एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 25 फरवरी 2026
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हाल के दिनों में कुछ तस्वीरें और पोस्ट तेजी से वायरल हुईं, जिनमें दावा किया गया कि ये मणिपुर में हुए कथित ड्रोन हमले के दृश्य हैं। इन तस्वीरों के साथ डर और तनाव पैदा करने वाले संदेश भी साझा किए गए, जिससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई। हालांकि फैक्ट-चेक में यह दावा गलत पाया गया। जांच में स्पष्ट हुआ कि वायरल तस्वीरों का मणिपुर की किसी हालिया घटना से संबंध नहीं है और उन्हें गलत संदर्भ में साझा किया गया।
जांच में सामने आई सच्चाई
फैक्ट-चेक के दौरान तस्वीरों को रिवर्स सर्च और ओपन सोर्स जांच के जरिए परखा गया। इसमें पाया गया कि वायरल तस्वीरें पहले से इंटरनेट पर मौजूद थीं और म्यांमार के संघर्ष प्रभावित इलाकों से जुड़ी घटनाओं की थीं। यानी जिन तस्वीरों को मणिपुर के ड्रोन हमले का बताकर फैलाया जा रहा था, वे वास्तव में दूसरे देश की पुरानी घटनाओं से संबंधित निकलीं। इस तरह तस्वीरों को संदर्भ बदलकर पेश किया गया, जिससे भ्रामक माहौल बना।
गलत दावों से बढ़ता है तनाव
विशेषज्ञों का कहना है कि संवेदनशील क्षेत्रों से जुड़ी पुरानी तस्वीरों को नए घटनाक्रम से जोड़कर वायरल करना अफवाह फैलाने का एक आम तरीका बन गया है। इससे स्थानीय लोगों में डर और असुरक्षा की भावना पैदा होती है तथा स्थिति की गंभीरता को लेकर गलत धारणा बन सकती है। खासकर मणिपुर जैसे राज्य में, जहां पहले से तनावपूर्ण माहौल रहा है, ऐसी भ्रामक जानकारी स्थिति को और संवेदनशील बना सकती है।
सतर्क रहने की जरूरत
फैक्ट-चेक के बाद लोगों से अपील की गई है कि किसी भी तस्वीर, वीडियो या संदेश को बिना पुष्टि के साझा न करें। सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर सामग्री सही हो, यह जरूरी नहीं होता। किसी भी संवेदनशील खबर से जुड़े दावों को साझा करने से पहले विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है, ताकि अफवाह और गलत सूचना को फैलने से रोका जा सके।
जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल दौर में जागरूकता और जिम्मेदार व्यवहार बेहद जरूरी है। गलत जानकारी को रोकने में आम नागरिकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी पोस्ट पर संदेह हो तो उसे साझा करने के बजाय सत्यापन करना और जरूरत पड़ने पर रिपोर्ट करना बेहतर विकल्प है। यही सतर्कता समाज में भरोसा और शांति बनाए रखने में मदद करती है।




