एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 23 फरवरी 2026
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर के ताजा बयान ने पार्टी और विपक्षी INDIA गठबंधन की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अय्यर ने गठबंधन के नेतृत्व पर टिप्पणी करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अधिक प्रभावी और मजबूत नेता बताया, जिसे राहुल गांधी के नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष सवाल के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक हलकों में इस बयान को ऐसे समय में आया संवेदनशील संकेत माना जा रहा है, जब विपक्ष 2026–27 की चुनावी रणनीति के बीच एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर रहा है। कांग्रेस के भीतर भी अय्यर की टिप्पणी को लेकर असहजता की चर्चा है, हालांकि पार्टी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया फिलहाल सीमित रही है।
विवादित बयानों का पुराना रिकॉर्ड फिर चर्चा में
अय्यर के इस बयान के साथ उनका पुराना विवादित राजनीतिक रिकॉर्ड भी फिर सुर्खियों में आ गया है। विश्लेषकों का मानना है कि उनके कुछ बयान चुनावी समय में कांग्रेस के लिए नुकसानदेह साबित हुए थे।
2014 लोकसभा चुनाव से पहले अय्यर ने नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी करते हुए उन्हें “जाहिल और अनपढ़” बताया था और यह कहा था कि वे प्रधानमंत्री बनने के बजाय चाय बेचने के योग्य हैं। बीजेपी ने इस बयान को बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में उठाया और इसे कांग्रेस के कथित अभिजात्य रवैये से जोड़कर प्रचारित किया।
इसी तरह 2017 गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान, जब राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की चुनावी तैयारी मजबूत मानी जा रही थी और मुकाबला कड़ा दिख रहा था, उसी समय अय्यर ने नरेंद्र मोदी को “नीच” कह दिया। इस टिप्पणी ने चुनावी माहौल को अचानक बदल दिया और बीजेपी ने इसे आक्रामक तरीके से उठाया। इस विवाद का कांग्रेस की चुनावी संभावनाओं पर नकारात्मक असर पड़ा और पार्टी सत्ता हासिल नहीं कर सकी। उस समय राहुल गांधी इस बयान से काफी नाराज़ हुए थे और पार्टी अनुशासन को लेकर कड़ा रुख अपनाने की चर्चा भी हुई थी।
गठबंधन की एकजुटता पर बढ़ी संवेदनशीलता
अय्यर का ताजा बयान ऐसे समय आया है जब INDIA गठबंधन साझा नेतृत्व और सामूहिक रणनीति के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। जानकारों का मानना है कि नेतृत्व पर सार्वजनिक मतभेद विपक्षी एकता के संदेश को कमजोर कर सकते हैं और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को हमला करने का अवसर देते हैं।
मणिशंकर अय्यर की टिप्पणी ने कांग्रेस के अंदर नेतृत्व और संदेश नियंत्रण की चुनौती को फिर उजागर कर दिया है, जबकि INDIA गठबंधन की आंतरिक राजनीति को लेकर अटकलें भी तेज हो गई हैं।




