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मायावती ने की योगी की तारीफ, बीजेपी बोली धन्यवाद — क्या बदल रहा है यूपी का राजनीतिक समीकरण?

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लखनऊ 11 अक्टूबर 2025

मायावती की तारीफ पर बीजेपी का धन्यवाद – “बहनजी ने दिखाया बड़ा दिल”

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक अप्रत्याशित घटनाक्रम देखने को मिला जब बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने कांशीराम स्मारक स्थल और अन्य बहुजन प्रतीक स्थलों की अच्छी देखरेख की है तथा उनसे प्राप्त टिकट राशि को उन्हीं की मरम्मत और रखरखाव में लगाया जा रहा है। यह वही काम है जो उन्होंने अपने शासनकाल में शुरू किया था।

मायावती की इस टिप्पणी पर बीजेपी नेताओं ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। राज्य के मंत्री आसिम अरुण ने कहा, “बहनजी ने बड़ा दिल दिखाया है। यह मुख्यमंत्री योगी जी की कार्यशैली की ईमानदार सराहना है।”

बीजेपी ने इस बयान को “सकारात्मक राजनीति का उदाहरण” बताते हुए कहा कि विरोधी विचारधारा होने के बावजूद सच्चाई को स्वीकार करना परिपक्व लोकतंत्र की निशानी है।

सपा पर तीखा हमला, बीजेपी पर नरमी — मायावती का नया पैंतरा

जहां एक ओर मायावती ने बीजेपी सरकार की प्रशंसा की, वहीं उन्होंने अखिलेश यादव और सपा पर जबरदस्त हमला बोला। उन्होंने कहा कि सपा अब “दलितों की हितैषी नहीं रही” और PDA (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) का नारा सिर्फ दिखावे के लिए है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बसपा 2027 के विधानसभा चुनावों में किसी भी दल से गठबंधन नहीं करेगी और अपने दम पर चुनाव लड़ेगी।

मायावती का यह दोतरफा रवैया — सपा पर आक्रामक हमला और बीजेपी के प्रति सौम्य रुख — राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा का विषय बन गया है।

विश्लेषण — क्या यह ‘रणनीतिक प्रशंसा’ है या वास्तविक सौहार्द?

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि मायावती की यह टिप्पणी रणनीतिक संकेत हो सकती है। बीजेपी के साथ किसी “soft understanding” की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, विशेषकर तब जब 2024 के लोकसभा चुनावों में बसपा का प्रदर्शन कमजोर रहा और उसे अपने जनाधार को पुनः संगठित करने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह संभव है कि मायावती एक “मिडिल पाथ” अपना रही हों — एक तरफ दलित वोटबैंक को यह संदेश देना कि बीजेपी अब उनके प्रतीकों का सम्मान कर रही है, और दूसरी ओर सपा को कमजोर करना, ताकि बसपा फिर से “वैकल्पिक शक्ति” के रूप में उभर सके।

क्या बीजेपी–बसपा के बीच ‘समझदारी’ का संकेत है?

सपा ने इस पूरे घटनाक्रम को “छिपा हुआ गठबंधन” (Hidden Understanding) करार दिया है। सपा प्रवक्ताओं ने कहा कि बसपा का यह बयान बीजेपी को राजनीतिक तौर पर फायदा पहुंचाने वाला है।

दूसरी ओर, बीजेपी सूत्रों ने बताया कि यह महज पारस्परिक सम्मान का मामला है और इसे राजनीति से जोड़ना गलत होगा। हालांकि, यह सच है कि बीजेपी और बसपा दोनों को सपा के बढ़ते संगठन से चिंता है। इसीलिए मायावती का यह रुख दोनों दलों के लिए “साझा हित” का संकेत भी बन सकता है।

मायावती का बड़ा दिल या बड़ा खेल?

राजनीति में तारीफ कभी सिर्फ तारीफ नहीं होती — वह संदेश होती है। मायावती का यह बयान न सिर्फ बीजेपी के लिए एक “नैरेटिव बूस्टर” है बल्कि बसपा की ओर से विपक्षी खेमे को एक चेतावनी भी। यह कदम मायावती के राजनीतिक कौशल को दर्शाता है — वह हर बार चुप्पी में भी बड़ा संदेश दे देती हैं। बीजेपी ने जहां उनका धन्यवाद किया है, वहीं राजनीतिक पंडित अब यह सोचने पर मजबूर हैं कि क्या बहनजी का “बड़ा दिल” आगे चलकर “बड़ी डील” में बदलेगा?

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