एबीसी नेशनल न्यूज | तिरुवनंतपुरम | 6 मार्च 2026
मजबूरियां होंगी तभी बेशर्मी! 30 दिन की छूट पर नाच रही मोदी सरकार : कांग्रेस
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने गुरुवार को रूस से जुड़ी जनरल लाइसेंस 133 जारी करते हुए भारत को एक अस्थायी 30 दिनों की छूट दी है, जिसके तहत भारतीय रिफाइनरियां 5 मार्च 2026 तक जहाजों पर लोड हो चुके रूसी मूल के क्रूड ऑयल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की खरीद, डिलीवरी और ऑफलोडिंग कर सकेंगी। यह छूट 4 अप्रैल 2026 तक वैध है और सिर्फ उन कार्गो पर लागू होती है जो पहले से समुद्र में फंसे हुए हैं, ताकि ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग रूट्स बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में बड़ा संकट न आए। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने एक्स पर पोस्ट करते हुए इसे “तेल को वैश्विक बाजार में बहते रहने” के लिए एक जानबूझकर छोटी अवधि का कदम बताया, जो रूस को ज्यादा वित्तीय फायदा नहीं पहुंचाएगा और भारत को अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाने की उम्मीद जताई। लेकिन इस घोषणा ने भारत में राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। बीजेपी ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “रणनीतिक तेल कूटनीति” की बड़ी जीत करार दिया और कांग्रेस व राहुल गांधी पर जमकर हमला बोला, इसे “एंटी-इंडिया नैरेटिव” का मुंह बंद करने वाला तमाचा बताया। वहीं कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि एक संप्रभु देश जैसे भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अमेरिका से “अनुमति” या “30 दिनों की भीख” मांगनी पड़ रही है, जो देश की आजादी और स्वतंत्र फैसलों पर बड़ा सवाल है।
खेड़ा ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि कल उन्होंने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी से रूस से तेल खरीद पर भारत की स्थिति स्पष्ट करने को कहा था, लेकिन जवाब अमेरिका से आया। उन्होंने व्यंग्य किया कि सरकार में “एप्स्टीन के उल्लू” बैठे हैं जो दिन में सोते हैं और रात को जागते हैं, क्योंकि ये “एप्स्टीन स्टैंडर्ड टाइम (EST)” पर काम करते हैं—दिन में सवाल पूछो तो आधी रात जवाब मिलता है। खेड़ा ने कहा, अनुमति तो तब ली जाती है जब कोई बंधन या समझौता हो, बंधन तब होते हैं जब हस्ताक्षर हो चुके हों। क्या भारत-अमेरिका के बीच कोई ऐसा व्यापार समझौता हुआ है जिसके तहत हमारी ऊर्जा सुरक्षा अमेरिका की मर्जी पर टिकी है? उन्होंने इसे “140 करोड़ लोगों वाले देश की इज्जत” को 30 दिनों की छूट पर दांव पर लगाने जैसा बताया और कहा कि कुछ तो मजबूरियां रही होंगी, यूँ ही कोई बेशर्म नहीं होता।
कांग्रेस के अन्य नेताओं जैसे मनीष तिवारी, रणदीप सिंह सुरजेवाला और डीएमके नेता एमके स्टालिन ने भी मोदी सरकार पर “कंप्लीटली कम्प्रोमाइज्ड” होने का आरोप लगाया, कहा कि भारत अब “क्लाइंट स्टेट” बन गया है जहां ऊर्जा सुरक्षा भी वाशिंगटन की “मंजूरी” पर निर्भर है। केंद्र सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन इस मुद्दे ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है, खासकर जब ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष से क्रूड ऑयल की कीमतें आसमान छू रही हैं और भारत जैसे बड़े आयातक को वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी पड़ रही है।




