर्चा संभव है। सेमीकंडक्टर, साइबर टेक्नोलॉजी और नवाचार आधारित निवेश के जरिए आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने की कोशिश इस वार्ता का महत्वपूर्ण पहलू मानी जा रही है।
व्यापार और निवेश को नई गति देने की कोशिश
दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने और संभावित फ्री-ट्रेड एग्रीमेंट की दिशा में प्रगति पर भी बातचीत की संभावना है। भारत अब रक्षा आयात पर निर्भरता घटाते हुए संयुक्त उत्पादन, स्टार्ट-अप निवेश और उच्च मूल्य मैन्युफैक्चरिंग सहयोग को प्राथमिकता देना चाहता है। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, फिनटेक, ऊर्जा और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में निजी निवेश को प्रोत्साहन देने से आर्थिक संबंधों को अधिक संतुलित और दीर्घकालिक बनाने की रणनीति सामने आ सकती है।
गाज़ा युद्ध और क्षेत्रीय तनाव पर कूटनीतिक संवाद
गाज़ा में जारी संघर्ष और मानवीय संकट इस दौरे की संवेदनशील पृष्ठभूमि बना हुआ है, इसलिए वार्ता में इस मुद्दे पर चर्चा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। भारत की नीति आतंकवाद की निंदा के साथ नागरिकों की सुरक्षा और मानवीय सहायता पर जोर देने की रही है, जिसे दोहराया जा सकता है। साथ ही अमेरिका-ईरान तनाव, समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और संघर्ष के विस्तार को रोकने जैसे मुद्दों पर भी रणनीतिक संवाद होने की उम्मीद है, क्योंकि इन घटनाक्रमों का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर पड़ सकता है।
भारत की संतुलित विदेश नीति की परीक्षा
यह दौरा भारत की उस संतुलित विदेश नीति की झलक भी देता है जिसमें इज़राइल के साथ मजबूत रणनीतिक सहयोग के साथ-साथ अरब देशों और ईरान के साथ पारंपरिक संबंधों को बनाए रखने पर जोर दिया जाता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा, प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा और व्यापारिक हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है। यही कारण है कि मोदी का यह दौरा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं बल्कि क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने और भारत की बहु-सहयोगी कूटनीतिक रणनीति की महत्वपूर्ण परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।




