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मानसिक दिवालियापन: ताइवानी राष्ट्रपति पर चीन ने लगाया ‘वेश्यावृत्ति’ का आरोप, ट्रंप और अमेरिका को घसीटते हुए भड़का बीजिंग

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बीजिंग, 9 अक्टूबर 2025

क्या मानसिक दिवालियापन इस हद तक पहुंच सकता है कि कोई देश किसी दूसरे देश के राष्ट्रपति को तीसरे देश की वैश्या बता दे? यह शर्मनाक बात राजनीति और कूटनीति के गिरते स्तर को दर्शाती है। चीन ने ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-टे (Lai Ching-te) पर अशोभनीय हमला करते हुए उन्हें “राजनीतिक वेश्यावृत्ति में लिप्त” कहा है। यह बयान तब आया जब ताइवान के राष्ट्रपति ने एक इंटरव्यू में अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ करते हुए कहा था कि “ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए।”

इस बयान पर चीन भड़क गया और कहा कि ताइवान राष्ट्रपति “अमेरिका की गोद में बैठकर देश बेचने की कोशिश” कर रहे हैं। बीजिंग के विदेश मंत्रालय ने कहा कि “लाई चिंग-टे खुद को एक स्वतंत्र राष्ट्र का नेता बताते हैं, लेकिन व्यवहार में वे अमेरिकी एजेंट की तरह काम कर रहे हैं। यह राजनीतिक और नैतिक वेश्यावृत्ति है।”

चीन ने अमेरिका पर भी हमला बोला और आरोप लगाया कि “वॉशिंगटन ताइवान को हथियारों से लैस कर चीन की क्षेत्रीय अखंडता को तोड़ने की साजिश रच रहा है।” चीनी मीडिया ने इसे “पश्चिमी हस्तक्षेप की घटिया मिसाल” बताते हुए कहा कि अगर अमेरिका ने ताइवान के साथ सैन्य समझौते बढ़ाए तो परिणाम विनाशकारी होंगे।

ताइवान की ओर से प्रतिक्रिया आई है कि यह चीन की “घबराहट की भाषा” है। ताइपेई प्रशासन ने कहा कि “लोकतंत्र की राह पर चलने वाले राष्ट्र को डराने की कोशिश चीन का पुराना हथकंडा है, लेकिन अब ताइवान झुकेगा नहीं।”

 यह बयान चीन और ताइवान के बीच तनाव को युद्ध की दहलीज़ तक पहुँचा सकता है। बीजिंग पहले ही ताइवान के चारों ओर 12 युद्धपोत और 30 लड़ाकू विमान तैनात कर चुका है। वहीं, अमेरिका ने कहा है कि वह “ताइवान की रक्षा में प्रतिबद्ध” है और उसकी सुरक्षा “अमेरिका की रणनीतिक प्राथमिकता” बनी रहेगी।

ट्रंप का नाम इस विवाद में आने से वाशिंगटन में भी बहस छिड़ गई है। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में कहा था कि अगर वे सत्ता में लौटते हैं तो चीन को “उसकी जगह दिखा देंगे।” ट्रंप के इस बयान पर चीन ने कहा — “एक पराजित राजनेता की बातें चीन की नीति को प्रभावित नहीं कर सकतीं।”

कुल मिलाकर, यह विवाद केवल बयानबाज़ी नहीं है — यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य टकराव के संकेत दे रहा है। चीन अब किसी भी “अमेरिकी उकसावे” पर जवाबी कार्रवाई की धमकी दे चुका है, जबकि ताइवान ने कहा है कि वह “लोकतांत्रिक गरिमा की रक्षा” करेगा — चाहे कीमत कुछ भी हो। दुनिया अब दहशत में यह सवाल पूछ रही है — क्या ताइवान जलडमरूमध्य में नई जंग की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है?

 

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