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मनीष तिवारी का टैरिफ को लेकर ट्रंप की ‘धौंसपट्टी’ पर हमला, केंद्र से न झुकने की मांग की

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नई दिल्ली, 5 अगस्त 2025 | एचटी न्यूज डेस्क

ट्रंप की धमकी पर तिवारी का तीखा वार

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी पर तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसमें ट्रंप ने भारत पर रूस से ऊर्जा संबंधों को लेकर भारी टैरिफ लगाने की बात कही थी। संसद परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए तिवारी ने कहा, “अब समय आ गया है कि इस निरंतर चल रही अमेरिकी धौंस और धमकियों को चुनौती दी जाए। भारत सरकार को ‘रीढ़’ दिखाते हुए ट्रंप को करारा जवाब देना चाहिए।”

“ट्रंप की भाषा 140 करोड़ भारतीयों का अपमान”

मनीष तिवारी ने कहा कि ट्रंप के बयान भारत की गरिमा और आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा, “दुनिया के सबसे ताकतवर देश के राष्ट्रपति द्वारा इस प्रकार की घृणास्पद भाषा अंतरराष्ट्रीय संवाद को शर्मसार करती है। भारत सरकार को चाहिए कि वह साफ-साफ शब्दों में बताए कि राष्ट्रीय हित से कोई समझौता नहीं होगा।”

MEA का भी जोरदार पलटवार, बताया ‘दोहरे मापदंड’

मनीष तिवारी की टिप्पणी उस समय आई जब भारत सरकार ने भी सोमवार को अमेरिका और यूरोपीय संघ की आलोचना पर कड़ा जवाब दिया। विदेश मंत्रालय ने देर शाम बयान जारी कर कहा कि भारत को रूस से तेल आयात करने पर जिस तरह से निशाना बनाया जा रहा है, वह “अनुचित और अव्यवहारिक” है। मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका और यूरोप खुद रूस से व्यापार कर रहे हैं — ऊर्जा ही नहीं, बल्कि खनिज, मशीनरी, रसायन और स्टील जैसे कई क्षेत्रों में।

“भारत की जरूरतें मजबूरी हैं, अमेरिका की व्यापार नीति मुनाफाखोरी”

विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि भारत की रूस से तेल खरीद नीतिगत मजबूरी है, ताकि देश में ऊर्जा की कीमतें काबू में रहें। वहीं अमेरिका रूस से यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, पल्लाडियम और उर्वरक जैसे उत्पाद आयात कर रहा है, जिसे ‘राष्ट्रीय जरूरत’ नहीं कहा जा सकता। “भारत की व्यापार नीति भारतीय उपभोक्ताओं की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए है, न कि मुनाफा कमाने के लिए,” MEA ने जोड़ा।

कांग्रेस का सवाल: ‘एकतरफा नीति क्यों?’

कांग्रेस ने पूछा कि यदि यूरोप और अमेरिका रूस से व्यापार कर सकते हैं, तो भारत को क्यों रोका जा रहा है? मनीष तिवारी ने कहा कि ट्रंप की भाषा सिर्फ भारत नहीं, बल्कि संप्रभु राष्ट्रों की स्वतंत्र विदेश नीति पर हमला है। उन्होंने कहा, “ट्रंप की धमकी को उसी की भाषा में जवाब देने का समय आ गया है।”

ट्रंप का विवादित बयान

ट्रंप ने हाल ही में एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि भारत रूस से भारी मात्रा में तेल खरीद रहा है और उसका बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में फिर से बेचकर मुनाफा कमा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत को फर्क नहीं पड़ता कि रूस की ‘वॉर मशीन’ से यूक्रेन में कितने लोग मारे जा रहे हैं।

राजनीति या राष्ट्रहित?

ट्रंप के बयानों और भारत सरकार के जवाब ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पश्चिमी देशों की नीतियां निष्पक्ष हैं या सिर्फ अपने हितों की पूर्ति का माध्यम? मनीष तिवारी के अनुसार, भारत को अब यह स्पष्ट कर देना चाहिए कि वह किसी की कठपुतली नहीं है और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि रहेगा।

मनीष तिवारी की टिप्पणी और विदेश मंत्रालय की तीव्र प्रतिक्रिया यह संकेत दे रही है कि भारत अब किसी भी ‘वैश्विक धौंस’ को चुपचाप सहने वाला देश नहीं रहा। यह केवल एक व्यापारिक विवाद नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक आत्मनिर्भरता और रणनीतिक स्वायत्तता का संदेश है।

 

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